Smart Meter की सटीकता पर प्रदेश में संदेह! उपभोक्ता परिषद का दावा 99 प्रतिशत मामलों में रीडिंग गलत

Smart Meter Controversy: प्रदेश में ऊर्जा विभाग द्वारा लगाए जा रहे लाखों स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की पारदर्शिता व सटीकता सवालों के घेरे में है। उसको लेकर उपभोक्ताओं में दुविधा बढ़ती जा रही है।

Prashant Vinay Dixit
Published on: 29 Oct 2025 8:05 PM IST
Smart Meter की सटीकता पर प्रदेश में संदेह! उपभोक्ता परिषद का दावा 99 प्रतिशत मामलों में रीडिंग गलत
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Smart Meter Controversy: उत्तर प्रदेश में ऊर्जा विभाग द्वारा लगाए जा रहे लाखों स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की पारदर्शिता व सटीकता सवालों के घेरे में है। उसको लेकर उपभोक्ताओं में दुविधा बढ़ती जा रही है। अनियमितता के को लेकर उपभोक्ता परिषद ने सरकार से मांग की है कि 2 लाख से अधिक चेक मीटरों की तुलनात्मक मिलान रिपोर्ट (चेक मीटर रिपोर्ट) को सार्वजनिक किया जाए। बता दे कि सरकार ने कुल मीटरों में पांच प्रतिशत चेक मीटर लगाने की व्यवस्था की थी।

चेक मीटर की व्यवस्था पर प्रश्न

प्रदेश में ये मीटर लगाए तो गए हैं, लेकिन इनकी मिलान रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली पर संदेह गहराता जा रहा है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने स्थिति को उपभोक्ताओं में भ्रम और अविश्वास पैदा करने वाला बताया है। यदि स्मार्ट प्रीपेड मीटर पूर्णत सटीक हैं, तो चेक मीटरों की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।

स्मार्ट मीटर की रीडिंग अधिक आई

उपभोक्ता परिषद ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर एक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट है, जिसमें त्रुटि संभव है। जो मिलान सामने आए हैं, उनमें लगभग 99 प्रतिशत मामलों में स्मार्ट मीटर की रीडिंग चेक मीटर से अधिक पाई गई है। जो चिंताजनक है, पूरे प्रदेश में एक भी ऐसा उदाहरण सामने नहीं आया है, जिसमें स्मार्ट मीटर की रीडिंग चेक मीटर से कम मिली हो। यह अस्वाभाविक स्थिति गंभीर जांच की मांग करती है।

उपभोक्ता परिषद की प्रमुख मांग

सभी चेक मीटरों के मिलान की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की कार्यक्षमता की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।

उपभोक्ताओं की शिकायतों का निस्तारण पारदर्शी तरीके से किया जाए।

दोषपूर्ण मीटरों की जवाबदेही तय कर संबंधित कंपनियों पर कार्रवाई की जाए।

मीटर कंपनियां जवाबदेही से मुक्त

उपभोक्ता परिषद ने बिजली कंपनियों से जानकारी प्राप्त करने पर चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर बनाने वाली कंपनियों की कोई जवाबदेही से मुक्त रखा गया है। यदि मीटर तेज चल रहा है, रीडिंग में त्रुटि है, तो न तो कोई रिपोर्ट तैयार की जा रही है, न कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश है। इसको उपभोक्ताओं के अधिकारों के विरुद्ध और पूरी तरह असंवैधानिक बताया है।

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