#PMNarendraModi.

बैठक के बारे में कहा जा रहा है कि इसमें 70 एकड़ परिसर के लिए मास्टर प्लान पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा । जिसके बाद अयोध्या फैजाबाद विकास प्राधिकरण में नक्षा स्वीकृति के लिए आवेदन किया जाएगा। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है

अपेक्षा की जा सकती है कि प्रधानमंत्री अपने सम्बोधन में जनता के इस नए अवतार के उदय पर संतोष व्यक्त करने के साथ-साथ उससे आने वाले समय की नई अपेक्षाओं की जानकारी भी दें ।

ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय का कहना है महंत नृत्य गोपाल दास जो ट्रस्ट के अध्यक्ष भी है उनके द्वारा अयोध्या में भूमि पूजन का कार्यक्रम 3 व 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आकर करने का अनुरोध किया है

वाराणसी के बारे में यह प्रसिद्ध है कि ‘काशी में कोई भूखा नहीं सोता।’ बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी के वासियों ने लाॅकडाउन के दौरान जरूरतमंदों को समय से भोजन उपलब्ध कराने में जिला प्रशासन को भरपूर सहयोग प्रदान किया।

श्री रामजन्मभूमि ट्रस्ट ने भूमि पूजन कार्यकम के लिए जो तिथि तय की है वह सबसे उपयुक्त तिथि मानी जा रही है। क्योंकि इसके बाद चार्तुमास शुरू हो जाएगा।

अगर हम पिछले 1 दशक के सबसे शक्तिशाली नेताओं की बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सबसे ऊपर आएगा। पिछले कुछ सालों में मोदी की चर्चा पूरे विश्वभर में हो रही है, और इसकी वजह है कि उन्होंने देश और दुनिया के बीच में अपनी एक अलग पहचान बनायी है।

जार्ज के आक्रोशित उद्गार थे : “मुझे लगता है कि इसे किसी गुलाम की औलाद ने लगाया है| कोई सभ्य आदमी ऐसा कतई नहीं करता| किस आधार पर लगा दी है? क्या देश क्या इन लोगों ने खरीदा है ? नेहरू खानदान ! लूटपाट वाला खानदान ?” इसपर रिपोर्टर ने पूछा– “सोनिया की फोटो को क्या हटवाना चाहिए?”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया कि ५ अप्रैल,२०२०की रात ९ बजे सब लोग अपने अपने घरों की छत अथवा बालकनी या घरों की लक्ष्मण रेखा के अंदर रहते हुए नौ मिनट तक दीपक या मोमबत्ती जलायें और कुछ न हो तो टार्च या मोबाइल से रोशनी फैलायें।

नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गुजरात के गांधी नगर में आयोजित तीसरे वैश्विक आलू सम्मेलन को संबोधित किया। इससे पहले दो वैश्विक आलू सम्मेलनों का आयोजन 1999 और 2008 में किया गया था। इस सम्मेलन का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली, आईसीएआर-केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला और पेरू के लिमा में स्थित अंतर्राष्ट्रीय आलू केन्द्र (सीआईपी) के सहयोग से भारतीय आलू संघ द्वारा किया जा रहा है।