HPV Vaccine Controversy: HPV वैक्सीन को लेकर पाकिस्तान में क्यों मचा बवाल, भारत का क्या है रुख?

HPV Vaccine Controversy: HPV वैक्सीन को लेकर इस समय बहुत विवाद चल रहा है। आइए जानते हैं विस्तार में सबकुछ।

Akriti Pandey
Published on: 24 Sept 2025 12:02 PM IST
HPV Vaccine Controversy
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HPV Vaccine Controversy

HPV Vaccine Controversy: इस महीने पाकिस्तान ने ह्यूमन पेपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीन को अपनी राष्ट्रीय टीकाकरण योजना में शामिल किया है। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह अफ़वाह तेज़ी से फैलने लगी कि लड़कियाँ बीमार पड़ रही हैं और यह वैक्सीन बांझपन का कारण बन सकती है। लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने इन दावों को पूरी तरह झूठा बताया। उनका कहना है कि वैक्सीन के साइड इफ़ेक्ट्स हल्के और अस्थायी होते हैं, जैसे हाथ में दर्द, हल्का बुखार या थकान। कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण यह साबित नहीं करता कि HPV वैक्सीन बांझपन का कारण बन सकती है।

पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफ़ा कमाल ने कहा, "पाकिस्तान इस वैक्सीन को लागू करने वाला दुनिया का 151वां देश है। इससे पहले, लगभग सभी मुस्लिम देशों सहित 150 देशों में इस वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा चुका है।" पाकिस्तान ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ़ (UNICEF) और गावी (GAVI) वैक्सीन एलायंस के सहयोग से सितंबर में HPV वैक्सीन लॉन्च की थी। इस टीकाकरण के पहले चरण में 9 से 14 साल की लड़कियों को शामिल किया गया है और आने वाले वर्षों में इसे और विस्तार देने की योजना है।

पाकिस्तान की स्थिति

पाकिस्तान में विपक्ष की दो मुख्य रणनीतियाँ देखी जा रही हैं: व्हाटअबाउटिज़्म (Whataboutism) और चेरी-पिकिंग (Cherry-picking)। व्हाटअबाउटिज़्म में लोग टीके के फ़ायदों की बजाय अन्य बीमारियों का हवाला देते हैं, जैसे – "क्या पोलियो का टीका विवादास्पद नहीं था?" या "स्तन कैंसर ज़्यादा आम है।"

चेरी-पिकिंग में चुनिंदा घटनाओं को उजागर करके टीके के ख़िलाफ़ अभियान चलाया जाता है, जबकि लाखों लोगों में इसकी सुरक्षा के प्रमाणों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में हर साल लगभग 3,000 महिलाओं की मृत्यु गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर से होती है। अब सोशल मीडिया पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन मौतों को रोकना ज़रूरी है, जबकि दूसरी बीमारियाँ ज़्यादा जानें ले रही हैं। पाकिस्तान जैसे देशों में इलाज महँगा और मुश्किल है, और सामाजिक कलंक की वजह से महिलाएँ इलाज कराने में देरी कर देती हैं।

भारत का रुख

भारत में HPV वैक्सीन को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण है। कई राज्यों ने इसे स्कूलों और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में लड़कियों के लिए शुरू कर दिया है। HPV वैक्सीन सिर्फ़ एक टीका नहीं है, बल्कि लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा का अवसर है। पाकिस्तान और भारत, दोनों के अनुभव बताते हैं कि सिर्फ़ सप्लाई करना ही पर्याप्त नहीं है; लोगों में विश्वास और जागरूकता पैदा करना भी बेहद ज़रूरी है।

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Akriti Pandey is a Education & job Desk Content Writer at Newstrack.com.

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