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महल में नहीं तालाब में रहता है यह शहंशाह, हर किसी को नहीं देता दर्शन

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AdminBy Admin

Published on 21 Feb 2016 8:12 AM GMT

महल में नहीं तालाब में रहता है यह शहंशाह, हर किसी को नहीं देता दर्शन
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कानपुर: शहंशाह के दर्शन बडे़ मुश्किल से हो पाते हैं। यदि हो गए तो समझो आपके बिगडे़ काम बन गए। यह कोई देवता या मंदिर में स्थापित मूर्ति नहीं बल्कि पनकी थाना क्षेत्र में बना कछुआ तालाब है। शहंशाह के नाम से मशहूर एक सौ साल से भी ज्यादा उम्र के इस कछुए का यही आशियाना है। मान्यता है कि सुबह यदि कछुए के दर्शन हों तो पूरा दिन शुभ रहता है। इसीलिए लोग कछुए के दर्शन करने आते हैं। शहंशाह मिजाज से भी शहंशाह हैं। बड़ी मिन्नत के बाद दर्शन देते हैं। संभवत: वे यह जानते हैं कि उनके दर्शन से बिगडे़ काम बनते हैं।

कहां है कछुआ तालाब

कानपुर के पनकी थाना क्षेत्र के भाटिया तिराहे के पास पनकी हनुमान मंदिर रोड पर बांईं ओर एक बोर्ड लगा है जिस पर लिखा है, श्री नागेश्वर मंदिर एवं कछुआ तालाब,जो 355 साल से लेकर 100 साल तक के कछुओं का आशियाना है। कछुआ तालाब को 364 साल पहले अंग्रेजों की हुकूमत के दौरान देवी दयाल पाठक के पूर्वजों ने बनवाया था। तालाब की लंबाई और चौड़ाई करीब 70 फुट है।

पनीर खिलाने के बाद आते हैं कछुए

तालाब के मटमैले पानी में कछुए दिखाई नहीं देते। तालाब की सीढि़यों पर पनीर के छोटे-छोटे टुकड़े बिखेर कर कछुओं को आवाज लगाना पड़ता है। कभी-कभी तो आधा घंटा आवाज लगाने पर भी वे नहीं आते।

शहंशाह के दर्शन के लिए लालायित रहते हैं लोग

बाकी कछुओं को बुलाने के लिए लोग सिर्फ आओ-आओ की आवाज लगाते हैं लेकिन शहंशाह को बुलाने के लिए उनके नाम से आग्रह करना होता है । पनकी के अवनीश दुबे ने बताया कि जब भी हम कुछ शुभ कार्य करते हैं तो शहंशाह के दर्शन जरूर करते हैं। कछुओं को भोजन मंदिर में पूजा करने के बाद ही दिया जाता है।

मुश्किल से होते हैं शहंशाह के दर्शन

रश्मि कुशवाहा कहती हैं कि वे हर मंगलवार को मंदिर दर्शन करने आती हैं। मंदिर में पूजा के बाद कछुओं को पनीर भी खिलाती हैं लेकिन शहंशाह का दर्शन सिर्फ एक बार ही हुआ है। लोग शहंशाह के दर्शन के लिए कई-कई दिन गुजार देते हैं।

364 साल से भी ज्यादा पुराना है कछुआ तालाब

नागेश्वर मंदिर के पुजारी देवी दयाल पाठक कहते हैं कि इस तालाब और मंदिर की स्थापना उनके पूर्वजों ने की थी। तालाब 364 साल से अधिक पुराना है। उनके पूर्वज पाकिस्तान के सिंध से आकर कानपुर में बस गए थे। तालाब में सैकड़ों की तादाद में कछुए हैं और उनमें से कुछ की उम्र 355 साल से अधिक हो चुकी है। आस-पास के जिलों से भी लोग अपनी मुराद पूरी करने के लिए कछुओं को देखने आते हैं।

kachhua

तालाब को पक्का करने में नहीं मिली सरकारी मदद

पुजारी ने कहा कि अपने पैसे से सब्मर्सिबल लगवाया ताकि तालाब का पानी सूखने नहीं पाए। इसके अलावा सोलर लाइट की भी व्यवस्था की गई है। कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह अपने मुख्यमंत्रित्व काल में यहां आए थे और इसे पक्का करने का आश्वासन भी दे गए थे। जो अब तक पूरे नहीं हुए। हर दिन सैकड़ों की संख्या में लोग कछुआ तालाब को देखने के लिए आते हैं, लेकिन पूरा तालाब कच्चा होने के कारण कुछ देर रुकने के बाद चले जाते हैं।

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