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Lord Ganesha Idol: सिद्धिविनायक से विघ्नविनाशक तक, सूंड की दिशा से जानें गणेश जी का स्वरूप
गणपति बप्पा के विविध रूप और उनकी प्रतिमाओं में सबसे अधिक चर्चा उनकी सूंड की दिशा को लेकर होती है।
Ganesh Trunk Direction Meaning (Image Credit-Social Media)
Lord Ganesha Idol Trunk Direction: भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी को विघ्नहर्ता गणेशजी का जन्म हुआ था। इसी दिन से दस दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ होता है। इस बार यह पावन पर्व 27 अगस्त 2025 से 6 सितंबर तक देशभर में मनाया जा रहा है। गणपति बप्पा के विविध रूप और उनकी प्रतिमाओं में सबसे अधिक चर्चा उनकी सूंड की दिशा को लेकर होती है। दरअसल, गणेशजी की सूंड केवल उनके स्वरूप का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसमें छिपा है गहन आध्यात्मिक रहस्य और जीवन को दिशा देने वाला संदेश। गणेश चतुर्थी से लेकर धनतेरस पर गणेश जी की प्रतिमा को लेकर अक्सर हम सब उनकी सूंड को लेकर दुविधा में रहते हैं कि आखिर किस दिशा में सूंड का मुड़ा होना शुभ होता है। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से -
गणेश जी की दाईं ओर सूंड-तेज, जाग्रति और शक्ति का प्रतीक
गणेशजी की वह प्रतिमा जिसमें सूंड दाईं ओर मुड़ती है, उसे दक्षिणाभिमुखी गणपति कहा जाता है। 'दक्षिण' का सीधा संबंध दक्षिण दिशा से है। जिसे शास्त्रों में यमलोक की दिशा माना गया है।
साथ ही शरीर की दाईं ओर स्थित सूर्य नाड़ी का भी इससे गहरा संबंध माना जाता है। यह नाड़ी ऊर्जा, तेज और सक्रियता का स्रोत है। इसलिए दाईं सूंड वाले गणेशजी को जाग्रत और अत्यंत प्रभावशाली रूप माना जाता है। उनकी पूजा सामान्य तरीके से नहीं की जा सकती। इसमें सटीक विधि-विधान और नियमों का पालन आवश्यक है। यह रूप साधना और विशेष कार्यों की सफलता के लिए अत्यधिक पूजनीय है। दक्षिणाभिमुखी गणेशजी को ही सिद्धिविनायक भी कहा जाता है।


