Chandrayaan-2

विक्रम की लैंडिंग आखिरी पलों में गड़बड़ हुई।  ये दिक्कत तब शुरू हुई जब विक्रम लैंडर चांद की सतह से मात्र 2.1 किलोमीटर ऊपर था।  अब वैज्ञानिक विक्रम लैंडर के उतरने के रास्ते का विश्लेषण कर रहे हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक हर सब-सिस्टम के परफॉर्मेंस डाटा में कुछ राज छिपा हो सकता है।  यहां लिक्विड इंजन का जिक्र बेहद अहम है।  विक्रम लैंडर की लैंडिंग में इसका अहम रोल रहा है।

भारत के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 की असफल हो गया तो पूरा देश भावुक हो गया। लैंडर विक्रम का शुक्रवार यानी 6 सितंबर की देर रात चांद की सतह से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर संपर्क टूट गया। सालों से मेहनत कर रही वैज्ञानिक मायूस हो गए जिसमें इसरो के चीफ के. सिवन भी शामिल थे।

शनिवार तड़के उस समय सांस रुक गई जब जब लैंडर विक्रम से चंद्रमा के सतह से महज दो किलोमीटर पहले इसरो का संपर्क टूट गया। भारत के चंद्रयान-2 मिशन चांद की सतह छूने से चूक गया"।

चांद पर पहुंचने के लिए जब पूरा देश तैयार था, पर फिर चंद्रयान-2 बीती देर रात चांद से सिर्फ 2.1 किलोमीटर की दूरी पर आकर अपना रास्ता भटर गया। लेकिन अभी भी इस मिशन को लेकर उम्मीदें जताई जा रही हैं।

पाकिस्तान भारत को जम्मू-कश्मीर और आर्टिकल 370 को लेकर परेशान करने की कोशिश में लगा हुआ है। आर्टिकल 370 को लेकर पाकिस्तान इतना तिलमिलाया हुआ है कि प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके कैबिनेट मंत्री लगातार घुसपैठ और परमाणु हमले की धमकी दे रहे हैं।

पहले ही इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि लैंडर विक्रम के चांद की सहत पर पहुंचे से पहले के 15 मिनट काफी अहम होंगे। बता दें कि इसरो चंद्रयान-2 चांद का धरती से महज 2.1 किलोमीटर की दूरी पर आकर अपना रास्ता भटक गया। 

चंद्रयान 2 जैसा महत्वकांशी प्रोजेक्ट एकदम सही से चल रहा था। सब कुछ प्लान के मुताबिक हो रहा था। मगर शनिवार तड़के सुबह इस मिशन के साथ इसरो को तब झटका लगा जब महज 2.1 किलोमीटर पहले लैंडर विक्रम से इसरो का संपर्क टूट गया।

'मिशन का सिर्फ पांच प्रतिशत -लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर- नुकसान हुआ है, जबकि बाकी 95 प्रतिशत -चंद्रयान-2 ऑर्बिटर- अभी भी चंद्रमा का सफलतापूर्वक चक्कर काट रहा है।'

चंद्रयान 2 शुक्रवार देर रात 1 से 2 बजे के बीच चांद की सतह पर उतरने वाला है। भारत अब इतिहास रचने से कुछ ही दूर है। भारत के अलावा तमाम देश भी चंद्रयान पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए हैं। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी भी इसके लिए काफी उत्साहित हैं।

हालांकि, सॉफ्ट लैंडिंग को लेकर इसरो ने भरोसा जताया है। मगर इसपर भी प्रकाश डालना जरूरी है कि सॉफ्ट लैंडिंग के महज 37% प्रयास ही अब तक सफल हो पाये हैं। हां, ये बात भी सही है कि अगर इसरो इसपर पूरा भरोसा जताया है तो इसके पीछे भी कोई कारण होगा। दरअसल, इसरो को अडवांस्ड टेक्नॉलजी पर पूरा भरोसा है।