दहशत में दुनिया! नए शोध में खुलासा, 80% इमारतें बनेंगी खंडहर...मिट्टी में दब जाएगी सभ्यता

Rising Sea Levels: वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते समुद्र स्तर से दक्षिणी देशों की तटीय इमारतें, बुनियादी ढांचे और लाखों लोग खतरे में हैं।

Akriti Pandey
Published on: 24 Oct 2025 2:20 PM IST
Rising Sea Levels
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Rising Sea Levels

Rising Sea Levels: नए अध्ययन ने पहली बार चेतावनी दी है कि बढ़ते समुद्र स्तर से दुनिया के दक्षिणी हिस्सों में कितना गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इस वृद्धि से लाखों लोगों के जीवन और आजीविका पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा, अनगिनत महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और ऊंची इमारतें भी गंभीर नुकसान झेल सकती हैं। यह अध्ययन विशेष रूप से अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य और दक्षिण अमेरिका के तटीय क्षेत्रों पर केंद्रित है।

अध्ययन का दायरा और निष्कर्ष

लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अध्ययन में वैश्विक दक्षिण के 84 करोड़ इमारतों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने उपग्रह डेटा और विस्तृत ऊंचाई मानचित्रों का उपयोग कर संभावित समुद्र स्तर वृद्धि के परिदृश्यों का मूल्यांकन किया। अध्ययन में तीन प्रमुख परिदृश्य शामिल थे: 0.5 मीटर, 5 मीटर और 20 मीटर की वृद्धि। शोधकर्ताओं ने पाया कि यदि समुद्र का स्तर 2100 तक मामूली रूप से बढ़ता है, तो तटीय बाढ़ के कारण लगभग 30 लाख इमारतें जलमग्न हो सकती हैं। अगर समुद्र का स्तर 5 मीटर बढ़ जाता है, तो प्रभावित इमारतों की संख्या लगभग 4.5 करोड़ तक पहुंच सकती है। और अगर समुद्र स्तर में 20 मीटर की वृद्धि होती है, तो यह संख्या 13 करोड़ से अधिक हो जाएगी। इस परिदृश्य में कुछ देशों में 80 प्रतिशत से अधिक इमारतें नष्ट हो सकती हैं।

कार्बन उत्सर्जन और समुद्र स्तर

पृथ्वी के वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा ऐतिहासिक स्तर पर है। आज यह पिछले 40 लाख वर्षों में सबसे अधिक है, जो आधुनिक मानव जाति के उदय से भी पहले की तुलना में कहीं अधिक है। यही मुख्य कारण है कि समुद्र का स्तर तेजी से बढ़ रहा है।

तटीय आबादी पर प्रभाव

मानव जाति का लगभग दसवां हिस्सा, यानी करीब 75 करोड़ लोग, तटरेखा से मात्र 5 किलोमीटर के भीतर रहते हैं। इसका मतलब है कि समुद्र स्तर में मामूली वृद्धि भी लाखों लोगों के लिए गंभीर संकट बन सकती है। तटीय क्षेत्रों में बाढ़ और क्षरण के कारण न केवल आवासीय इमारतें प्रभावित होंगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर भी भारी दबाव पड़ेगा।

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