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ग्रहण एक खगोलीय घटना हैं जिसका प्राचीन महत्व भी बहुत हैं। माना जाता हैं कि राहु, सूर्य या चंद्रमा को ग्रसता है तब ग्रहण लगता है। ऐसे में जरा सोचिए की जो राहू सूर्य और चंद्रमा पर अपना असर दिखा सकता हैं वह इंसानों पर कितना प्रभावशाली होगी

लोगों के जीवन में जन्मदिन , समय , माह  व तारीख का बहुत महत्व होता है। हम किसी के उसके जन्म तारीख माह से उसके स्वभाव करियर को अच्छे से जान सकते हैं। इस माह में पैदा हुए लोग साधारणतया बहुत लोकप्रिय होते हैं और इनके आस-पास के लोग इनसे खुश रहते हैं। इन्हें नए दोस्त बनाना और घुमना-फिरना बहुत पसंद होता है।

भगवान विष्णु के विश्राम काल आरंभ के समय को देवशयनी एकादशी कहते हैं। जो आषाढ़ शुक्ल पक्ष में आता हैं। देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु का शयनकाल शुरू हो जाता है ।

आषाढ़ माह पक्ष-शुक्ल,तिथि-एकादशी, दिन बुधवार,नक्षत्र- विशाखा, सूर्योदय-05.45, सूर्यास्त-19.17। बुधवार के दिन 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा जानिए...

5 जुलाई 2020 को गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है।एक महीने में यह  तीसरा ग्रहण है। इससे पहले 5 जून को चंद्र ग्रहण और 21 जून को सूर्य ग्रहण था।  इस बार रविवार के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण  धनु राशि में लग रहा है। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य मिथुन राशि में होंगे।

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि और सोमवार का दिन है। नक्षत्र- हस्त (7.14am)/चित्रा, सूर्योदय-5.44  और सूर्यास्त 19.17 । जानें कैसा रहेगा सोमवार।  

देवशयनी एकादशी  को मनोकामना पूर्ति की एकादशी के रूप में जानते है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन पड़ने वाली देवशयनी एकादशी के दिन मनोकामना पूर्ति के लिए किये गए उपाय फलीभूत होते हैं।इस महीने देवशयनी एकादशी 1जुलाई 2020  (बुधवार) को है।

आंखों की खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम काजल करता है और आंखों की खूबसूरती से ही चेहरे की सुंदरता बढ़ती है। इसलिए महिलाएं अपनी आंखों में काजल लगाती हैं,  बच्चे हो या बड़े किसी को भी बुरी नजर से बचाने के लिए काजल लगाया जाता है।

प्रत्येक अभिवावक की आकांक्षा होती है कि वह अपनी सन्तान को हर सम्भव साधन जुटाकर बेहतर से बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा सके जिससे उसके व्यकितत्व में व्यापकता आये और वह स्वंय जीवनरूपी नैय्या का खेवनहार बनें। सारी सुविधायें होने के बावजूद भी जब बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता है एंव जो कुछ पढ़ते है,

जन्म और मृत्यु जीवन का सत्य है। जो आया है वो जाएगा। जीवन का परम सत्य हैं मृत्यु जो हर व्यक्ति को आनी हैं। हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद शरीर को अग्नि देने का संस्कार है। जिसे अंतिम संस्कार कहा जाता हैं। हिन्दू धर्म में अंतिम संस्कार क्रिया के कुछ नियम होते हैं जिनका पालन करते हुए शरीर को पंचतत्वों को सौंपा जाता है औ