religious news

माह – भाद्रपद, तिथि – चतुर्दशी, पक्ष – शुक्ल, वार –बृहस्पतिवार ,नक्षत्र – धनिष्ठा ,सूर्योदय – 06:04, सूर्यास्त – 18:30, चौघड़िया शुभ – 06:08 से 07:40, चर – 10:45 से 12:17, लाभ – 12:17 से 13:50, अमृत – 13:50 से 15:22, शुभ – 16:54 से 18:27।

पितृ पक्ष के समय पितरों का तर्पण कर उनके मोक्ष की कामना की जाती है। हिंदू धर्म और पंचांगों में श्राद्ध के लिए बहुत सारे नियम बने हैं। जिनका पालन करना हर एक हिंदू के लिए अनिवार्य है।  श्राद्ध करने से पितरों का आशीर्वाद तो बना रहता है। उनकी आत्मा को भी शांति मिलती है।

जयपुर माह भाद्रपद,तिथि द्वादशी, पक्ष शुक्ल,वार मंगलवार,नक्षत्र उत्तराषाढ़ा ,सूर्योदय 06:03, सूर्यास्त 18:32, चौघड़िया चर – 09:12 से 10:45,लाभ – 10:45 से 12:18, अमृत – 12:18 से 13:51,शुभ – 15:23 से 16:56

जब चंद्रयान-2 चांद तक पहुंचने वाला था तब ज्योतिषफल बता रहे थे कि अमृत योग में चंद्रयान लैंड करेगा जो शुभ होगा व जल तत्व के लिए जीवनदायी भी रहेगा। लेकिन ऐसा होते होते रह गया है। वैसे भी विज्ञान को ज्योतिष से अलग नहीं कर सकते है। जहां विज्ञान मात खाता है वहां

गणेश उत्‍सव 12 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होगा। महाराष्ट्र के साथ अब पूरे देश में इस पर्व की धूम रहती है।इसे महान उत्सव की तरह पूरी श्रद्धा से मनाया जाता है। कहते है कि गणपति जी के पूजन में रोली स्वास्तिक व रक्षासूत्र का बहुत महत्व है।गणपति जी का प्रतीक रक्षा सूत्र जीवन की सभी समस्‍याओं का समाधान कर सकता है।

राधाष्टमी के दिन श्रद्धालु बरसाना की ऊंची पहाड़ी पर स्थित गहवर वन की परिक्रमा करते हैं। इस दिन रात-दिन बरसाना में बहुत रौनक रहती है। विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। धार्मिक गीतों और कीर्तन के साथ उत्सव का आरम्भ होता है।

सामुद्रिक शास्त्र एक ऐसा शास्त्र है जिसमें व्यक्ति के स्वभाव और चाल-चलन को उसके शरीर की भाव-भंगिमा से जाना जाता है। इस शास्त्र में वर्णन मिलता है कि यदि व्यक्ति शादी के लिए कोई लड़की ढूंढ रहा है तो उसे बिना जाने यह पता लगा सकता है कि वह कैसी चरित्र है।

माह  भाद्रपद, तिथि  द्वितीया ,पक्ष  शुक्ल,वार रविवार,नक्षत्र  उत्तरा फाल्गुनी ,सूर्योदय 05:58, सूर्यास्त 18:43,राहुकाल – 17:07 से 18:43। रविवार के दिन भगवान सूर्य को जल दें। और गणेश भगवान के आगमन की तैयारी में लगने के लिए शुभ दिन है।

2 सितंबर को गणेश चतुर्थी का त्योहार हैं और भक्तगण जोर-शोर से गणेशजी के आयोजन  में लग गए हैं। यह  पर्व 12 दिन तक चतुर्थी से अनन्त चतुर्दशी तक रहता है। इस दौरान कई तरह के भोग चढ़ाए जाते हैं। इससे गणपति प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद मिलता हैं।

तृतीया तिथि रविवार को दिन 11:21 बजे के बाद शुरू होगी। जो सोमवार सुबह 9:01 बजे तक रहेगी।  इसलिए शास्त्रोनुसार सोमवार को तृतीया तिथि मानी जाएगी। भगवान शिव और पार्वती का पूजन सुहागिन व कुंवारी दोनों  करती है। शाम 7:54 बजे तक पूजा करना होगा। क्योंकि उसके बाद से भद्रा लग जाएगा।