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कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने केंद्र और राज्य सरकारों को देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने को लेकर सलाह दी है।

कोरोना वायरस के कारण अधिकांश देशों में लॉकडाउन जारी है, ऐसे में वैश्विक अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। भारत की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की जो रिपोर्ट भारत की अर्थ व्यवस्था को लेकर सामने आयी है, वो बेहद खराब है।

शून्य वृद्धि दर करीब 60 साल की सबसे खराब स्थिति होगी। बहरहाल, इसके साथ ही आईएमएफ ने जोड़ा कि अब भी एशिया क्षेत्र अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर कर सकता है। इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था में तीन प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है।

यह ठीक वैसा है जैसे किसी साइकिल का एक पहिया पंक्चर हो जाए तो आप उम्मीद नहीं कर सकते हैं ​वो कितनी आगे तक जाएगी। आसान शब्दों में कहें तो अगर यह संकट कुछ और समय के लिए रहता है तो अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से को प्रभावित करेगा। इसमें बैंकिंग सेक्टर भी शामिल होगा।

कोरोना वायरस की वजह से देश की इकोनॉमी बुरी तरह लड़खड़ा गई है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इकोनॉमी को 9 लाख करोड़ से अधिक का नुकसान हो सकता है।

कोरोना के चलते घटती आर्थिक मंदी के बीच बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 48 घंटे में दो बार घटाया है।

चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर-दिसंबर में देश की आर्थिक जीडीपी (GDP ) दर 4.5 फीसदी से बढ़कर 4.7 फीसदी हो गई है। इससे पहले जुलाई-सितंबर तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ घटकर 4.5 फीसदी के स्तर पर आ गया थी।

दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बना। 2.94 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी के साथ भारत ने साल 2019 में ब्रिटेन और फ्रांस को पीछे छोड़ दिया है।

मंदी से गुजर रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर है। बैंक ऑफ अमेरिका ने बुधवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में खपत में बढ़ोतरी हुई है और अब उसकी हालत पहले से अच्छी है।

वित्त वर्ष (2018-19) के मुकाबले इस साल (2019-20) रोजगार में लगभग 16 लाख अवसर घटने का अनुमान है। एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट ईकोरैप में यह आशंका जताई गई है। अर्थव्यवस्था में सुस्ती की वजह से रोजगार प्रभावित हो रहे हैं। असम, बिहार, राजस्थान, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में पैसे भेजने (रेमिटेंस) में कमी आने से पता चलता है