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UP Election 2022: अमरत्व के लिए बेचैन डॉ.संजय निषाद, खुद को बता रहे 'पॉलिटिकल गॉडफादर ऑफ फिशरमैन'

UP Election 2022: आठ वर्ष पूर्व 13 जनवरी को होमियोपैथ के डॉक्टर संजय निषाद ने निषाद पार्टी का गठन किया था।

Purnima Srivastava

Purnima SrivastavaReport Purnima SrivastavaMonikaPublished By Monika

Published on 14 Oct 2021 5:27 AM GMT

Dr sanjay nishad
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डॉ.संजय निषाद का बैनर (फोटो : सोशल मीडिया )

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UP Election 2022: अमरत्व किसे अच्छा नहीं लगता है। सभी की इच्छा रहती है कि उसके जीवित रहते या मरने के बाद उसे याद किया जाए। उसके नाम से गलियां हों, चौराहे पर मूर्तियाँ स्थापित की जाएं। निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ.संजय निषाद (Dr sanjay nishad ) ऐसी ही लालसा में कुछ ऐसा कर रहे हैं, जिसके चलते वह इन दिनों सुर्खियों में है। डॉ.निषाद अब भाजपा (BJP) के आशीर्वाद से एमएलसी हो गए हैं। उनके समर्थन से विधानसभा में सीट (Vidhan sabha me seat) पाने को बेचैन दावेदार उनके स्वागत के लिए पलक पावड़े बिछाए हुए हैं। इन्होंने डॉ.निषाद की सहमति से शहर में लगे बैनरों (shehar me banner) पर लिखवा दिया है 'पॉलिटिकल गॉडफादर ऑफ फिशरमैन' (Political Godfather of Fisherman) । हालांकि विरोधी दल (virodhi dal) के निषाद नेता इसे लेकर आपत्ति जता रहे हैं। वैसे बिहार की राजनीति (Bihar ki rajniti) में दखल रखने वाले मुकेश साहनी (Mukesh Sahani) भी खुद को 'सन आफ मल्लाह'(Son of Mallah)घोषित कर यूपी विधानसभा चुनाव (UP Vidhan Sabha Election) में कूद चुके हैं।

सुर्खियों में रहना डॉ.संजय निषाद की फितरत रही है। पिछले दिनों वह एक टीवी चैनल के स्टिंग में फंस गए थे। जहां वे जो कुछ बोल रहे थे, वह राजनीतिक महत्वाकांक्षा को जताने के लिए पर्याप्त था। पहले भी डॉ.संजय पर रुपये लेकर टिकट बेचने का आरोप (ticket bechne ka aarop) लगता रहा है। आठ वर्ष पूर्व 13 जनवरी को होमियोपैथ के डॉक्टर संजय निषाद (Homeopath Dr Sanjay Nishad ) ने निषाद पार्टी (Nishad Party) का गठन किया था तो शायद ही किसी को यकीन रहा हो कि पार्टी चंद वर्षों को इतना उतार-चढ़ाव देख लेगी। पूर्वांचल में निषादों के क्षत्रप माने जाने वाले जमुना निषाद की मार्ग दुर्घटना में मौत के बाद खाली सियासी जमीन पर संजय ने न सिर्फ कब्जा किया बल्कि इंजीनियर बेटे को संसद पहुंचाने में भी कामयाब रहे। महज आठ वर्षों में महत्वाकांक्षा के बल पर सत्ता के शिखर पर पहुंच चुकी पार्टी रोज-रोज के पैतरे को लेकर अब सवालों में घिरी है। गठबंधन छोड़ भाजपा का दामन थामने वाली निषाद पार्टी को लेकर सवाल उठने लगा है कि विधानसभा चुनाव में उसे फर्श मिलेगा या अर्श। सवाल उठ रहा है कि एनडीए में शामिल होने के बाद डॉ संजय निषाद का भी हश्र ओमप्रकाश राजभर की तरह तो नहीं होगा।

डॉ संजय निषाद (फोटो : सोशल एम्डिया )

सपा सरकार में ट्रेन रोकने पर चली थी गोली, एक की मौत के बाद चमकी सियासत

8 वर्ष पुरानी निषाद पार्टी को पहली बार राष्ट्रीय फलक पर तब सुर्खियां मिली जब आरक्षण की मांग को लेकर ट्रेन रोक रहे कार्यकर्ताओं पर सपा सरकार में गोली चला दी गई। 7 जून, 2015 को सहजनवां के कसरवल के पास रेलवे ट्रैक पर निषाद पार्टी के आंदोलन के दौरान चली पुलिस की गोली से एक कार्यकर्ता की मौत हो गई थी। इस मामले में डॉ. संजय निषाद और उनके समर्थकों पर केस हुआ और 35 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। इस घटना से मिले सियासी खाद-पानी के दम पर 2017 के विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी ने पीस पार्टी से हाथ मिलाकर पूरे प्रदेश में 60 सीटों पर चुनाव लड़ा। बाहुबली विजय मिश्र ज्ञानपुर सीट से पार्टी के सिंबल पर जीतने में कामयाब भी हुए। टिकट बांटने के दौरान निषाद पार्टी के मुखिया पर आरोप भी लगा। विरोधियों ने आरोप लगाया कि बसपा सुप्रिमो मायावती की तर्ज पर निषाद पार्टी ने भी मोटी रकम लेकर टिकट बेचा हैं। आरोपों को तब और बल मिला जब निषाद पार्टी के मुखिया डॉ. संजय निषाद ने हेलीकाप्टर से अपने प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार किया।


संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद (फोटो : सोशल मीडिया )

गोरक्षपीठ की दी चुनौती, बेटे को बना दिया सांसद

पार्टी को बड़ी कामयाबी तब मिली जब इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद को योगी आदित्यनाथ की खाली की हुई सीट पर गठबंधन का उम्मीदवार घोषित किया गया। गठबंधन के बल के दम पर प्रवीण निषाद गोरखपुर सीट पर 29 वर्ष पुराने गोरक्षपीठ के तिलिस्म को तोड़ने में कामयाब हुए। संसद में प्रवीण निषाद भले ही सक्रिय नहीं दिखे । लेकिन सांसद निधि को लेकर विरोधियों ने उन पर गंभीर आरोप लगाया। सपा नेता और पूर्व मंत्री राम भुआल निषाद आरोप लगाते हैं कि निषाद पार्टी ने 50 करोड़ रूपये की मोटी रकम लेकर जाति के वोटों की सौदेबाजी की है। प्रवीण निषाद के सांसद निधि की जांच हो जाए तो बडा घोटाला पकड़ा जाएगा। पिछले दिनों ही संजय निषाद और उनके सांसद बेटे प्रवीण निषाद गोरक्षपीठ को घेरने पैदल ही निकले गए थे। रास्ते में मुख्यमंत्री के इशारे के बाद चली पुलिसिया लाठी से प्रवीण निषाद का हाथ टूट गया था। दरअसल, संजय निषाद की राजनीतिक महत्वाकांक्षा चरम पर है।

सबसे लंबा रिश्ता भाजपा के साथ

सियासी महात्वाकांक्षा में निषाद पार्टी के मुखिया किसी भी दल से लंबा रिश्ता बनाने में कामयाब नहीं हुए हैं। पार्टी की स्थापना के साथ ही उन्होंने पीस पार्टी से गठबंधन कर अपनी महत्वाकांक्षा पूरी की। गोरखपुर उपचुनाव में उनके बेटे प्रवीण निषाद गठबंधन के उम्मीदवार थे । लेकिन सिंबल सपा का था। पैतरेबाजी के खेल में वह सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के हिस्सा बने। महज तीन दिन बाद ही निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद गठबंधन से छिटक गए। डॉ. संजय निषाद ने इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जेपी नड्डा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल से मुलाकात की। बाद में जेपी नड्डा की मौजूदगी में निषाद पार्टी एनडीए का हिस्सा बन गई।

रामभुआल निषाद (फोटो : सोशल मीडिया )

सभी दलों में निषाद क्षत्रप, असमंजस में वोटर

गोरखपुर-बस्ती मंडल में निषाद राजनीति सियासत के केन्द्र बिंदु में है। गोरखपुर उपचुनाव में योगी आदित्यनाथ (cm Yogi) के ताबड़तोड़ जनसभाओं के बाद भी सपा के प्रवीण निषाद ने भाजपा के प्रत्याशी उपेन्द्र दत्त शुक्ला को हराकार निषाद जाति की ताकत का अहसास विरोधियों को करा दिया था। वर्तमान में परिस्थितियों में बड़ा उलटफेर हो चुका है। पुराने क्षत्रप जमुना निषाद के बेटे अमरेन्द्र निषाद और पूर्व विधायक रही उनकी मॉ राजमति निषाद सपा के साथ हैं। चौरीचौरा से विधायक रहे जय प्रकाश निषाद पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं। अब वे राज्यसभा सदस्य हैं। सपा भी निषादों को लेकर अपनी ताकत को बढ़ा रही है। पूर्व मंत्री रहे रामभुआल निषाद तो सपा के साथ हैं ही, गोरखपुर से चुनाव लड़ चुकीं अभिनेत्री काजल निषाद भी साइकिल की सवारी कर रही हैं।

अमरेंद्र निषाद (फोटो : सोशल मीडिया )

कमोवेश सभी राजनीतिक दल निषादों को खुश करने को यूं ही बेचैन नहीं है। गोरखपुर मंडल की सभी 28 विधानसभा व 6 संसदीय क्षेत्रों में निषाद बिरादरी की मजबूत दखल है। पूर्वांचल निषाद बिरादरी के प्रभुत्व को लेकर ही पूर्व सांसद फूलन देवी के पति उन्मेद सिंह ने भी पिपराइच विधानसभा से अपना राजनीतिक भविष्य तलाशा था। राजनीतिक दलों के आकड़ों के मुताबिक मंडल में सर्वाधिक निषाद मतदाता गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में हैं। गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में निषादों की संख्या 3 से 3.50 लाख के बीच बताई जाती है। इसी क्रम में देवरिया में एक से सवा लाख, बांसगांव में डेढ़ से दो लाख, महराजगंज में सवा दो से ढ़ाई लाख तथा पड़रौना में भी ढ़ाई से तीन लाख निषाद बिरादरी के मतदाता हैं। मंडल के 28 विधानसभा में भी 30 से 50 हजार के बीच निषाद मतदाता हैं।

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