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गुस्साई जनता, सड़कों पर सन्नाटा और लॉकडाउन... आखिर पाकिस्तान के POK में क्यों भड़का बवाल?
POK protest: पाकिस्तान की सरकार ने आंदोलन पर काबू पाने के लिए इस्लामाबाद से 3,000 सैनिकों की तैनाती POK में की है। इन जवानों का काम आंदोलनकर्मियों पर एक्शन लेना है। इसके विरोध में आंदोलनकारियों ने पूरे शहर में लॉकडाउन ऐलान कर दिया है, वो भी अनिश्चित काल के लिए...
POK protest
POK protest: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। जनता और सरकार के बीच तनाव इतना बढ़ गया है कि पूरे क्षेत्र में अनिश्चितकालीन हड़ताल और लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया है। सड़कों पर पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है, इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दी गयी हैं और स्कूल-कॉलेज तक ठप पड़े हैं। हालात पर काबू पाने के लिए पाकिस्तान सरकार को इस्लामाबाद से लगभग 3 हजार जवान भेजने पड़े हैं।
आखिर आंदोलन की वजह क्या है ?
स्थानीय लोगों का गुस्सा अचानक नहीं फूटा... बल्कि इसकी शुरुआत रोजमर्रा की आवश्यकताओं से हुई। POK में आटे की बढ़ती कीमतों को लेकर लोग सड़कों पर उतर आये थे, जिसके बाद धीरे-धीरे यह आंदोलन भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सरकार के खिलाफ विद्रोह में पूरी तरह से तब्दील हो गया। स्थानीय 'कश्मीर संयुक्त नागरिक कमेटी' ने सरकार के सामने तकरीबन 38 मांगों की लिस्ट पेश की थी, जिसे मानने से पाकिस्तान सरकार ने साफ़ मना कर दिया।
जनता की प्रमुख मांगें
कमेटी और आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में प्रवासियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को खत्म करना, VIP कल्चर और खास भत्तों को बंद करना शामिल है। प्रदर्शनकारी यह भी चाहते हैं कि POK की जल विद्युत परियोजनाओं की रॉयल्टी का फायदा स्थानीय लोगों को भी मिले। उनका कहना है कि ये संसाधन उनकी जमीन और नदियों पर आधारित हैं, लेकिन लाभ सिर्फ पाकिस्तान सरकार और विशेष वर्ग उठा रहा है।
25 सितंबर की बैठक बनी निर्णायक
एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 25 सितंबर को पब्लिक एक्शन कमेटी और सरकार के बीच बैठक हुई थी। इसमें कमेटी ने स्पष्ट रूप से कहा कि POK की स्थानीय सरकार की शक्तियों को बहाल किया जाए और जनता की मांगें मानी जाएं। यदि सरकार ने इसे लागू करने में असमर्थता जता दी। इसी के बाद कमेटी ने आज 29 सितंबर यानी सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया।
इंटरनेट बंद, सड़कें खाली और सेना की तैनाती
सोमवार की सुबह से POK के कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं रोक दी गईं। हर जगह सेना और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात हो गए हैं। दुकानों, दफ्तरों और स्कूलों के शटर भी गिरे हुए हैं। स्थानीय लोग घरों में रहने के लिए मजबूर हो गए हैं। सरकार ने हालात पर काबू पाने के लिए इस्लामाबाद से लगभग 3,000 जवान मुजफ्फराबाद भेजे हैं।
क्यों भेजने पड़े इस्लामाबाद से जवान?
जानकारी के मुताबिक, POK में पहले से तैनात स्थानीय जवान भी सरकार से बेहद नाराज हैं। वे वेतन और भत्तों में समानता की मांग पर अपना विरोध जता रहे हैं। इसी कारण से सरकार को विश्वास नहीं था कि स्थानीय बल आंदोलन दबा पाएंगे। यही वजह है कि बाहर से 3 हजार जवानों की तैनाती करनी पड़ी।
आखिर कौन कर रहा है आंदोलन का नेतृत्व ?
बता दे, इस विरोध का नेतृत्व शौकत अली मीर कर रहे हैं। हाल के दिनों में दिए अपने भाषणों में मीर ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और संसाधनों के दोहन को बड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया था। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान सरकार ने POK के लोगों को दलदल में धकेल दिया है और अब इससे बाहर निकलने का वक़्त आ गया है।
क्या सुधरेंगे हालात ?
फिलहाल POK में बेहद तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। सरकार आंदोलनकारियों को मनाने का प्रयास कर रही है, लेकिन मांगों को मानने से निरंतर पीछे हट रही है। जनता ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी 38 सूत्रीय मांगें नहीं मानी जाएंगी, तब तक हड़ताल इसी तरह से जारी रहेगी।
बता दे, POK में इस वक़्त फोन पूरी तरह से बंद हैं, सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ हैं और हर तरफ सेना का पहरा है। इस स्थिति पर सवाल यह उठता है कि क्या पाकिस्तान सरकार इस विद्रोह को काबू कर पाएगी या फिर यह आंदोलन और बड़ा रूप ले लेगा... ?


