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उत्तर प्रदेश इलेक्शन वाॅच और एसोसिएशन फाॅर डेमोक्रेटिक रिर्मोेम्स ने उत्तर प्रदेश लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 96 उम्मीदवारों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया, जो प्रथम चरण के सहानपुर, कैराना, मुजफ्रफरनगर, बिजनौर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे है।

लोकसभा चुनाव 2019 के पहले एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने चुनाव में मतदाताओं की प्राथमिकताएं जानने के लिए अब तक का सबसे बड़ा मतदाता सर्वेक्षण कराया। यह सर्वेक्षण, अक्टूबर 2018 और दिसंबर 2018 के बीच किया गया।

वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच (डब्ल्यूबीईडब्ल्यू) और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने ‘शासन के मुद्दों और मतदान व्यवहार 2015’ पर संयुक्त रूप से सर्वेक्षण कराया है। इस सर्वेक्षण में राज्य की सभी 42 लोकसभा सीटों को कवर किया गया है और करीब 21000 मतदाताओं से बात की गई है।

त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने मतदाता प्राथमिकताओं की उपेक्षा की है और कृषि, रोजगार, सड़क अवसंरचना और कानून व्यवस्था सहित लगभग सभी शासन मापदंडों पर "खराब और कमतर" प्रदर्शन किया है, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की एक रिपोर्ट में कहा गया है )।

लोकसभा चुनाव 2019 के पहले एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने चुनाव में मतदाताओं की प्राथमिकताएं जानने के लिए अब तक का सबसे बड़ा मतदाता सर्वेक्षण कराया। यह सर्वेक्षण, अक्टूबर 2018 और दिसंबर 2018 के बीच किया गया।

इसने 573 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों को कवर किया, जिसमें 2,73,487 मतदाता भाग ले रहे थे, जो विभिन्न जनसांख्यिकी के बीच फैले हुए थे। ये सर्वेक्षण उत्तर प्रदेश के सभी 80 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों भर में लगभग 40,000 उत्तरदाताओं को कवर किया।

करोड़पति उम्मीदवार: 184 उम्मीदवारों में से 131 (71%) करोड़पति हैं। 2014 अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में, 148 उम्मीदवारों में से 88 (60%) उम्मीदवार करोड़पति थे।

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड योजना 2018 पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। आपको बता दें, केंद्र ने पिछले साल जनवरी में इस योजना को अधिसूचित किया था।

बेहतर रोजगार के अवसर (2.39), और बेहतर अस्पतालों / प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (2.12) पीने के पानी के शहरी मतदाताओं की प्राथमिकताओं पर सरकार के प्रदर्शन (2.25 5 के पैमाने पर), औसत से कम के रूप में दर्जा दिया गया था।

नेशनल इलेक्शन वाच ने चुनाव से पहले अखिल भारतीय भारतीय सर्वे कराया है जिसमें चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। मतदाताओं की शीर्ष 10 प्राथमिकताओं पर सरकार का प्रदर्शन औसत से कम सामने आया है। यह स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि सरकार के प्रदर्शन से मतदाता असंतुष्ट हैं।