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Litti-Chokha from Bihar: देसी स्वाद का ग्लोबल तड़का, दुनिया में गूंजा बिहार का नाम
Litti-Chokha: बिहार के पारंपरिक व्यंजन लिट्टी-चोखा ने नाइजीरिया से जापान तक अपने स्वाद का जादू बिखेर दिया है, जिससे बिहार की संस्कृति को मिला वैश्विक सम्मान।
Litti-Chokha
बिहार: अपनी खूबसूरत परम्पराओं और रोचक इतिहास के चलते बिहार हमेशा ही सैलानियों के बीच पसंदीदा स्थल रहा है। लेकिन बिहार सिर्फ इतिहास और संस्कृति की धरती नहीं है, बल्कि स्वाद की भी राजधानी है। यहां के खाने में वो देसीपन है, जो हर किसी के दिल और जुबां को छू जाता है। फिर वो चाहे सौंधी लिट्टी-और चटपटे चोखा की सादगी हो या कढ़ाई में छन रही प्याजी की करारी खुशबू, यहां की हर पारंपरिक डिश में बिहार की मिट्टी का असली स्वाद बसता है। यही वजह है कि इस राज्य के कुछ पारंपरिक व्यंजन भारत के 5 स्टार होटलों से लेकर विदेशों तक अपनी पहुंच रखते हैं। इसी कड़ी में जब बिहार, मधुबनी के संजय कुमार झा ने नाइजीरिया में ‘लिट्टी-चोखा फूड फेस्टिवल’ कराया, तो विदेशी लोग भी इस व्यंजन के दीवाने बन गए। इतना ही नहीं, भारत आए जापान के राजदूत तक बिहार का लिट्टी-चोखा खाकर इसके मुरीद बने बिना नहीं रह सके।
दरअसल, बिहार का खाना सिर्फ भूख नहीं शांत करता बल्कि यह खाने की थाली में अपनी परंपरा, संस्कृति और अपनापन भी परोसता है। यही वजह है कि दुनिया में आज इस राज्य की लोकसंस्कृति से लेकर देसी पकवान की अपनी अलग पहचान कायम है।
बिहार का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ता
रोमहर्षक लोकसंस्कृति और खूबसूरत परंपराओं में रचा-बसा बिहार रामायण काल से ही इतिहास का हिस्सा रहा है। उस दौर में बिहार दो मुख्य क्षेत्रों मगध और विदेह में बंटा था। मगध की राजधानी राजगृह (अब राजगीर) थी, जबकि विदेह की राजधानी जनकपुर थी, जिसके राजा थे प्रसिद्ध राजा जनक। यही वह धरती है जहां हमेशा ही विद्या, धर्म और दर्शन की धारा बहती रही। सम्राट बिम्बिसार, अजातशत्रु और अशोक जैसे महान शासकों ने इसी मिट्टी से राज किया। बोधगया की भूमि पर भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई और वैशाली में भगवान महावीर ने जैन धर्म को दिशा दी। यही कारण है कि बिहार आज भी भारत की आध्यात्मिक भूमि के रूप में जाना जाता है।
बिहार की पहचान बन चुका है ‘लिट्टी-चोखा’
बिहार के पारंपरिक व्यंजन लिट्टी-चोखा को भला कौन नहीं जानता! यह व्यंजन बिहार की आत्मा में बसता है। गेहूं के आटे की गोल लिट्टी, जिसमें सत्तू का मसालेदार मिश्रण भरा होता है, और उसके साथ लकड़ी के जलावन में भुना हुआ सौंधा आलू-बैंगन का चोखा परोसा जाता है।
नाइजीरिया में इसी वर्ष आयोजित लिट्टी-चोखा फूड फेस्टिवल ने इसे फिर से विश्व मंच पर चमका दिया। मधुबनी निवासी संजय कुमार झा ने इस आयोजन से बिहार की संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। झा का कहना है कि, 'लिट्टी-चोखा सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि बिहार की संस्कृति और आत्मा का प्रतीक है।' दिलचस्प बात यह है कि जापान के भारत और भूटान में राजदूत केइची ओनो भी इस व्यंजन के दीवाने हैं। बिहार यात्रा के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें वे लिट्टी-चोखा का आनंद लेते दिखे। उन्होंने बिहारी भाषा में लिखा कि 'गजब स्वाद बा।' इस पोस्ट को लोगों ने इस कदर पसंद किया कि कुछ ही घंटों में वायरल हो गई थी।
बिहार के स्वाद के सफर में बसती है परंपरा की खुशबू
बिहार के खानपान की सबसे बड़ी खूबी है कि यहां का हर व्यंजन अपने अनोखे स्वाद की एक कहानी कहता है। यहां के स्ट्रीट फूड्स दिखने में भले ही साधारण लग सकते हैं, लेकिन इनके स्वाद में वो खुशबू है जो पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं और देसी मसालों से आती है। आइए जानते हैं बिहार के कुछ सबसे लोकप्रिय और अनोखे स्ट्रीट फूड्स के बारे में-
कुरकुरी मिठास से सराबोर खाजा
बिहार की पारंपरिक मिठाई खाजा सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि त्योहारों की शान है। मैदा की पतली परतों को घी में तलकर शक्कर की चाशनी में डुबोया जाता है, जिससे यह कुरकुरी और लंबे समय तक ताज़ा रहने वाली मिठाई बन जाती है। चाहे शादी हो या छठ पूजा, खाजा हर खुशी का एक जरूरी पकवान माना जाता है।
चटपटे चनों का जादू है घुघनी
सुबह का नाश्ता हो या शाम की चाय के साथ कुछ चटपटा स्वाद, घुघनी बिहार की सबसे लोकप्रिय डिश में से एक है। सफेद या काले चनों को मसालों में पकाकर, ऊपर से प्याज, नींबू और हरी मिर्च डालकर परोसा जाता है। इसका स्वाद तीखा, खट्टा और भरपूर होता है। देसी प्रोटीन पावर से भरपूर घुघनी सिर्फ पेट नहीं भरती, बल्कि शरीर को ऊर्जा भी देती है।
देसी स्वाद से भरपूर चोखा रोल
बिहार में बेहद लोकप्रिय परंपरा और फास्ट फूड का मेल है चोखा रोल। आलू, बैंगन और टमाटर से बने मसालेदार चोखे को पराठे में लपेटकर रोल की तरह परोसा जाता है। मौजूदा समय में बिहार में स्कूल-कॉलेज के बाहर या सफर में यह रोल युवाओं की पहली पसंद बन चुका है।
बिहार का देसी सुपरफूड सत्तू पराठा
भुने चने का आटा यानी सत्तू बिहार का सुपरफूड है। सत्तू, मसाले और नींबू का मिश्रण पराठे में भरकर तवे पर सेंका जाता है। यह खाने में हल्का, पचने में आसान और गर्मियों में ठंडक देने वाला व्यंजन है। कई घरों में सत्तू पराठा के साथ प्याज और अचार का कॉम्बिनेशन सुबह का परफेक्ट नाश्ता माना जाता है।
बारिश का मौसम और शाम का साथी है प्याजी
नाम से भले साधारण लगे, लेकिन प्याजी बिहार का सबसे चटपटा स्नैक है। इसमें प्याज, बेसन, हरी मिर्च और मसाले मिलाकर गरम तेल में तला जाता है। बाहर से कुरकुरा और अंदर से बिल्कुल नरम ये पकौड़ा बारिश की शाम और चाय की चुस्की का परफेक्ट साथी है।
बिहार के पारंपरिक व्यंजन सिर्फ स्वादिष्ट नहीं, बल्कि पोषक और टिकाऊ भी हैं।
आज जब बिहार के लोग दुनिया के कोने-कोने में बसे हैं, तो वे अपने इस स्वाद की विरासत को भी लेकर गए हैं। जहां ये बिहारी पारंपरिक व्यंजन अपने स्वाद का जादू बिखेर रहे हैं।


