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WOMEN'S DAY SPECIAL: अजब गजब महिलाएं, इनकी कहानी सुनकर आप रह जाएंगे दंग

आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। ऐसे में हम अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आपको यूपी की ऐसी महिलाओं से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिन्‍होंने विषम परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपनी

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tiwarishaliniBy tiwarishalini

Published on 8 March 2018 9:20 AM GMT

WOMENS DAY SPECIAL: अजब गजब महिलाएं, इनकी कहानी सुनकर आप रह जाएंगे दंग
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Sudhanshu Saxena

लखनऊ: आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। ऐसे में हम अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आपको यूपी की ऐसी महिलाओं से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिन्‍होंने विषम परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपनी जिद के चलते एक अलग ही मुकाम हासिल किया। इतना ही नहीं इनकी संघर्ष भरी कहानी आपको अंदर तक हिला कर रख देगी।

ऋतु सुहास: विजुवली हैंडीकैप वोटर्स को दी ताकत

ऋतु सुहास यूपी सरकार की पीसीएस अधिकारी हैं। ये दिव्‍यांगों को तकनीक से जोड़ने वाली एक सफल लेडी आफिसर हैं1 इन्‍होंने विधानसभा चुनावों में बीएलओ और बूथ की लोकेशन ढूंढने के लिए बूथ दोस्‍त मोबाइल एप को लांच किया था।इतना ही नहीं ब्‍लाइंड हैंडीकैप वोटर्स के लिए उन्‍होंने ब्रेल स्क्रिप्‍ट में मतदाता पर्ची छपवाने का आइडिया भी दिया था। इस पायलट प्रोजेक्‍ट को आजमगढ़ में लांच किया गया। इस इननोवेशन को भारत सरकार और निर्वाचन आयोग ने सराहा।यूपी सरकार भी उनके इस प्रोजेक्‍ट को लागू करने जा रही है। इसके अलावा ब्‍लाइंड हैंडीकैप को एक अनोखी अनुभूति दिलाने के लिए ब्रेल स्क्रिप्‍ट में मतदाता पर्ची उन तक पहुंचाई गई। इसका परिणाम रहा कि 30 हजार दिव्‍यांगों ने वोट किया।जिनमें सैंकड़ों दृष्टिबाधित वोटर्स शामिल रहे। इन्‍होंने विजुवली हैंडीकैप वोटर्स को एक नई ताकत देने का काम किया है। इनको हाल ही में सीएम योगी आदित्‍यनाथ विश्‍व दिव्‍यांग दिवस के मौके पर सम्‍मानित कर चुके हैं।

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें ऐसी ही कुछ महिलाओं की कहानी ...

हिना​ ज़ाहिर नकवी: यूपी की पहली महिला शहर काजी

हिना जाहिर नकवी यूपी की पहली महिला शहर काजी हैं। इन्‍होंने इस्‍लाम में महिलाओं को पुरूषों के बराबर दर्जा दिलाने की मुहिम छेड़ रखी है। इनके इस पद पर नियुक्ति के खबर वायरल होते ही कई धर्मगुरूओं ने इस फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं दीं, लेकिन इन्‍होंने हिम्‍मत नहीं हारी और पद पर बने रहते हुए ट्रिपल तलाक से लेकर हलाला जैसी प्रथाओं को खत्‍म करने के लिए अपना लगातार अपना योगदान दे रही हैं।

शचि सिंह: 16 साल की उम्र से बेसहारों को कर रहीं शिक्षित

शचि सिंह लखनऊ स्थित एहसास एनजीओ की संचालिका हैं। महज 16 साल की उम्र में अपने घर के आस पास रहने वाले और फिर बड़े होकर चारबाग रेलवे स्टेशन पर गरीब बच्चों को फ्री में पढ़ाने का काम कर रही हैं। इन्‍हें भारत सरकार ने नेशनल अवार्ड फार चाइल्‍ड वेलफेयर और यूपी के देवी अवार्ड से सम्‍मानित किया जा चुका हे। इनकी जिद है कि घर से भटके बच्चों को गलत हाथों में नहीं जाने देंगी और एजूकेशन की मेन स्ट्रीम से जोड़ेंगी। इसके साथ ही यह सूबे में हर पुलिस स्टेशन को चिल्ड्रेन फ्रेंडली बनाने का काम कर रही हैं।​

फरहाना मलिकी: ऐतिहासिक इमारतों को संजोने की छेड़ी मुहिम

फरहाना मलिकी लखनऊ से ताल्‍लुक रखने वाली एक समाजसेविका हैं। इनके पिता जैनुल मलिकी ने अपना पूरा जीवन समाज सेवा के लिए लगाया था। उनहीं से प्रेरित होकर इन्‍होंने भी कूड़ा बीनने वाले बच्‍चों को उर्दू और संस्‍कृत की तालीम देना शुरू किया। इसके बाद इनका ध्‍यान ऐतिहासिक इमारतों की बदहाली पर गया। इसके लिए इन्‍होंने भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग के साथ मिलकर अपने दम पर इन इमारतों के संरक्षण की मुहिम छेड़ रखी है। इसके लिए यह बकायदा समय समय पर ऐतिहासिक इमारतों में जाकर वहां स्‍वच्‍छता सहित इमारतों के संरक्षण के लिए आवश्‍यक अवेयरनेस कैंपेन का आयोजन करती रहती हैं1 इनके प्रयासों से यूपी के कई ऐतिहासिक इमारतों की तस्‍वीर बदली हैं।

सुनीता तिवारी: एसएसपी ने खुद दी थी रिवाल्‍वर

सुनीता तिवारी यूपी पुलिस की महिला कांस्‍टेबल हैं। इन्‍होंने पुलिस महकमे के अपने सीनियर दरोगा और उसके दोस्‍त द्वारा एक छात्रा से छेड़खानी करने के चलते सबक सिखाया था। छात्रा की आबरू बचाने के लिए यह खुद निहत्‍थे ही मर्दानी बनकर अकेले ही नशे में धुत दरोगा और उसके दोस्‍त से भिड़ गईं। इतना ही नहीं उन्‍होंने दोनो को सलाखों के पीछे पहुचाया। इसके लिए उन्‍हें तत्‍कालीन सीएम अखिलेश यादव ने खुद सम्‍मानित किया था। इसी कारण उन्‍हें तत्‍कालीन एसएसपी कार्यालय से आत्‍मरक्षा के लिए रिवाल्‍वर जारी की गई थी। सुनीता तिवारी का कहना है कि इनकी जिद है हर हाल में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में अपनी कैपेसिटी से कमी लाना है।

पूनम तिवारी: मिथ तोड़ने के लिए बनीं ड्राइवर

पूनम तिवारी उत्‍तर रेलवे लखनऊ की पहली महिला ड्राइवर हैं। पूनम का कहना है कि वह इस मिथ को तोड़ना चाहती थीं‍ कि महिलाएं ट्रेन नहीं चला सकतीं। इसी को तोड़ने के लिए उन्‍होंने रेलवे का ड्राइवर बनने का सपना देखा और संघर्ष करके उसे पूरा किया। पूनम राजधानी के सूर्यनगर की रहने वाली हैं। इन्‍होंने इलेक्‍ट्रानिक्‍स में डिप्‍लोमा किया है। पूनम की मानें तो इनसे एक रेलवे के मित्र ने चैलेंज करके कहा था कि महिलाएं नाजुक होती हैं, वो ट्रेन नहीं चला सकती हैं। यह रोजगार केवल पुरूषों के लिए ही बना है। इसी मिथ को तोड़ने के लिए पूनम ने चैलेंज को पूरा किया। इन्‍होंने बकायदा तैयारी करके रेलवे भर्ती बोर्ड इलाहाबाद की परीक्षा उत्तीर्ण की, परीक्षा उत्‍तीर्ण करने पर उनका चयन सहायक लोको पायलट के पद के लिए हुआ। वर्ष 2013 से पूनम पहले मालगाड़ी और अब पैसेंजर ट्रेनों का सफल संचालन कर रही हैं।

कामिनी श्रीवास्तव: विकलांगता को पछाड़ बनीं अफसर

कामिनी श्रीवास्‍तव राज्‍य सरकार की सेवा में ग्राम विकास परियोजना अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं1 लेकिन ये सफर इनके लिए इतना भी आसान नहीं था। कामिनी श्रीवासतव ने महज चार साल की उम्र में एक दुर्घटना में अपने दोनों हाथ और एक पैर की उंगलियां खो दी थीं। इसके बाद सबने उनके लिए यह कहना शुरू कर दिया था कि अब उनका जीवन किसी काम का नहीं रहा। लेकिन अपनी इच्‍छाशक्ति के दम पर ही कामिनी ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अपनी विकलांगता पर विजय प्राप्‍त करते हुए इस पद पर पहुंची। इतना ही नहीं कामिनी अब खूबसूरत पेंटिंग भी बना लेती हैं।

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Excellent communication and writing skills on various topics. Presently working as Sub-editor at newstrack.com. Ability to work in team and as well as individual.

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