Kushinagar News: मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की पटरी धंसी, खैरटिया-शीतलापुर में मचा हड़कंप

Kushinagar News: कुशीनगर में भारी बारिश के बाद मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की पटरी धंस गई। खेतों में पानी भरने से अफरातफरी मच गई। सिंचाई विभाग मौके पर पहुंचा और राहत कार्य जारी है।

Mohan Suryavanshi
Published on: 14 July 2025 9:08 PM IST
Macha earthquake at Dhansi, Khartia-Shitalapur on main Western Ganges Canal
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मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की पटरी धंसी, खैरटिया-शीतलापुर में मचा हड़कंप (Photo- Newstrack)

Kushinagar News: कुशीनगर जिले में सोमवार शाम हुई मूसलधार बारिश ने बड़ी आपदा को जन्म दे दिया। मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की पटरी खैरटिया-शीतलापुर क्षेत्र में अचानक धंस गई, जिससे नहर का पानी तेज बहाव के साथ खेतों और सड़क की ओर फैलने लगा। इस घटना से ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल बन गया है।

मूसलधार बारिश के बाद नहर की दीवार टूटी, खेतों की ओर बढ़ा पानी

बताया जा रहा है कि नेपाल स्थित बाल्मीकि नगर बैराज से इन दिनों अत्यधिक जलप्रवाह हो रहा है, जिससे पहले से ही दबाव में चल रही नहर की दीवार बारिश के चलते कमजोर पड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले नहर की पटरी में दरारें नजर आईं और कुछ ही देर में वह पूरी तरह धंस गई। देखते ही देखते बहाव ने खेतों को जलमग्न करना शुरू कर दिया।

सिंचाई विभाग अलर्ट, राहत कार्य तेज़ी से जारी

घटना की जानकारी मिलते ही सिंचाई विभाग की टीम जेसीबी मशीनों और जरूरी संसाधनों के साथ मौके पर पहुंच गई। अधिकारियों ने तत्काल कटाव रोकने का कार्य शुरू कर दिया है। स्थानीय ग्रामीण भी राहत कार्य में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। नहर के किनारे बड़ी संख्या में लोग जमा हैं, और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन सतर्क बना हुआ है।

गंडक नहर: पूर्वी उत्तर प्रदेश की सिंचाई की जीवनरेखा

मुख्य पश्चिमी गंडक नहर पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार के लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। कुशीनगर जिले में यह नहर कई शाखाओं में विभाजित होकर गांव-गांव पानी पहुंचाती है। यदि कटाव पर समय रहते काबू नहीं पाया गया, तो सैकड़ों बीघा में खड़ी फसलें जलमग्न हो सकती हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

ग्रामीणों की मांग – जल्द हो स्थायी समाधान

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नहर की दीवारों की समय-समय पर मरम्मत और निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही दीर्घकालिक समाधान के लिए ठोस योजना बनाई जाए।

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