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Jhansi: झांसी के मेडिकल कॉलेज में हुए अग्निकांड का मामला, कमिश्नर आदेश के बाद भी FIR दर्ज नहीं
Jhansi News: झांसी मेडिकल कॉलेज अग्निकांड में 19 बच्चों की मौत, कमिश्नर के आदेश के बाद भी अब तक दर्ज नहीं हुआ मुकदमा
झांसी मेडिकल कॉलेज अग्निकांड (photo: social media )
Jhansi News: एक साल पहले हुए मलवा अग्निकांड के मामले में कमिश्नर कानपुर ने जांच में कुछ लोगों को दोषी माना था। इस मामले में 24 मई 2025 को जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। आदेश के बावजूद अब तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। इस मामले में जिलाधिकारी ने संबंधित अफसरों को पत्र लिखकर रिपोर्ट मांगी है।
मालूम हो कि झांसी मेडिकल कॉलेज में 15 नवंबर 2024 की रात SNCU वार्ड मेंहुए भयानक अग्निकांड में 19 बच्चों की मौत हो गई थी। इसमें से कुछ बच्चे ऐसे थे जो जलकर कोयला बन गए थे। इस मामले को योगी आदित्यनाथ की सरकार ने काफी गंभीरता से लिया था और शासन द्वारा इस मामले में जांच के आदेश दिए थे। शासन की जांच में झांसी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह सेंगर, डॉ सचिन माहौर, डॉ कुलदीप चंदेल, डॉ. ओम शंकर चौरसिया, डॉ सुनीता के अलावा कई लोगो को इस अग्निकांड का सीधे तौर पर जिम्मेदार माना गया था। इसके बाद शासन की रिपोर्ट के आधार पर दो लोगों को निलंबित किया गया और कई लोगों को चार्जशीट थमाई गयी थी।
जांच कानपुर कमिश्नरेट को सौंप गई थी
इस मामले में कई और तथ्यों को शामिल करते हुए आगे की जांच कानपुर कमिश्नरेट को सौंप गई थी। पहले 6 महीने तो इस मामले में और आगे की जांच शुरू ही नही हुई। लेकिन एक आईटीआई कार्यकर्ता द्वारा इस मामले में दखल दिया और मामले में सिस्टम हरकत में आया। आरटीआई एक्टिविस्ट ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज कानपुर कमिश्नरेट को उपलब्ध कराते हुए सभी आरोपियों के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। जिनके आधार पर कानपुर कमिश्नर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए झांसी के जिलाअधिकारी को उक्त मामले में आवश्यक कार्यवाही करने के लिए पत्र लिखा।
आपको बता दें पिछले कई सालों से झांसी मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थाओं के नाम पर बड़े भ्रष्टाचार, कमीशनबाजी, प्राइवेट प्रैक्टिस के अलावा कई ऐसे मामले है जिससे झांसी मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।


