ट्रांसजेंडर को तगड़ा झटका! ट्रंप की जीत.... अमेरिका में अब सिर्फ दो लिंग- महिला और पुरुष

Donald Trump gender policy: अब अमेरिकी पासपोर्ट पर केवल पुरुष और महिला का ही विकल्प होगा।

Gausiya Bano
Published on: 7 Nov 2025 10:32 AM IST
ट्रांसजेंडर को तगड़ा झटका! ट्रंप की जीत.... अमेरिका में अब सिर्फ दो लिंग- महिला और पुरुष
X

Donald Trump gender policy: अमेरिका में एक बार फिर थर्ड जेंडर के अधिकारों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार द्वारा लागू की गई नीति को अब देश की सर्वोच्च अदालत ने भी मंजूरी दे दी है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि अब पासपोर्ट पर "थर्ड जेंडर" का विकल्प नहीं दिया जाएगा यानी अब केवल “मेल” और “फीमेल” ही आधिकारिक पहचान के रूप में मान्य होंगे।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि पासपोर्ट पर वही जेंडर दिखाया जाएगा जो जन्म के समय दर्ज किया गया था। कोर्ट का कहना है कि यह किसी भी व्यक्ति के समानता या स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन नहीं करता, बल्कि यह मात्र “तथ्यात्मक जानकारी” साझा करने जैसा है। जैसे किसी व्यक्ति का जन्मस्थान या तारीख दर्ज करना। हालांकि, अदालत में बैठे तीन लिबरल जजों ने इस फैसले पर असहमति जताई है और इसे व्यक्तिगत पहचान और स्वतंत्रता पर “सीधा हमला” बताया है।

ट्रंप की नीति को मिली कानूनी मान्यता

ट्रंप प्रशासन ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही विदेश विभाग को पासपोर्ट नियमों में बदलाव का आदेश दिया था। इस नए नियम के तहत, अमेरिका के जन्म प्रमाणपत्र के आधार पर केवल दो ही जेंडर पुरुष और महिला को मान्यता दी जाएगी। इससे पहले बाइडेन प्रशासन ने 2021 में बिना किसी मेडिकल सर्टिफिकेट के व्यक्ति को अपनी जेंडर पहचान चुनने की अनुमति दी थी। यानी कोई व्यक्ति स्वयं तय कर सकता था कि वह “मेल”, “फीमेल” या “थर्ड जेंडर” के रूप में पहचान चाहता है।

सेना में भी थर्ड जेंडर पर रोक

सिर्फ पासपोर्ट ही नहीं, अब अमेरिकी सेना में भी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए दरवाजे बंद कर दिए गए हैं। यूएस आर्मी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घोषणा की कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अब सेना में भर्ती नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही पहले से सेवा दे रहे सैनिकों के लिए जेंडर परिवर्तन से जुड़ी सभी मेडिकल प्रक्रियाओं को भी रोक दिया गया है। हालांकि, सेना ने यह भी कहा कि जेंडर डिस्फोरिया से पीड़ित सैनिकों ने देश की सेवा में अहम योगदान दिया है और उनके साथ सम्मान और गरिमा से व्यवहार किया जाएगा।

क्या है जेंडर डिस्फोरिया?

जेंडर डिस्फोरिया एक मनोवैज्ञानिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति के जन्म से मिले बायोलॉजिकल जेंडर और उसकी आंतरिक जेंडर पहचान में फर्क होता है। यह मानसिक और भावनात्मक तनाव का कारण बन सकता है। अमेरिका में यह फैसला अब सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस का केंद्र बन गया है। एक ओर ट्रंप समर्थक इसे “जेंडर भ्रम पर रोक” मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकार समूह इसे “समानता के खिलाफ कदम” बता रहे हैं।

1 / 5
Your Score0/ 5
Gausiya Bano

Gausiya Bano

Mail ID - gausiyaseikh1999@gmail.com

Gausiya Bano is a Multimedia Journalist based in Lucknow, the capital city of Uttar Pradesh, currently serving as Desk In-Charge at Newstrack. She holds a postgraduate degree in Journalism from Makhanlal Chaturvedi National University, Bhopal, Madhya Pradesh. With over 2.5 years of experience, she has worked with leading organizations including Rajasthan Patrika and NewsBytes. She has expertise in news desk operations, reporting and digital journalism. At Newstrack She oversees content management, ensures editorial accuracy and coordinates with reporters to maintain high newsroom standards. Passionate about ethical reporting and adapting to the evolving media landscape, Gausiya Bano continues to grow as a dedicated and responsible journalist.

Next Story