poem

 हिन्दी के सुविख्यात कवि रामाधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 ई. में सिमरिया, ज़िला मुंगेर (बिहार) में एक सामान्य किसान रवि सिंह तथा

     शशि पुरवार नेकी अपनी छोड़ कर, बदल गया इंसान मक्कारी का राज है, डोल गया ईमान डोल  गया ईमान, देखकर रुपया पैसा रहा आत्मा बेच, आदमी है यह कैसा दो पैसे के हेतु, अस्मिता उसने फेंकी चौराहे पर नग्न, आदमी भूला नेकी गंगा जमुना भारती, सर्व गुणों की खान मैला करते नीर को, …

।। दरबे में भेडिय़ा ।। देह के दरबे में दुबककर बैठा है एक भेडिय़ा वह रह-रहकर उचकाता है अपनी गर्दन, उसकी आंखों से निकलने लगती हैं चिंगारियां, चमक उठते हैं उसके पैने दांत, निकलने लगते हैं उसके नुकीले नख, वह हमारी रूह पर छाने लगता है और हमारी सम्पूर्ण सत्ता पर आधिपत्य जमा लेना चाहता …

लखनऊ:  बुराई पर अच्छाई  की जीत का त्योहार होली अपने साथ हजारों खुशियां और उम्मीद लेकर आता है। लोग अपनी जिंदगी में  इसी तरह खुशियों के रंग भरते है।        होली आई, होली आई।        रंग और गुलाल लाई।       खुशियों की सौगात लाई ।                                    रंगों की अनुपम बरसात लाई।                                        दादी- …