इनकी आवाज ने दिया संगीत को नया मुकाम, ऐसे बने दिलीप कुमार से रहमान

Update: 2017-01-05 10:26 GMT

लखनऊ: आजा आजा जिंद शामीयाने के तले....जय हो....गाने को अपनी आवाज देने वाले सुरों के बादशाह ए आर रहमान ने दुनिया के संगीत प्रेमियों का दिल अपनी आवाज से जीता है। उनकी आवाज का दुनिया में ऐसा जादू चला कि उनकी झोली में ऑस्कर अवॉर्ड भी आए। लेकिन इस पहचान को बनाने के लिए उन्हें संघर्ष के कई दौर से गुजरना पड़ा और दिलीप कुमार से रहमान तक का सफर तय करना पड़ा। तब जाकर उन्हें ये पहचान मिली है। जब वे 9 साल के थे तो उनके सर से पिता का साया उठ गया। जिसकी वजह से वे पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए। 6 जनवरी 1967 को तमिलनाडु में रहमान का जन्म हिंदू परिवार में हुआ था।

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पहले उनका नाम दिलीप कुमार था। एक खबर के अनुसार 1989 में रहमान की छोटी बहन बीमार पड़ गई थी। सभी डॉक्टरों ने कह दिया कि उसके बचने की कोई उम्मीद नहीं है। रहमान ने अपनी छोटी बहन के लिए मस्जिदों में दुआयें मांगी थी और जल्द हीं उन दुआओं के असर से ठीक हो गई। इस चमत्कार को देख रहमान ने इस्लाम कबूल कर लिया और इसके बाद उनका नाम दिलीप कुमार से अल्लाह रखा रहमान यानि ए आर रहमान हो गया।

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वही दूसरी तरफ रहमान की बायोग्राफी 'द स्पिरिट ऑफ म्यूजिक' में यह बताया गया है कि कैसे एक ज्योतिषी के कहने पर उन्होंने अपना नाम बदला। रहमान के अनुसार सच यह है कि उन्हें उनके नाम पसंद नहीं था। ये नाम उनकी इमेज को सूट नहीं करते थे। सूफी पथ से जुड़ने से पहले, मां एक ज्योतिषी के पास छोटी बहन की कुंडली दिखाने ले गईं।

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यह वही दौर था जब वे अपना नाम बदलकर नई पहचान बनाने के लिए उत्सुक था। तब उस ज्योतिषी ने उन्हें देखा और सलाह दी कि 'अब्दुल रहमान' और 'अब्दुल रहीम' दोनों में से कोई भी नाम उनके लिए अच्छा होगा। उन्हें 'रहमान' नाम पसंद आया। दिलचस्प बात यह है कि एक हिंदू ज्योतिषी ने मुझे मुस्लिम नाम दिया। बाद में मां ने रहमान ने आगे अल्ला रख्खा लगाने को कहा और मेरा नाम ए आर रहमान पड़ गया।

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