Kaushambi News: आखिर बाढ़ प्रभावितों की सुध कौन लेगा? प्रशासन सक्रिय, पर जनप्रतिनिधि नदारद!

Kaushambi News: कौशाम्बी में बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त, प्रशासन राहत में जुटा, लेकिन जनप्रतिनिधि गायब। ग्रामीणों में गुस्सा।

Ansh mishra Mishra
Published on: 2 Aug 2025 10:58 PM IST
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 आखिर बाढ़ प्रभावितों की सुध कौन लेगा? प्रशासन सक्रिय, पर जनप्रतिनिधि नदारद! (Photo- Newstrack)

Kaushambi News: कौशाम्बी। गंगा और यमुना के लगातार बढ़ते जलस्तर ने कौशाम्बी जनपद के कई गांवों में तबाही मचा दी है। दो दिनों से नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे गांवों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

डूब गए गांव, नाव ही बनी सहारा

चायल तहसील के नेवादा ब्लॉक में स्थित कटैया पुरखास मार्ग, मल्हीपुर और पिपरहटा गांव पूरी तरह बाढ़ की चपेट में हैं। मंझनपुर तहसील के पभोषा और बड़हरी गांव का मुख्य मार्ग भी पानी में डूब चुका है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को घर से बाहर निकलने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

प्रशासन कर रहा प्रयास, संसाधनों की कमी बनी बाधा

प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा हुआ है। राहत शिविरों की स्थापना की गई है, नावों की व्यवस्था की जा रही है और चिकित्सा सेवाएं भी पहुंचाई जा रही हैं। हालांकि संसाधनों की कमी के कारण राहत कार्यों में अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही।

नेता गायब, जनता आक्रोशित

सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि इस संकट की घड़ी में कोई भी जनप्रतिनिधि लोगों की सुध लेने नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय घर-घर आकर वोट मांगने वाले नेता अब पूरी तरह नदारद हैं। उनकी चुप्पी और अनुपस्थिति ने लोगों के मन में गुस्सा और अविश्वास भर दिया है।

जनता के सवाल – कहां हैं जनप्रतिनिधि?

ग्रामीणों का साफ कहना है कि बाढ़ में फंसे लोगों की मदद करना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। विधायक, सांसद और अन्य नेता आखिर इस समय कहां हैं? क्या बाढ़ की त्रासदी उनके एजेंडे का हिस्सा नहीं है? क्या जनता को सिर्फ चुनाव के वक्त ही याद किया जाएगा?

राजनीतिक संवेदनशीलता की परीक्षा

यह समय राजनीतिक संवेदनशीलता की असली परीक्षा है। यदि जनप्रतिनिधि इस समय भी जनता के साथ नहीं खड़े होते, तो लोगों का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा। जरूरी है कि नेता आगे आएं, राहत कार्यों में सहभागिता निभाएं और लोगों को यह भरोसा दिलाएं कि वे सिर्फ चुनावी नेता नहीं, बल्कि संकट में भी साथ देने वाले जनसेवक हैं।

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