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दुनिया के तमाम देश चंद्रमा की खाक छानने में जुटे हैं। भारत भी चंद्रमा के करीब पहुंच गया है। लेकिन अभी तक चंद्रमा के बारे में पूरी और सही जानकारी नहीं आ सकी है।

इस कविता को आपने बचपन में सुना ही होगा, कभी छोटे बच्चों के मामा, कभी इश्क में महबूबा का चांद बना, कभी चलनी से चांद का दिदार हुआ, कभी ईद के चांद की बेसब्री....... आखिर चांद है क्या...

चांद पर पहुंचने के लिए जब पूरा देश तैयार था, पर फिर चंद्रयान-2 बीती देर रात चांद से सिर्फ 2.1 किलोमीटर की दूरी पर आकर अपना रास्ता भटर गया। लेकिन अभी भी इस मिशन को लेकर उम्मीदें जताई जा रही हैं।

ज्योतिष में सभी नौ ग्रहों में सबसे ज्यादा चलने वाला ग्रह है चंद्रमा, जो मन का कारक है। इस ग्रह का किसी  से कोई शत्रुता नहीं होती है। मतलब यह चंद्रमा का मित्र ग्रह  वैसे तो सूर्य  व बुध है लेकिन इसके अलावा भी इस ग्रह की अन्य ग्रहों से कोई शत्रुता नहीं होती है। चंद्रमा मंगल, गुरु, शुक्र व शनि से सम संबंध रखते है। चन्द्र कर्क राशि का स्वामी है।

आज पूरे देश को सिर्फ उस पल का इंतजार है, जब चंद्रयान-2 चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए आज ऐतिहासिक दिन है। चंद्रयान-2 शुक्रवार की रात डेढ़ से ढाई बजे के बीच चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा।

आज हम बात करते हैं चंद्रमा की, क्या आप को मालूम है चांद की धरती में छिपा हो सकता है ढेर सारा खज़ाना! यह बात अभी तक रहस्य बनी हुई है। क्या इसी लिए सभी चांद पर जाने की तैयारी कर रहे हैं, क्या अभी भी वहां समुद्र मंथन के प्राप्त मूल्यवान धातु या खज़ाना मौजूद है?

आप सभी जानते होंगे कि अमेरिका की नासा ने 16 जुलाई, 1969 को मिशन 'अपोलो 11’ के तहत चंद्रमा पर पहली बार नील आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन को भेजा गया था। जब इंसान ने चांद पर कदम रखा, तो इस कामयाबी के संदर्भ में पृथ्वी के सभी देश काफी खुश नजर आये।

मानव सभ्यता का वो सबसे बड़ा दिन कोई कैसे भूल सकता है, वो दिन था जब अमेरिका की नासा ने 16 जुलाई, 1969 को मिशन 'अपोलो 11’ के तहत चंद्रमा पर पहली बार नील आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन को भेजा था। जब किसी इंसान ने पहली दफा चांद पर कदम रखा था।

उत्तर प्रदेश के दो विद्यार्थी चंद्रमा पर चंद्रयान-2 की लैंडिग के ऐतिहासिक क्षण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ देखने के साक्षी बनेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी सितम्बर में इसरो के नियंत्रण-कक्ष, इसरो टेलीमेट्री, ट्रेकिंग एण्ड कमाण्ड नेटवर्क, बंगलुरू में चन्द्रयान-2 को चन्द्रमा की सतह पर उतरते देखेंगे।

दिल्ली में शुक्रवार को ईद उल अजहा के चांद के दीदार हो गए। बकरीद का त्यौहार 12 अगस्त को मनाया जाएगा। ईद उल जुहा या बकरीद , ईद उल फित्र के दो महीने नौ दिन बाद मनाई जाती है।