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चुनाव चिन्ह के लिए कोरोना नियमों की उड़ी धज्जियां, प्रशासन भी मौन

बुधवार को गोरखपुर कलेक्ट्रेट के बाहर चुनाव चिन्ह लेने को उमड़ी भीड़ कोरोना को लेकर बेफिक्र दिखी।

Poornima Srivastava

Poornima SrivastavaReport By Poornima Srivastava

Published on 7 April 2021 11:51 AM GMT

चुनाव चिन्ह के लिए कोरोना नियमों की उड़ी धज्जियां, प्रशासन भी मौन
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photos (social media)

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गोरखपुर। सोशल मीडिया पर यह जुमला तेजी से चल रहा है कि जहां चुनाव हो रहा है, वहां कोरोना गायब हो रहा है। यूपी में हो रहे पंचायत चुनाव में कोरोना गायब हो रहा है या तेजी से पांव पसार रहा है, यह स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से तस्दीक हो रहा है। लेकिन लोगों को जुमले पर अधिक भरोसा है। तभी तो बुधवार को गोरखपुर कलेक्ट्रेट के बाहर चुनाव चिन्ह लेने को उमड़ी भीड़ कोरोना को लेकर बेफिक्र दिखी। दिलचस्प यह है कि ये सब जिलाधिकारी और एसएसपी के परिसर में हो रहा है, जिन्हें कोरोना गाइडलाइन पर अमल कराने की जिम्मेदारी है।

68 जिला पंचायत सदस्य सीट के लिए चुनाव चिन्ह का आवंटन

गोरखपुर जिले की 68 जिला पंचायत सदस्य सीट के लिए बुधवार को चुनाव चिन्ह का आवंटन हो रहा है। चुनाव चिन्ह के लिए बड़ी संख्या में दावेदार और उनके समर्थक उमड़े हुए हैं। किसी को कोरोना संक्रमण की फिक्र नहीं है। इक्का-दुक्का के मुंह पर मास्क लगा हुआ दिखता है। जिन्होंने लगाया भी है, उनका मास्क गले में अटका हुआ है। एक प्रत्याशी के समर्थन में कलेक्ट्रेट में पहुंचे डॉ.प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि कुछ लोगों ने जिलाधिकारी और एसएसपी कार्यालय पहुंचकर भीड़ पर अंकुश की सिफारिश की है। लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा है। सभी एक-दूसरे पर चढ़े जा रहे हैं।

झाड़ू, कैची और जग लेकर लौटे

ब्लाक पर ग्राम प्रधान और बीडीसी सदस्यों को चुनाव चिन्ह मिल रहा है तो कलेक्ट्रेट में जिला पंचायत सदस्य पद के दावेदारों को चुनाव चिन्ह का आवंटन हो रहा है। कई प्रत्याशी चुनाव चिन्ह के रूप में झाड़ू, कैंची, गिलास और जग आदि लेकर लौटते दिखे। कैम्पियरगंज से भाजपा विधायक फतेह बहादुर सिंह की पत्नी साधना सिंह भी जिला पंचायत सदस्य के लिए दावेदारी कर रही हैं। विधायक समर्थक भी कलेक्ट्रेट में शक्ति प्रदर्शन करते हुए देखे गए।

photos (social media)

पुलिस बनी मूकदर्शक

कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिस के जिम्मेदार भी हाथ पर हाथ धरे हुए नजर आए। एक इंस्पेक्टर ने कहा कि सभी वीआईपी हैं। किससे पंगा ले। एक को टोका तो वह नौकरी ही लेने लगा। क्षेत्राधिकारी भी परिसर का निरीक्षण करते दिखे लेकिन उन्होंने किसी को मास्क के लिए टोकने की जहमत नहीं उठाई।

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