Chaitra Navratri 2022 Sixth Day: मां कात्यायनी का यह मंत्र है बहुत असरदार, आज करें जाप, मिलेगा हर समस्या का समाधान

Chaitra Navratri 2022 Sixth Day:आज चैत्र नवरात्रि का छठा दिन है । आज के दिन मां दुर्गा के छठे रुप कात्यायनी देवी की पूजा का विधान है। चैत्र नवरात्रि (Navratri) में छठे दिन मां कात्यायिनी देवी(Maa Katyayaini )की पूजा की जाती है।

Published By :  Suman Mishra | Astrologer
Update: 2022-04-07 03:08 GMT

सांकेतिक तस्वीर, सौ. से सोशल मीडिया

Chaitra Navratri 2022 Six Day:

चैत्र नवरात्रि का छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा

आज चैत्र नवरात्रि का छठा दिन है । आज के दिन मां दुर्गा के छठे रुप कात्यायनी देवी की पूजा का विधान है। चैत्र नवरात्रि (Navratri) में छठे दिन मां कात्यायिनी देवी(Maa Katyayaini )की पूजा की जाती है। मां दुर्गा के कात्यायिनी रूप को फलदायिनी भी कहा जाता है। महर्षि कात्यायन के यहां पुत्री के रूप में आश्विन कृष्ण चतुर्दशी को जन्म लेकर माता ने महिषासुर (Mahishasura)का वध किया था। इन्होंने शुक्ल सप्तमी, अष्टमी और नवमी तक तीन दिन कात्यायन ऋषि की पूजा ग्रहण कर दशमी(Dashmi) को महिषासुर का वध किया था। नवरात्रि के छठे दिन इनके स्वरूप की पूजा( Worship) की जाती है।आज षष्ठी तिथि 08:33 PM तक फिर सप्तमी तिथि का आरंभ होगा। इस दौरान मां कात्यायनी की पूजा विधि के करने से हर समस्या का समाधान  होता है।

देवी दुर्गा का छठा स्वरूप मां कात्यायनी

नवरात्रि के छठे दिन इनके स्वरूप की पूजा की जाती है। मां का स्वरुप इस दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित रहता है। ये सिंह पर सवार, चार भुजाओं वाली और सुसज्जित आभा मंडल वाली देवी हैं। इनके बाएं हाथ में कमल और तलवार और दाएं हाथ में स्वस्तिक और आशीर्वाद की मुद्रा है। मां कात्यायनी की भक्ति और उपासना द्वारा मनुष्य को बड़ी सरलता से अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति हो जाती है। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है।पौराणिक कथा

जब महिषासुर नाम के राक्षस का अत्याचार बहुत बढ़ गया तो ब्रह्म, विष्णु और महेश ने अपना तेज देकर देवी कात्यायनी को पैदा किया। महर्षि कात्यायन की यह इच्छा थी कि देवी उनके घर पुत्री के रूप में पैदा हों। इसके बाद देवी अश्विन मास की कृष्ण चतुर्दशी को पैदा हुईं। कात्यायन ऋषि ने उनका पालन पोषण किया। उसके बाद महर्षि कात्यायन की प्रार्थना स्वीकार कर देवी ने दशमी के दिन महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया था। उसके बाद शुम्भ तथा निशुम्भ नाम के राक्षस भी इन्द्र, नवग्रह, वायु तथा अग्नि को परेशान करने लगे। इन असुरों से त्रस्त देवताओं ने हिमालय पर्वत पर जाकर विष्णुमाया नाम की दुर्गा की आराधना की। उसके बाद मां कात्यायनी ने ही देवताओं को इन दुष्ट असुरों से मुक्ति दिलायी थी।

मां कात्यायनी के साथ इनकी भी पूजा का विधान

नवरात्रि के छठे दिन सूर्य भगवान की पूजा अर्चना करने का भी विशेष विधान है। मां कात्यायनी की पूजा करने के लिए निम्न मंत्र का जाप करने से शुभ फल मिलता है , जो सरल और आसान है :

या देवी सर्वभू‍तेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम॥

हे मां! सर्वत्र विराजमान और कात्यायनी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे मां, मुझे दुश्मनों का संहार करने की शक्ति प्रदान करें।


मां कात्यायनी कवच मंत्र:

पातुकां कां स्वाहास्वरूपणी।

ललाटेविजया पातुपातुमालिनी नित्य संदरी॥

कल्याणी हृदयंपातुजया भगमालिनी॥

मां कात्यायनी की पूजा करने के लिए निम्न मंत्र का जाप करने से शुभ फल मिलता है । मां कात्यायनी को प्रसन्न करने के लिए विशेष प्रकार से आराधना करें। इसके लिए पहले फूलों से देवी मां को प्रणाम कर मंत्र का जाप करें। नवरात्र के छठे दिन दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय का पाठ करना चाहिए। देवी को फूल और जायफल प्रिय हैं इसलिए उन्हें पुष्प तथा जायफल अर्पित करें। देवी के साथ ही शंकर जी की भी पूजा करें। देवी कात्यायनी को शहद पसंद है इसलिए इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनकर मां को शहद चढ़ाएं।

कहते है कि भगवती कात्यायनी का ध्यान, स्तोत्र और कवच के जाप करने से आज्ञाचक्र जाग्रत होता है। इससे रोग, शोक, संताप, भय से मुक्ति मिलती है। साथ ही जिनके विवाह में विलंब होता है उनकी भी शादी हो जाती है।

'ऊँ क्लीं कात्यायनी महामाया महायोगिन्य घीश्वरी,

नन्द गोप सुतं देवि पतिं मे कुरुते नमः।।'

इस मंत्र का 11 बार जाप करने से विवाह में आ रही परेशानी जल्द ही दूर होगी। जिन लोगों की शादी में समस्या है अगर वो इस मंत्र का आज जाप करें तो शादी जल्दी और अच्छे घर में हो जाती है। आपको समृद्धि और पैसे वाला जीवनसाथी मिलता है।

इसके अलावा आज के दिन मां लक्ष्मी के साथ देवी दुर्गा की पूजा का विधान है। साथ में शिव को प्रिय बेल मां दुर्गा की पूजा में भी चढ़ाने और पूजा करने का विधान है। षष्ठी तिथि में शाम को सात अनाज, दूध दही, इत्र मिट्टी से बेल के पेड़ की पूजा करने से माता रानी की कृपा बरसती है। बुरी शक्तियों का नाश और बीमारी दूर रहती है।

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