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ऐसा कहा जाता है की यदि किसी जातक पर साढ़े साती का प्रभाव होता है तो इसके कारण उसे कई प्रकार की शारीरिक, मानसिक, आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है क्योंकि शनि की साढ़े साती हमेशा बुरे प्रभाव वाली ही नहीं होती है।

चाहे कोई भी मौका हो लोग दोस्तों और रिश्तेदारों को गिफ्ट देते है और इसमें हम सबसे पहले या तो उनकी पसंद या फिर अपनी जेब का ध्यान रखते हैं, पर क्या आप जानते हैं किसी को दिया हुआ गिफ्ट आपको कंकाल या फिर धनवान भी बना सकता है। सुनकर हैरानी होगी, लेकिन यह सच है। ब

उत्तर भारत में छः ऋतुएं पूरे साल को मौसम के हिसाब से बांटती हैं । हर मौसम का अपना आनंद है। परंतु पुरानी कहावत है- आया बसंत जाड़ा उड़ंत। यह दिन ऋतु परिवर्तन का परिचायक  भी है। भगवान कृष्ण इस उत्सव के अधिदेवता भी हैं। पक्षियों में कलरव,भौरो की गुंजन,, पुष्पों की मादकता  से युक्त वातावरण बसंत ऋतु की विशेषता है।

सूर्य पुत्र शनि को न्याय का देवता मानते हैं। 24 जनवरी 2020 से शनि धनु राशि को छोड़ देंगे और शनि अपनी स्वराशि मकर में गोचर करेंगे। धनु और मकर राशि मे पहले से ही शनि की साढ़ेसाती चल रही है। शनि की महादशा 19 साल की होती है।

काले​ तिल से विष्णु की पूजा करने का व्रत षटतिला एकादशी है। इस साल 20 जनवरी 2020 को पड़ रहा है। माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि षटतिला एकादशी के नाम से जान जाती है। इस दिन भगवान ​विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना विधिपूर्वक की जाती है। पूजा के समय काले तिल के प्रयोग का विशेष महत्व होता है।

मकर संक्रांति  का त्योहार मुख्य रूप से भगवान सूर्य को समर्पित है। कहते हैं कि सूर्य देव सभी देवों में प्रमुख स्थान रखते हैं। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो सूर्य सभी ग्रहों के पिता हैं।इसलिए ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रह को विशेष महत्व प्रदान किया गया है।

माघ महीने के गणेश चतुर्थी को सकट, तिलवा  और तिलकुटा चौथ का व्रत कहते है।  इस बार सकट व्रत का पूजन 13 जनवरी यानि कि दिन सोमवार  को होगा। ये व्रत महिलाएं संतान की लंबी आयु के लिए करती है। पहले ये व्रत पुत्र के लिए किया जाता रहा है

10 जनवरी को इस साल 2020  का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है। इस साल कुल 6 ग्रहण लगने वाले हैं जिसमें 2 सूर्य ग्रहण और 4 चंद्र ग्रहण है। पहला चंद्र ग्रहण यह ग्रहण रात 10 बजकर 37 मिनट से लेकर 11 जनवरी को देर रात 2 बजकर 42 मिनट तक बना रहेगा। इस चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे से भी ज्यादा रहने वाली है।

शुरू से हमें सिखाया गया है कि अपने से बड़ों के चरण छूकर ही प्रणाम करना चाहिए।ये प्रथा प्रारंभ से  चली आ रही है। इसके पीछे अध्यात्मिक व वैज्ञानिक कारण छुपा है। इस परंपरा के पीछे कई कारण मौजूद हैं

पौष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी का पावन व्रत रखा जाता है। श्री हरि भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी व्रत के समान दूसरा कोई व्रत नहीं है।