Mathura News: धर्म के नाम पर दिखावा! बांके बिहारी मंदिर में VIP कल्चर पर बड़ा खुलासा, श्रद्धालुओं में गहरा रोष

Mathura News: विश्वप्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में हाल ही में एक घटना ने श्रद्धालुओं के बीच रोष की लहर पैदा कर दी है। मंदिर के गर्भगृह के पास कुछ कथित वीआईपी भक्तों ने कुर्सियाँ लगवाकर पूजा-अर्चना की, जिसे देखकर आम श्रद्धालु हैरान रह गए और अपनी नाराजगी जाहिर की।

Amit Sharma
Published on: 22 Aug 2025 5:16 PM IST
Mathura News:  धर्म के नाम पर दिखावा! बांके बिहारी मंदिर में VIP कल्चर पर बड़ा खुलासा, श्रद्धालुओं में गहरा रोष
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Banke Bihari Temple VIP Controversy

Mathura News: वृंदावन के विश्वप्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में हाल ही में एक घटना ने श्रद्धालुओं के बीच रोष की लहर पैदा कर दी है। मंदिर के गर्भगृह के पास कुछ कथित वीआईपी भक्तों ने कुर्सियाँ लगवाकर पूजा-अर्चना की, जिसे देखकर आम श्रद्धालु हैरान रह गए और अपनी नाराजगी जाहिर की।सूत्रों के अनुसार, विशेष मेहमानों के लिए मंदिर प्रशासन द्वारा गर्भगृह के ठीक बाहर कुर्सियाँ रखवाई गईं, जहां वे बैठकर भगवान के दर्शन और पूजा करने लगे। यह दृश्य मंदिर की वर्षों पुरानी परंपराओं के विरुद्ध माना जा रहा है।

भक्ति या दिखावा? श्रद्धालुओं ने उठाए सवाल

स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर में हमेशा यही परंपरा रही है कि भक्त भूमि पर बैठकर समर्पण भाव से भगवान के चरणों में झुकते हैं। ऐसे में किसी भी भक्त का सिंहासन जैसी कुर्सी पर बैठकर पूजा करना, भक्ति नहीं बल्कि दिखावे और अहंकार का प्रतीक है।

श्रद्धालुओं ने व्यंग्य करते हुए कहा, "आज कुर्सी लगाई जा रही है, कल यह मांग भी उठ सकती है कि भगवान स्वयं घर आकर दर्शन दें।" उनका मानना है कि अगर किसी को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो वह अपने घर पर पूजा कर सकता है। लेकिन मंदिर की परंपरा और मर्यादा के साथ समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

बांके बिहारी की भक्ति में समर्पण ही सबसे बड़ा भाव

नियमित दर्शन करने वाले भक्तों का कहना है कि बांके बिहारी की तिरछी दृष्टि अहंकारी भक्तों को स्वीकार नहीं करती। वृंदावन की भूमि, जहां भक्ति, प्रेम और समर्पण की पराकाष्ठा देखी जाती है, वहां इस तरह का वीआईपी कल्चर भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचा रहा है।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या आधुनिक समाज में भक्ति भी वीआईपी श्रेणियों में बंटने लगी है? जब भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच समान रूप से विराजमान हैं, तो उनके सामने समर्पण भाव से झुकना ही सच्ची भक्ति है, न कि विशेषाधिकार के नाम पर परंपराओं का उल्लंघन करना।

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Shalini Rai

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