नेतन्याहू-ट्रंप मीटिंग से पहले दहला यमन, ईरान पर मंडराया कहर, वर्ल्ड वॉर के इजरायल तैयार?

Netanyahu - Trump meeting: इन दोनों धुरंधरों की हर बातचीत के बाद कुछ बड़ा हुआ है—कभी येरुशलम को राजधानी घोषित करना, कभी ईरान के परमाणु ठिकानों पर वार की बात। अब फिर वही मुलाकात होने जा रही है, और इस बार हवा में सिर्फ बातें नहीं, बारूद की गंध है।

Harsh Srivastava
Published on: 7 July 2025 5:00 PM IST
नेतन्याहू-ट्रंप मीटिंग से पहले दहला यमन, ईरान पर मंडराया कहर, वर्ल्ड वॉर के इजरायल तैयार?
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Netanyahu - Trump meeting: कुछ मुलाकातें इतिहास बदल देती हैं, और कुछ इतिहास को जला डालती हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक ऐसी ही संभावित मुलाकात ने दुनिया की धड़कनों को तेज कर दिया है। इन दोनों धुरंधरों की हर बातचीत के बाद कुछ बड़ा हुआ है—कभी येरुशलम को राजधानी घोषित करना, कभी ईरान के परमाणु ठिकानों पर वार की बात। अब फिर वही मुलाकात होने जा रही है, और इस बार हवा में सिर्फ बातें नहीं, बारूद की गंध है। नेतन्याहू ने इशारों ही इशारों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ बड़ा ऐलान करने की तैयारी कर ली है। लेकिन उससे पहले ही एक बेहद खतरनाक घटनाक्रम ने सारी दुनिया को चौंका दिया। इजराइल ने यमन में हूती विद्रोहियों पर ऐसा हवाई हमला बोला है, जो 'ट्रेलर' कहलाया जा रहा है – असली 'फिल्म' अभी बाकी है, और उसका नाम है ईरान।

यमन में इजराइली तूफान: तीन बंदरगाहों पर बरसी आग

इजराइली वायुसेना ने रेड सी के किनारे स्थित यमन के तीन बड़े बंदरगाहों—होदेइदाह, सलीफ और रस इसा—को एक के बाद एक जबर्दस्त हमलों में तबाह कर दिया। सबसे भयानक बर्बादी होदेइदाह बंदरगाह पर देखने को मिली, जहां 500 से ज्यादा कंटेनर और 50 से ज्यादा नावें जलकर खाक हो गईं। चश्मदीदों के मुताबिक, आसमान से गिरते F-35 फाइटर जेट्स के मिसाइलों ने बंदरगाह को युद्ध के मैदान में बदल दिया। हूती विद्रोही संगठन के 60 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को भी नेस्तनाबूद किया गया। इस हमले को नेतन्याहू ने एक 'प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक' यानी पूर्व-चेतावनी हमला करार दिया है।

ये सिर्फ यमन पर नहीं, ईरान पर पहला वार है

साफ है, इजराइल का यह हमला सिर्फ हूती विद्रोहियों पर नहीं, बल्कि ईरान को खुली चेतावनी है। हूती विद्रोही ईरान के 'प्रॉक्सी' माने जाते हैं और गाजा में हमास की तरह यमन में इजराइल विरोधी मोर्चा संभालते हैं। यमन की धरती पर हमला दरअसल तेहरान को निशाना बनाने की रणनीति का पहला अध्याय है। डोनाल्ड ट्रंप से संभावित मुलाकात से पहले नेतन्याहू का यह साहसिक कदम इशारा कर रहा है कि इजराइल अब और इंतजार नहीं करेगा। ट्रंप की वापसी के साथ ही ईरान पर एक निर्णायक हमला तय माना जा रहा है। कयास हैं कि अमेरिका और इजराइल की एक गुप्त योजना के तहत खामेनेई की सत्ता को कमजोर करने और परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की तैयारी हो चुकी है।

हूती की चेतावनी – 'हम पीछे नहीं हटेंगे'

हालांकि इजराइल के इस हमले के बाद भी हूती विद्रोहियों ने घुटने नहीं टेके हैं। उनके प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने दावा किया कि यमनी सशस्त्र बल पूरी तरह तैयार हैं और फिलिस्तीन के लिए समर्थन और हथियार भेजने का अभियान तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमारे लोगों और राष्ट्र को भरोसा दिलाते हैं कि हम पीछे नहीं हटेंगे। अगर ईश्वर चाहेगा, तो हम अपने दुश्मनों को चीर डालेंगे।”

ईरान पर मंडराया 'स्ट्राइक' का साया?

अब सभी की निगाहें नेतन्याहू-ट्रंप बैठक पर हैं, जो अगले कुछ दिनों में हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मीटिंग के बाद खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आग और भड़क सकती है। ऐसा भी अनुमान है कि इजराइल, ईरान के भीतर जाकर उसके परमाणु ठिकानों पर 'डायरेक्ट स्ट्राइक' कर सकता है। यह वही रणनीति होगी जिसे नेतन्याहू सालों से दोहराते आए हैं – “खतरा भीतर से खत्म करो।” ईरान पहले ही अपने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और मिलिट्री को अलर्ट पर रख चुका है। तेहरान से रिपोर्ट्स के अनुसार, राजधानी के बाहर की मिसाइल बैटरियों को सक्रिय कर दिया गया है, और गुप्त परमाणु ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वहीं अमेरिकी सैन्य जहाज भी मध्य-पूर्व के पास समुद्री सीमा पर सक्रिय दिख रहे हैं।

कहीं तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत तो नहीं?

इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल उठने लगा है कि क्या नेतन्याहू और ट्रंप मिलकर पश्चिम एशिया में तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत कर सकते हैं? पहले से ही गाजा, लेबनान और सीरिया में तनाव चरम पर है। अब यमन पर इस भीषण एयरस्ट्राइक ने खाड़ी क्षेत्र को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है। अगर अगला हमला सीधे तेहरान पर होता है, तो यह जंग महज इजराइल और ईरान तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें रूस, चीन, अमेरिका, सऊदी अरब और यहां तक कि भारत तक खींचे जा सकते हैं – और तब यह मध्य-पूर्व की आग नहीं, दुनिया की राख बन सकती है। दुनिया इस वक्त जवाब खोज रही है… लेकिन बम पहले गिर चुके हैं।बाकी सिर्फ गिनती है — और इंतजार उस फैसले का, जो या तो खामोशी लाएगा… या तबाही।

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Harsh Srivastava

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