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Ethanol Petrol Mixing Issues: मिलाते रहो, इसकी भी आदत डाल लेंगे
Ethanol Petrol Mixing Issues India: अमेरिका, ब्राज़ील आज से नहीं, 50 साल से एथेनोल मिक्स पेट्रोल इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन वहां सब साफ़ है, सबको पता है।
Ethanol Petrol Mixing Issues India (Image Credit-Social Media)
Importance of Ethanol: अल्कोहल एक ऐसी चीज है जिसके अनेक उपयोग हैं। दवा-दारु से लेकर साफ सफाई और ईंधन तक, हर जगह फिट। बाकी जगह तो हमेशा से चला ही आ रहा था लेकिन इधर एक मसला नया खड़ा हो गया है, पेट्रोल में इसकी मिक्सिंग का। जब तक मिक्सिंग थोड़ी कम थी, लोग जब तक नादान अनजान थे तब तक चल गया। लेकिन अब पैमाना छलक गया है। इसलिए लोग परेशान हैं। मामला गन्ने के रस से निकले एथेनोल रूपी अल्कोहल का है। एथेनोल के गुण तो 1826 में ही पहचान लिए गए थे । लेकिन कार चला कर दिखाई 1908 में हेनरी फोर्ड ने। पचास - पचपन साल पहले से ब्राज़ील और अमेरिका ने एथेनोल को पेट्रोल में मिक्स करना शुरू कर दिया है। भारत भी गन्ना प्रधान देश है, सो हमने भी 2001 में 5 फीसदी एथेनोल मिक्सिंग शुरू कर दी जो अब 20 फीसदी तक पहुंच गई है और आने वाले 5 बरसों में 30 फीसदी हो जाएगी। दिक्कत न एथेनोल से है और न मिक्सिंग से है। दिक्कत कहीं और है, जो न अमेरिका में है, न ब्राज़ील में और न यूरोप में। तमाम अन्य चीजों की तरह, दिक्कत भारत में है।
एथेनोल सस्ता है, देश में जितना चाहो बना लो, बाहर से तेल कम मंगवाना पड़ेगा। एथेनोल से गाड़ी चलाओ तो जहरीला धुंआ नहीं निकलता। फायदा ही फायदा। जनता को ये फायदा तो 25 साल पहले से बताया जा रहा है। लेकिन तीन बातें आज तक नदारद हैं।
पहली बात ये कि जब एथेनोल पेट्रोल से सस्ता है तो फिर हमें यानी गाड़ीवालों को सस्ता क्यों नहीं मिल रहा? दूसरी बात ये कि ये कौन बताएगा कि मेरी गाड़ी का इंजन एथेनोल के लायक है कि नहीं? तीसरी बात कि हमें खालिस पेट्रोल से गाड़ी चलानी है तो वो क्यों नहीं मिल रहा?
सबने चुप्पी साध रखी है। तेल कंपनियों से लेकर ऑटोमोबाइल कम्पनियों और सरकार तक ने खामोशी ओढ़े रखी है।जनता है कि सोशल मीडिया पर पिली पड़ी है। कोई पीआईएल की बात कर रहा है, तो कोई पेट्रोल बहिष्कार की, तो कोई आंदोलन की। मामला टिपिकल बाबूगीरी का है। कोई साफ जवाब न दो। सब गोलमोल रहने दो। चुप्पी साध लो या सब नकार दो। अरे भाई 20 फीसदी मिलाओ चाहे 100 फीसदी। गाड़ी चलनी चाहिए बरसों बरस, उसमें दिक्कत न आये। बस इतनी सी बात है। लेकिन कन्फ्यूजन इतना है कि कोई दूर करने को तैयार नहीं जबकि उपाय बेहद आसान हैं।
चॉइस दे दीजिए एथेनोल मिक्स पेट्रोल और खालिस पेट्रोल की। जिसे जो मन चाहे भरवाए। दाम अलग अलग रख दीजिये। पेट्रोल पम्पों पर बड़े बड़े इश्तेहार लगवा दीजिये, लोग खुद अपना तय कर लें। गाड़ियों के विज्ञापनों में ये लिखवाना जरूरी कर दीजिये कि वो गाड़ी कितने परसेंट एथेनोल पर चलने लायक है। जो पुरानी गाड़ियाँ हैं उन्हें बिना मिक्सचर वाला तेल दिलाइये। गाड़ियों की बीमा पालिसी में एथेनोल मिक्सिंग से कोई खराबी हुई तो क्या बीमा मिलेगा, ये भी तय हो जाए। इतनी सी जागरूकता फैलाने में भला क्या नुकसान हुआ जा रहा है? अगर हो रहा है तो किसका, ये भी बताया जाये।
अमेरिका, ब्राज़ील आज से नहीं, 50 साल से एथेनोल मिक्स पेट्रोल इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन वहां सब साफ़ है, सबको पता है। वहां खालिस पेट्रोल भी है, 5 से 75 फीसदी वाला मिक्सचर भी और खालिस एथेनोल भी। सबके दाम अलग अलग। सबकी माइलेज अलग अलग। और जनता को पूरी जानकारी भी, सब विकल्प भी। वहां पर गाड़ी बनाने वाली कंपनियां खासतौर पर ऐसे इंजन बनाती है जो एथेनोल मिक्स के लिए ही डिज़ाइन हैं। गाड़ी खरीदने जाइये तो सब पहले से बात दिया जाएगा। इंजन अलग इसलिए कि आखिर पेट्रोल और एथेनोल हैं तो अलग ही चीजें। एथेनोल पानी आधारित आर्गेनिक केमिकल है, जो जंग लगा सकता है, पुर्जों को नुकसान पहुंचा सकता है। इंजन की जिंदगी घटा देता है। माइलेज घटा देता है।
विदेशी लोग होते होशियार हैं। तेल की वजह से गाड़ी खराब हुई तो इतने मुकदमे लाद देंगे कि कम्पनियों का बैंड बज जाएगा, सो कोई जोखिम नहीं उठाता। सरकार, तेल कम्पनियाँ और गाड़ी कम्पनियाँ - कोई नहीं। हम ठहरे सीधे साधे, भरोसा करने वाले लोग। जो तेल मिल गया भरवा लिया, गाड़ी पसंद आई खरीद ली, सब आँख बंद कर मंजूर। गाड़ी के साथ मिली मैनुअल किताब को पढ़ना तो दूर, कोई देखता तक नहीं। सवाल पूछते हैं तो बस इतना कि कितना माइलेज देगी?
तेल में 25 साल से इथेनॉल मिल रहा है, ये तक पता नहीं। अब 20 फीसदी मिक्स है ये बात भी अंग्रेजीदां सोशल मीडिया पर ही चर्चा का विषय है। जनता को इथेनॉल से ज्यादा शाम वाली दवाई में मिक्सिंग की फिक्र है। अरे भाई, दूध, पनीर, दवा, मिठाई, हवा, पानी, खाना ... किसी चीज में क्या मिला है किसकी मिक्सिंग है, हमने कभी पूछा? कभी फिक्रमंद हुए? यही हाल पेट्रोल का है। हमको बस ये पता है कि सरकार जो कर रही वो हमारी भलाई का ही होगा। बात भी सही है, देश का तेल बिल, प्रदूषण, इन्हीं सबके लिए तो एथेनोल मिक्सिंग हो रही है। गाड़ी चलती रहनी चाहिए, बस।
दिल्ली में 10-15 साल पुरानी कारों पर बैन लगा। लोगों को तकलीफें हुईं, हल्ला हायतौबा मची तो सब टाल कर मामला शांत किया गया। क्या उसी तरह की हायतौबा का इंतजार है? अरे हुजूर, हमारी और देश की भलाई के लिए जो मन चाहे करिए, बस ज़रा पहले से बता दिया करिए, समझा दिया करिये। किसी भी शक शुबहे को सरासर ख़ारिज कर देने या उसका मजाक उड़ाने से समस्या सुलझने की बजाय उलझती ही है। जब शौच से लेकर हाथ धोने और ट्राफिक नियम से लेकर साइबर अपराध तक जागरूकता की अलख जलाई जाती रही है तो फिर ज़रा एथेनोल और पेट्रोल की मिक्सिंग पर भी जनता का शक दूर कर दें। नहीं तो, मिलाते रहिये, हमें तो सब चीज की आदत है, इसकी भी डाल लेंगे।


