Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai: खुशियों की सौगात, मोक्ष की राह का व्रत,बरसेगी विष्णु भगवान की कृपा,जानें यहां

Kamada Ekadashi 2025 Shubh Muhurat: सनातन धर्म में परमपद की प्राप्ति और ईश्वर की परम भक्ति का सरल माध्यम है एकादशी व्रत। 24 एकादशियों में फलदायी है कामदा एकादशी।;

Update:2025-04-04 11:18 IST

Kamada Ekadashi 2025 Vrat Kab hai कामदा एकादशी व्रत कब है?  हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत महत्व है।हर महीने दो एकादशी दो पक्ष में पड़ती है। हर एकादशी की अपनी महिमा है।  कामदा एकादशी के दिन की गई श्रद्धा पूर्वक पूजा से हर मनोकामना पूरी हो जाती है।

कामदा एकादशी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहा जाता है। इसे साल की पहली एकादशी माना जाता है, जो इस वर्ष 8 अप्रैल 2025 को आएगी। इसे फलदा एकादशी भी कहते हैं और इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से व्यक्ति को परमपद की प्राप्ति होती है।

सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। चैत्र शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा की जाती है और कथा सुनी जाती है। कहा जाता है कि इस व्रत से वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।

कामदा एकादशी का शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारंभ: 7 अप्रैल 2025 को रात 08 बजे शुरू होगी

एकादशी तिथि समाप्त: 8 अप्रैलको रात 09 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी

सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि का संयोग

सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग सुबह 06 . 03 मिनट से लेकर सुबह 07 . 55 मिनट तक है।
 रवि योग भी सुबह 06 . 03 मिनट से लेकर सुबह 07 . 55 मिनट तक है। 

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 से 12:55

सूर्योदय - सुबह 06 बजकर 03 मिनट पर

सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 43 मिनट पर

चंद्रोदय- दोपहर 02 बजकर 44 मिनट पर

चंद्रास्त- सुबह 04 बजकर 06 मिनट पर (09 अप्रैल)

ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 32 मिनट से 05 बजकर 18 मिनट तक

विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 20 मिनट तक

गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 42 मिनट से 07 बजकर 04 मिनट तक

निशिता मुहूर्त- रात 12 बजे से 12 बजकर 45 मिनट तक  

पारणा मुहूर्त: 09 अप्रैल को किया जाएगा। इस दिन सुबह 06. 02 मिनट से लेकर सुबह 08. 34 मिनट के मध्य पारण कर सकते हैं।

कामदा एकादशी व्रत विधि

इस दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान कर व्रत और दान का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करके कथा सुनी जाती है। इस दिन नमक का सेवन वर्जित होता है और सात्विक जीवनशैली अपनाई जाती है। रात में भजन-कीर्तन और जागरण करना शुभ माना जाता है। श्री हरि को प्रसन्न करने के लिए सहस्त्रनाम का पाठ करना लाभकारी होता है। द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा देनी चाहिए और जरूरतमंदों को दान करना चाहिए।

व्रत रखने से एक दिन पूर्व यानी दशमी को सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए। एकादशी के दिन निर्जला व्रत रखा जाता है और सूर्य देव को प्रणाम कर व्रत की शुरुआत होती है। सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर गंगाजल से पूजा स्थल को पवित्र किया जाता है।

फिर लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित की जाती है। जल लेकर व्रत संकल्प लिया जाता है और भगवान को हल्दी, अक्षत, चंदन, फल-फूल अर्पित किए जाते हैं। रोली से तिलक कर पंचामृत चढ़ाया जाता है। तुलसी दल चढ़ाने के बाद एकादशी कथा का पाठ किया जाता है और भगवान को भोग अर्पित किया जाता है।

संध्या समय तुलसी के आगे घी का दीपक जलाया जाता है क्योंकि तुलसी जी को प्रसन्न करने से भगवान विष्णु भी प्रसन्न होते हैं। अंत में ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दी जाती है, फिर व्रती भोजन ग्रहण करते हैं।

कामदा एकादशी के दिन क्या करें और क्या न करें

सूर्यास्त के बाद भोजन न करें।

भगवान विष्णु को सादा और मीठा भोग लगाएं, तीखा भोजन न चढ़ाएं।

चावल का सेवन वर्जित है क्योंकि इससे अगले जन्म में रेंगने वाले जीव का जन्म मिलता है।

प्याज और लहसुन रहित सात्विक भोजन ही करें।

ऊंची आवाज में बोलने और अपशब्द कहने से बचें।

पति-पत्नी को प्रेमभाव से रहना चाहिए और आपस में झगड़ा नहीं करना चाहिए।

तिल और फलों का दान करें।

गंगा स्नान करना शुभ माना जाता है।

गौमाता को हरा चारा खिलाएं।

विवाह में देरी हो रही हो तो केसर, केला, गुड़ और चने की दाल दान करें।

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