अब शुरू होगा तीसरा विश्व युद्ध! B-2 बॉम्बर ने ईरान को किया राख, ट्रंप का ऐलान- अगला निशाना तय है

B-2 bomber Iran strike: 37 घंटे तक लगातार उड़ान भरने वाला ये ‘मौत का जहाज’ ईरान की तीन परमाणु साइट्स पर ऐसे बरसा जैसे किसी फिल्म में आखिरी वार होता है। 14 बंकर बस्टर बम और दर्जनों मिसाइलों के साथ अमेरिकी आकाश से बरसती आग ने ईरान की जमीन को हिला दिया।

Harsh Srivastava
Published on: 23 Jun 2025 4:05 PM IST
अब शुरू होगा तीसरा विश्व युद्ध! B-2 बॉम्बर ने ईरान को किया राख, ट्रंप का ऐलान- अगला निशाना तय है
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B-2 bomber Iran strike: पूरी दुनिया उस वक्त सन्न रह गई जब अमेरिका ने अपनी सबसे खतरनाक और महंगी सैन्य ताकत को मैदान में उतार दिया। वो भी ऐसे वक्त में जब मिडिल ईस्ट पहले से ही आग में झुलस रहा था। इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग में जब अमेरिका कूदा तो उसके साथ आई अमेरिकी वायुसेना की रीढ़— B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर। इसे ऐसे समझिए जैसे किसी चुपके शिकारी ने दुश्मन की गर्दन पर वार कर दिया हो और दुश्मन को भनक तक नहीं लगी।

37 घंटे तक लगातार उड़ान भरने वाला ये ‘मौत का जहाज’ ईरान की तीन परमाणु साइट्स पर ऐसे बरसा जैसे किसी फिल्म में आखिरी वार होता है। 14 बंकर बस्टर बम और दर्जनों मिसाइलों के साथ अमेरिकी आकाश से बरसती आग ने ईरान की जमीन को हिला दिया। जब बी-2 बॉम्बर मिशन पूरा करके अमेरिकी धरती पर लौटा तो ट्रंप ने खुलेआम कहा — “Mission Accomplished!”

कैसे हुआ 37 घंटे का 'मौत का सफर'?

अब ज़रा सोचिए, किसी प्लेन में 37 घंटे तक लगातार उड़ते रहना कितना कठिन होगा? लेकिन यही किया अमेरिका के दो जांबाज़ पायलटों ने। डिएगो गार्सिया में मौजूद अमेरिकी बेस से उड़ा ये स्टील्थ बॉम्बर फारस की खाड़ी की तरफ बढ़ा। रास्ते में ईंधन भरने के लिए कई बार हवाई टैंकरों की मदद ली गई। और फिर ईरान के ऊपर से जैसे ही आदेश मिला, बंकर बस्टर बमों की बरसात शुरू हो गई।

बी-2 बॉम्बर के अंदर पूरी दुनिया से अलग एक दूसरी दुनिया बसती है। इसमें शौचालय से लेकर ओवन और छोटे रेफ्रिजरेटर तक की सुविधा मौजूद है। पायलटों के लिए नींद लेने का अलग स्पेस है, ताकि कोई थकावट उनके मिशन को न रोक सके। अंदर की सीटें ऐसी कि 37 घंटे की उड़ान के बाद भी पीठ में दर्द न हो। यानी कि उड़ान भी, युद्ध भी और आराम भी।

क्यों है B-2 बॉम्बर दुनिया का सबसे खतरनाक विमान?

B-2 बॉम्बर को ऐसे समझिए जैसे हवा में उड़ता हुआ अदृश्य शिकारी। इसका डिजाइन रडार से बचने के लिए बनाया गया है। यह दुश्मन के रडार पर या तो दिखता ही नहीं या फिर किसी पक्षी की तरह छोटा सा सिग्नल देता है। 69 फीट लंबाई, 172 फीट पंखों का फैलाव और 17 फीट ऊंचाई वाला यह जहाज अपने साथ 20 टन बम लेकर उड़ सकता है। इसमें लगे चार GE टर्बोफैन इंजन इसे 50,000 फीट से भी ज्यादा ऊंचाई तक उड़ने में सक्षम बनाते हैं। यही कारण है कि यह सीधे दुश्मन के दिल में वार करता है और दुश्मन को पता भी नहीं चलता कि मौत किस दिशा से आ रही है। और सबसे बड़ी बात — ‘बंकर बस्टर बम’। ये बम किसी आम बम की तरह नहीं होते। इन्हें खास तौर पर ऐसे अंडरग्राउंड ठिकानों को नष्ट करने के लिए तैयार किया जाता है, जो कई फीट मोटी कंक्रीट या चट्टानों के नीचे बनाए जाते हैं। और ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को ऐसे ही बंकरों में छिपा रखा था।

ट्रंप ने क्यों चुना B-2 बॉम्बर को ही?

डोनाल्ड ट्रंप की सोच हमेशा से आक्रामक और सीधे वार करने वाली रही है। जब सुरक्षा सलाहकारों ने उन्हें बताया कि ईरान के यूरेनियम भंडार को खत्म करने के लिए बंकर बस्टर बम ही एकमात्र विकल्प हैं और वो सिर्फ B-2 बॉम्बर से ही दागे जा सकते हैं, तो ट्रंप ने एक सेकंड भी नहीं गंवाया। तीन दिन पहले व्हाइट हाउस में हुई सीक्रेट मीटिंग में ट्रंप ने साफ कहा — “हम इंतजार नहीं कर सकते। अगर ईरान परमाणु बम बना रहा है, तो उसे यहीं खत्म कर देना चाहिए।” और इसके बाद अमेरिका की सबसे गुप्त तैयारी शुरू हो गई। जब बी-2 बॉम्बर ने सफलतापूर्वक तीनों साइट्स पर हमला कर मिशन पूरा किया, तब अमेरिका ने जानबूझकर ईरान को जानकारी दी। ये एक तरह से चेतावनी थी कि अगली बार तुम्हारे पूरे सैन्य ढांचे को मिट्टी में मिला दिया जाएगा।

ईरान पर क्यों गिरे बंकर बस्टर बम?

ईरान लंबे समय से गुपचुप तरीके से अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा था। दुनिया भर की एजेंसियां इसकी निगरानी कर रही थीं। अमेरिकी खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इन तीन साइट्स पर ऐसे उपकरण और यूरेनियम के भंडार थे, जिनका मकसद सिर्फ और सिर्फ परमाणु बम तैयार करना था। बंकर बस्टर बम का मकसद था इन अंडरग्राउंड ठिकानों को पूरी तरह तबाह करना। ये बम इतने शक्तिशाली होते हैं कि जमीन के भीतर घुसकर ब्लास्ट करते हैं, जिससे अंदर रखा हर सामान खाक हो जाता है। अब ईरान के इन ठिकानों पर सिर्फ राख और मलबा बचा है।

क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है?

ईरान ने अमेरिकी हमले के बाद जो चेतावनी दी है, वो किसी बड़ी जंग की शुरुआत का संकेत दे रही है। फारस की खाड़ी में तनाव पहले से चरम पर था, अब उसमें आग और घी का काम कर दिया अमेरिका ने। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी है। ये वही रास्ता है जिससे दुनिया का करीब 20% तेल और गैस गुजरता है। अगर ईरान ने सच में इस रास्ते को बंद कर दिया तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को लकवा मार जाएगा। पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू जाएंगे, भारत जैसे देशों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ेगा। और अगर अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की तो ये लड़ाई सीधा तीसरे विश्व युद्ध की तरफ जा सकती है। चीन पहले ही अमेरिका पर हमला बोल चुका है, लेकिन शब्दों से। बीजिंग ने अमेरिकी हमले को ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’ बताया है और कहा है कि अमेरिका अपने ‘हथियारों के नशे में चूर है।’ अगर चीन ने खुलकर ईरान का साथ दिया तो हालात और ज्यादा विस्फोटक हो जाएंगे।

‘मौत का जहाज’ तो लौट आया, लेकिन जंग अभी बाकी है

अभी तो B-2 बॉम्बर मिशन पूरा करके लौट आया है, लेकिन असली जंग अब शुरू हुई है। अमेरिका ने पहला वार कर दिया है, अब सबकी निगाहें ईरान की अगली चाल पर हैं। क्या होर्मुज बंद होगा? क्या अमेरिका फिर से हमला करेगा? क्या चीन खुलकर मैदान में उतरेगा? एक बात तो तय है—अगर अब किसी ने गलती से भी ट्रिगर दबा दिया तो पूरी दुनिया युद्ध की आग में झुलस जाएगी। और तब अगली बार ‘B-2 बॉम्बर’ सिर्फ एक मिशन पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर ‘मौत’ बनकर मंडराएगा।

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Harsh Srivastava

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