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41 हजार सिपाही भर्ती : मेडिकल जांच में फेल अभ्यर्थियों को कोर्ट से राहत

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Published on 16 Aug 2016 3:33 PM GMT

41 हजार सिपाही भर्ती : मेडिकल जांच में फेल अभ्यर्थियों को कोर्ट से राहत
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इलाहाबादः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2013 की 41, 556 सिपाहियों की भर्ती में मेडिकल टेस्ट में असफल अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने मेडिकल जांच के दिन ही अपील दाखिल करने की बाध्यता के नियम को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने मेडिकल जांच में असफल अभ्यर्थियों को जांच के खिलाफ अपील का एक और मौका देते हुए राज्य सरकार को नए सिरे से मेडिकल बोर्ड का गठन करने का निर्देश दिया है।

हजारों अभ्यर्थियों को फायदा

कोर्ट ने कहा है कि बोर्ड में प्राचार्य द्वारा नामित एक प्रोफेसर चिकित्सक रखा जाए। यह कार्यवाही दो माह में पूरी की जाए। बोर्ड गठित होने के बाद मेडिकल जांच में विफल रहे अभ्यर्थियों को अपील दाखिल करने की कोर्ट ने छूट दी है। कोर्ट के इस आदेश से हजारों लोगों को दोबारा मेडिकल जांच में मौका मिलेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति पीके एस बघेल ने वंदना सहित अन्य याचिकाओं पर अधिवक्ता विजय गौतम के तर्कों से सहमत हुए दिया है।

2013 में हुई थी भर्ती

मालूम हो कि 14 मई 2013 को पुलिस भर्ती बोर्ड ने विज्ञापन निकाला। संशोधित विज्ञापन से 35500 पुलिस कांस्टेबल, 4033 प्रांतीय सशस्त्र पुलिस एवं 2077 फायरमैन की भर्ती प्रक्रिया शुरू की।

क्या है विवाद

उप्र पुलिस कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल सेवा नियमावली 2008 के के तहत मेडिकल जांच के बाद परिणाम घोषणा के दिन असफल अभ्यर्थियों को मेडिकल बोर्ड में अपील दाखिल करने का प्रावधान है। इसके तहत अपील दाखिल करने से हजारों वंचित रह गए। इन लोगों ने नियम की वैधता को चुनौती दी। कोर्ट ने नियम रद्द करते हुए कहा कि नए सिरे से मेडिकल बोर्ड बने। यह अभ्यर्थियों की जांच कर निर्णय ले तथा इस बोर्ड को भविष्य की भर्तियों के लिए भी लागू माना जाए। अधिवक्ता गौतम का कहना था कि इस भर्ती में प्रशिक्षण पर भेजा जा चुका है। शेष को रोक लिया गया है।

मेडिकल में घूस

मेडिकल जांच में डॉक्टरों द्वारा घूस लेने की शिकायत की गई। कुछ को पुलिस ने रंगे हाथ पकड़ा। अलीगढ़ में डाक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज है। मेडिकल जांच में धांधली की गई। इसी लिए जांच के ही दिन अपील दाखिल करने का नियम बनाया ताकि डाक्टरों का भेद न खुले।

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