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दुःख-रोग-चिंता से निजात का मूलमंत्र—आस्था, नामजप और कर्म की शक्ति
Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज के प्रवचन लोगों को काफी प्रभावित करते हैं ऐसे में उन्होंने भक्तों को दुःख-रोग-चिंता से निजात का मूलमंत्र बताया।
Premanand Ji Maharaj (Image Credit-Social Media)
Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद महाराज ने अपने वृंदावन स्थित आश्रम 'श्री हित राधा केली कुंज' में आयोजित सत्संग में कहा कि, मानव जीवन में दुःख, रोग, चिंता और बधाएं सामान्य स्थितियां हैं, लेकिन इनसे एक ही मंत्र अखंड श्रद्धा और सच्चे कर्म द्वारा छुटकारा संभव है। महाराज जी ने अचूक उपायों की जगह साधारण, सहज और व्यावहारिक आध्यात्मिक सशक्तता पर जोर देते हुए अंधविश्वास को खारिज किया और बताया कि कैसे भगवान की कृपा और नामउच्चारण से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उनके प्रवचन के मुख्य संदेश
जिन्हें सुनने के बाद श्रोताओं को आत्मिक शांति और प्रेरणा मिली। वो हैं -
दुःख, रोग, चिंता से कैसे मुक्ति पाएं
महाराज जी ने स्पष्ट किया कि कि सभी दुःख, बीमारियां और मानसिक चिंता मूल कर्म है। केवल नाममनन और आस्था से ही राहत मिलती है। उन्होंने कहा कि एक विशेष मंत्र जो उन्होंने प्रवचन में दिया वही रक्षा कवच बन सकता है। बस राधा नाम जपो सारे रोग-शोक, पाप सब नष्ट हो जाएगा। उन्होंने बताया कि मनुष्य का एक ही धर्म हो 'नाम जपो, कर्म साफ करो, विश्वास अडिग रखो'।
अंधविश्वास क्या है और उसे कैसे छोड़ें
उन्होंने नज़र-टोना, उल्टाजूता, काला जादू जैसी कुरीतियों को अंधविश्वास करार दिया। उन्होंने कहा कि - 'नज़र टोना की बातें सिर्फ भ्रम हैं। जो देख रहा है मालिक ही देख रहा है, तो अमंगल कैसे होगा?'
ये सिर्फ सतही उपाय हैं जो मन में डर बोते हैं। असली समाधान कर्म और चेतना से आता है। महाराज जी का कहा ये प्रसंग यह दर्शाता है कि देवी-देवताओं में भरोसा सकारात्मक है, लेकिन पाखंडों को हमें त्याग देना चाहिए।
भाग्य, कर्म और ईश्वर की ईश्वरीय दृष्टि
महाराज जी ने दृढ़ता से कहा कि भाग्य का लेखा कभी मिटता नहीं, लेकिन सही कर्मों और भगवान की कृपा से उसे एक सकारात्मक मोड़ दिया जा सकता है ।
उनका मुख्य सिद्धांत यह था कि भगवान की कृपा में सबसे बड़ी शक्ति है। जादू-टोना तंत्र, मंत्र, या मान्यताओं से कहीं अधिक।
इसी भाव को उन्होंने पुष्ट किया कि 'हर कार्य की सफलता और असफलता हमारे कर्मों पर निर्भर है। भगवान का नाम जपने से मंगल होता है।'
एक मंत्र में अनंत शक्ति है
महाराज जी ने राधा नाम जप मंत्र को जीवन-दुःख निवारण की चाबी बताया, जिसमें विश्वास और नियमितता फलित परिणाम देती है।
ईश्वरीय दृष्टि एवं अधीनता
यदि जीवन को भगवान की दृष्टि से देखा जाए, तो कोई मनुष्य-दृष्टि उसे प्रभावित नहीं कर सकती। यही आत्मविश्वास महाराज जी द्वारा प्रवाहित किया गया संदेश था। महाराज जी सामान्य जीवन में ही आध्यात्मिक अभ्यास की प्रेरणा देते हैं। जैसे कि नाम-उच्चारण, सही कर्म, सकारात्मक दृष्टिकोण।
प्रेम एवं विश्वास की शिक्षा
प्रेम एवं विश्वास को तत्वों की बजाय भावों का आधार माना गया जैसे कृष्ण प्रेम में सखियों के श्रृंगार प्रसंगों- की व्याख्या के माध्यम से बताया कि प्रेम में अंकित चीजें कर्म श्रेष्ठ होती हैं ना कि दिखावटी उपाय।
सुझाई आत्म-परिवर्तन की राह
उन्होंने बताया कि व्यक्ति का असली परिवर्तन तब होता है जब वह अपनी अंतर्निहित क्षमता और नामस्मरण पर अवलंबित होकर कर्म-संयम की ओर अग्रसर होता है। इसमें ही सच्ची शक्ति निहित है। प्रेमानंद महाराज जी का यह प्रवचन अंधकार की बाधाओं को तोड़ कर जीवन को दुःख-रोग-चिंता से मुक्ति प्रदान करता है। अंधविश्वासों को व्यर्थ बताकर नाम-जप और कर्म, आस्था की सरल लेकिन अनमोल शक्ति को उजागर करता है।
महाराज जी का यह संदेश हर भक्त और साधक को इस बात की प्रेरणा देता है कि हमें सिर्फ ऊंचे चरम की साधना की नहीं, बल्कि जीवन में हर क्षण सचेत, सरल और ईश्वरीय संवाद की आवश्यकता है। यह प्रवचन हमें याद दिलाता है जब मन, आस्था और कर्म साथ चलें, तो दोहे में कही गई उस 'एक मंत्र' से जीवन की सारी विघ्न संहार होती है।


