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China Nuclear Energy: चीन ने थोरियम आधारित पिघला हुआ नमक रिएक्टर बनाया है, जो साफ और सुरक्षित ऊर्जा उत्पादन के लिए भविष्य की नई तकनीक साबित हो सकता है।
China Nuclear Energy
China Nuclear Energy: चीन के वैज्ञानिकों ने विज्ञान और ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चीनी विज्ञान अकादमी के शंघाई इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड फिजिक्स ने एक नया प्रायोगिक रिएक्टर तैयार किया है। यह रिएक्टर थोरियम को यूरेनियम ईंधन में बदलने में सक्षम है। थोरियम एक रेडियोधर्मी धातु है और देखने में चांदी जैसा लगता है। यूरेनियम की तरह इसे भी रिएक्टर ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन थोरियम का बड़ा फायदा यह है कि यह कम रेडियोधर्मी कचरा पैदा करता है, जिससे पर्यावरण पर असर कम होता है।
गोबी रेगिस्तान में स्थापित
साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह रिएक्टर चीन के गोबी रेगिस्तान में स्थापित किया गया है। वैज्ञानिकों ने इसे सफलतापूर्वक चलाने में सफलता पाई है। इसका नाम थोरियम-आधारित पिघला हुआ साल्ट रिएक्टर (TMSR) है। यह 2 मेगावाट की क्षमता वाला रिएक्टर है और द्रव रूपी ईंधन का उपयोग करता है। यह दुनिया में इस तकनीक का एकमात्र प्रायोगिक उदाहरण है।
रिएक्टर की कार्यप्रणाली
11 अक्टूबर, 2023 को पहली बार इस रिएक्टर ने क्रिटिकलिटी प्राप्त की। इसका मतलब है कि रिएक्टर में परमाणु विखंडन की प्रक्रिया स्थिर रूप से चल रही है। रिएक्टर लगातार ऊष्मा और ऊर्जा उत्पन्न कर रहा है। इसका प्रयोग भविष्य में थोरियम को सुरक्षित और टिकाऊ तरीके से ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
भविष्य में ऊर्जा की संभावनाएं
वैज्ञानिकों का दावा है कि भविष्य में थोरियम रिएक्टर से 200 ग्राम थोरियम ईंधन केवल एक शहर को 14 साल तक बिजली दे सकता है। इससे न केवल ऊर्जा का स्थायी स्रोत मिलेगा, बल्कि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी नई संभावनाएँ खुलेंगी। थोरियम रिएक्टर कम रेडियोधर्मी कचरा, सुरक्षित संचालन और लंबे समय तक ऊर्जा उपलब्ध कराने की क्षमता के कारण भविष्य में परमाणु ऊर्जा का महत्वपूर्ण साधन बन सकता है। बता दे चीन की यह सफलता न केवल देश के लिए बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा उत्पादन के तरीकों को बदलने की क्षमता रखती है।


