UP Prabhari Mantri Reshuffle: यूपी की राजनीति में चुनावी सरगर्मी तेज, जानिये जिलों का हाल

UP Prabhari Mantri Reshuffle: आज किए गए फेरबदल को देखते हुए माना जा रहा है कि सरकार पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जिलों में संगठन और प्रशासनिक स्तर पर पकड़ मजबूत बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

Ramkrishna Vajpei
Published on: 3 Jun 2026 6:38 PM IST (Updated on: 3 Jun 2026 8:21 PM IST)

Aligarh News:मिशन 2027, जाट वोट साधने उतरे गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण, पश्चिमी यूपी में बीजेपी की सियासी जमीन पक्की करने का प्लान

Lakshman Singh Raghav की रिपोर्ट

Aligarh News:- 3 जून 2026। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट के बीच बीजेपी ने पश्चिमी यूपी में अपना सियासी किला मजबूत करना शुरू कर दिया है। अलीगढ़ जनपद में जाट समुदाय को साधने की जिम्मेदारी गन्ना विकास मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण सिंह ने संभाल ली है। ताले-तालीम के शहर में मंत्री के लगातार दौरे और जाट बहुल गांवों में चौपालों से सियासी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि 2024 लोकसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी की कुछ सीटों पर हुए नुकसान की भरपाई के लिए बीजेपी 2027 में जाट फैक्टर को अपने पाले में लाने का मास्टर प्लान बना रही है।

जाटलैंड में क्यों अहम हैं लक्ष्मी नारायण?

चौधरी लक्ष्मी नारायण सिंह खुद जाट समुदाय से आते हैं और मथुरा की छाता सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं। पश्चिमी यूपी में जाटों के बीच उनकी साफ-सुथरी छवि और गन्ना मंत्री के तौर पर किसानों से सीधा जुड़ाव बीजेपी के लिए तुरुप का पत्ता साबित हो सकता है।

अलीगढ़ की सात विधानसभा सीटों में से खैर, बरौली, अतरौली और इगलास में जाट वोटर निर्णायक भूमिका में हैं। खैर और इगलास सुरक्षित सीटें हैं, लेकिन यहां भी जाट वोटरों का प्रभाव है। 2022 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अलीगढ़ की सभी सात सीटें जीती थीं, लेकिन बरौली और छर्रा में जीत का अंतर काफी कम रहा था।



क्या है बीजेपी की रणनीति?

1. गन्ना भुगतान का मुद्दा

अलीगढ़ जनपद में तीन चीनी मिलें हैं। मंत्री पिछले छह महीने में 11 बार अलीगढ़ आ चुके हैं। हर दौरे में गन्ना भुगतान, नई मिल और एथेनॉल प्लांट का जिक्र कर किसानों को साधने की कोशिश की जा रही है। खैर और अतरौली बेल्ट में गन्ना प्रमुख फसल है।

2. सामाजिक समीकरण

मंत्री जाट महासभाओं और खाप चौधरियों से लगातार मुलाकात कर रहे हैं। इगलास और खैर में 22 गांवों की जाट चौपालें हो चुकी हैं। युवाओं को खेल और रोजगार से जोड़ने के लिए ‘किसान पुत्र खेल प्रतियोगिता’ भी शुरू कराई गई है।

3. पुराने जख्म पर मरहम

2021 में कृषि कानूनों के खिलाफ हुए आंदोलन के बाद जाटों की नाराजगी जगजाहिर थी। अब बीजेपी ‘किसान हितैषी योजनाओं’ के जरिए उस नाराजगी को कम करना चाहती है। मंत्री गांव-गांव जाकर पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा और मुफ्त बिजली योजना के फायदे गिना रहे हैं।

अलीगढ़ में जाट वोट का गणित

अलीगढ़ जनपद में करीब 55 प्रतिशत हिंदू आबादी है, जिसमें जाट वोटर 12 से 14 प्रतिशत बताए जाते हैं। खैर, बरौली, अतरौली और इगलास में यह आंकड़ा 25 से 40 प्रतिशत तक है।

2017 और 2022 में जाट वोट बंटने से बीजेपी को फायदा मिला था। लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में रालोद-सपा गठबंधन के बाद अलीगढ़ लोकसभा सीट पर बीजेपी की बढ़त घट गई। इगलास और छर्रा सीटें हाथरस लोकसभा क्षेत्र में आती हैं, जहां भी जाट मतदाता प्रभावी भूमिका में हैं।

विपक्ष की चुनौती

रालोद प्रमुख जयंत चौधरी लगातार पश्चिमी यूपी में सक्रिय हैं। सपा भी पूरी तरह मैदान में है। खैर सीट से पूर्व विधायक और जाट नेता प्रमोद गौड़ ने हाल ही में बयान दिया कि, "जाट अब बीजेपी के झांसे में नहीं आएगा।"

ऐसे में लक्ष्मी नारायण के सामने दोहरी चुनौती है—नाराजगी दूर करना और नए वोटरों को जोड़ना।

2027 में क्या होगा असर?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बीजेपी जाट वोट का 10 प्रतिशत भी अपने पक्ष में और खींच लेती है, तो अलीगढ़ की सातों सीटें बचाने के साथ-साथ पूरे मंडल की 18 सीटों पर सीधा असर पड़ सकता है। अलीगढ़ मंडल में हाथरस, एटा और कासगंज जिले आते हैं। 2022 में मंडल की 18 में से 16 सीटें बीजेपी ने जीती थीं।

मंत्री का बयान

गन्ना मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण सिंह कहते हैं, "मैं मंत्री बाद में हूं, पहले किसान का बेटा हूं। जाट समाज ने हमेशा राष्ट्रवाद को चुना है। 2027 में भी जाट, गुर्जर और किसान समाज बीजेपी के साथ होगा। गन्ना भुगतान 14 दिन में हो रहा है, यह सबसे बड़ा जवाब है।"

आगे की राह

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक जुलाई से अलीगढ़ में ‘किसान संवाद यात्रा’ शुरू होगी। हर विधानसभा क्षेत्र में 10 बड़ी जाट चौपालें आयोजित की जाएंगी। खैर में राज्य स्तरीय जाट सम्मेलन भी प्रस्तावित है। 2027 से पहले संगठन में भी जाट चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

कुल मिलाकर अलीगढ़ जनपद में लक्ष्मी नारायण सिंह की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि बीजेपी 2027 के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती। जाट वोटों का ध्रुवीकरण हुआ तो पश्चिमी यूपी में बीजेपी की राह आसान हो सकती है, और यदि बिखराव हुआ तो मुकाबला दिलचस्प होगा। अभी से शुरू हुई इस कवायद का असर 2027 में ईवीएम खुलने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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Ram Krishna Vajpei is a veteran cross-media journalist, political analyst, and data journalism expert whose distinguished career began in 1982. Spanning over four decades across print, broadcast (TV/Radio), and digital platforms, he specializes in rigorous research and deep analytical reporting on socio-political affairs. An authority on modern data journalism and the technical application of AI/LLMs in media, Vajpei also trains next-generation journalists and is currently pursuing a PhD in media studies. His work is defined by an absolute commitment to objectivity and a comprehensive editorial vision.

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