Chandranath Rath murder case:1 करोड़ का बजट, 4 राज्यों के शूटर...PA चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की ऐसे हुई थी साजिश, बंगाल से ही मिली थी सुपारी
Chandranath Rath Murder Case: शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में बड़ा खुलासा! 1 करोड़ की सुपारी, 4 राज्यों के शूटर, Signal App पर मिली हत्या की कमांड और UPI पेमेंट से खुला पूरा राज। जानिए CBI जांच में सामने आई इस हाईटेक मर्डर प्लान की पूरी कहानी।
Chandranath Rath murder case: बंगाल की शांत दिखने वाली धरती पर एक ऐसी खूनी पटकथा लिखी गई, जिसने न केवल सुरक्षा एजेंसियों को हिलाकर रख दिया, बल्कि अपराध की दुनिया के एक नए और खौफनाक 'डिजिटल अवतार' को भी सामने ला दिया। यह कहानी है पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए, चंद्रनाथ रथ की हत्या की। एक ऐसा कत्ल जिसकी सुपारी करोड़ों में दी गई और जिसे किसी आम शूटर ने नहीं, बल्कि चार राज्यों के गैंगस्टरों के एक खतरनाक गठजोड़ ने अंजाम दिया। इस पूरे ऑपरेशन की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि मौत का यह खेल किसी पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि मोबाइल एप्स और हाईटेक लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए कंट्रोल हो रहा था।
मध्यमग्राम की गलियों में गूंजी गोलियां
कोलकाता की चकाचौंध से महज 20 किलोमीटर दूर मध्यमग्राम का शैलेशपाड़ा इलाका 6 मई की उस काली रात को कभी नहीं भूल पाएगा। मुख्यमंत्री के बेहद करीबी चंद्रनाथ रथ को कातिलों ने अपना निशाना बनाया और ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर उनकी जीवनलीला समाप्त कर दी। जांच की कमान संभालने वाली सीबीआई की टीम अब तक दो बार क्राइम सीन का गहन मुआयना कर चुकी है। बैलिस्टिक एक्सपर्ट्स ने खून के धब्बों से लेकर गोलियों के खोखों तक, एक-एक साक्ष्य को बड़ी बारीकी से जुटाया है। सीबीआई के रडार पर अब वह पूरी कड़ी है, जिसने इस हत्याकांड को एक प्रोफेशनल शूटआउट में तब्दील कर दिया।
तीन शूटरों की गिरफ्तारी
सीबीआई के पास फिलहाल तीन शूटर राज सिंह, मयंक राज मिश्र और विक्की मौर्या हिरासत में हैं। शुरुआती पूछताछ में जो तथ्य सामने आए हैं, वे इस मामले को और अधिक पेचीदा बना रहे हैं। भले ही शूटरों का ताल्लुक उत्तर प्रदेश और बिहार से हो, लेकिन तफ्तीश इशारा कर रही है कि चंद्रनाथ का असली दुश्मन कोई परदेसी नहीं, बल्कि मध्यमग्राम का ही एक स्थानीय शख्स है। सूत्रों के मुताबिक, बिहार के बक्सर से दबोचे गए मयंक और विक्की ने कबूला है कि सुपारी देने वाला शख्स मध्यमग्राम का ही रहने वाला है। उसी ने चंद्रनाथ की तस्वीरें साझा कीं, उनका मूवमेंट ट्रैक करवाया और अंत में 'सिग्नल' एप पर कत्ल का आखिरी फरमान सुनाया।
मयंक राज मिश्र और UPI पेमेंट की गलती
क्राइम सिंडिकेट ने खुद को बचाने के लिए काफी सीक्रेसी बरती थी, लेकिन 'डिजिटल इंडिया' की एक सुविधा उनके लिए गले की फांस बन गई। सीबीआई सूत्रों का दावा है कि बक्सर के शूटर मयंक राज मिश्र को इस मिशन का 'फंड मैनेजर' बनाया गया था। मास्टरमाइंड ने मयंक के खाते में पैसे भेजे थे, जिसका इस्तेमाल उसने बक्सर से बंगाल तक के सफर में किया। मयंक ने रास्ते के सभी टोल नाकों पर अपने मोबाइल से यूपीआई (UPI) पेमेंट की। बंगाल पुलिस ने हावड़ा के बाली टोल गेट पर हुई इसी डिजिटल ट्रांजैक्शन को ट्रैक किया और कातिलों की गर्दन तक जा पहुंची। यह एक छोटी सी डिजिटल चूक इस बड़ी खूनी साजिश के ताबूत की आखिरी कील साबित हुई।
महीने भर की रेकी
चंद्रनाथ रथ की हत्या कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। इसकी प्लानिंग महीनों पहले शुरू हो चुकी थी। किराये के कातिलों को चंद्रनाथ की हर छोटी-बड़ी गतिविधि की जानकारी दी जा रही थी वे घर से कब निकलते हैं, कहां जाते हैं और उनका सुरक्षा घेरा कैसा है। जानकारी के अनुसार, शूटर बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले ही उन्हें निशाना बनाने वाले थे, लेकिन भारी सुरक्षा और चुनावी भीड़ के कारण उन्हें अपना इरादा बदलना पड़ा। आखिरकार, उन्होंने 6 मई का दिन चुना, जब उन्हें लगा कि सुरक्षा में थोड़ी ढील है।
एक करोड़ का बजट और ग्लॉक पिस्तौल का इस्तेमाल
इस हत्याकांड के पीछे जिस क्राइम सिंडिकेट का हाथ है, उसने पैसे पानी की तरह बहाए। सीबीआई सूत्रों का अनुमान है कि पूरे ऑपरेशन पर 1 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए, जिसमें अकेले 70 लाख रुपये तो सुपारी के तौर पर दिए गए थे। कातिलों ने साधारण हथियारों के बजाय 'ग्लॉक 47X' जैसी अत्याधुनिक पिस्तौलों का इस्तेमाल किया, जिनकी कीमत ब्लैक मार्केट में 10 लाख रुपये तक होती है। इन हथियारों की खासियत यह है कि इनसे नॉन-स्टॉप फायरिंग की जा सकती है। इसके अलावा, झारखंड से लिफ्ट की गई निसान माइक्रा कार और फेक नंबर प्लेटों के इंतजाम में भी भारी रकम खर्च की गई।
4 राज्यों का नेक्सस और CBI की SIT
हत्याकांड की गंभीरता और इसके तार उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और बंगाल से जुड़े होने के कारण सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंपी। सीबीआई ने इस केस की तह तक जाने के लिए 8 वरिष्ठ अधिकारियों की एक 'स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम' (SIT) बनाई है। इस टीम में दिल्ली के डीआईजी पंकज कुमार सिंह, एसपी सुभाष चंद्र कुंडू और अनिल कुमार यादव जैसे दिग्गज शामिल हैं। साथ ही, टीम में धनबाद, पटना, रांची और लखनऊ के तेजतर्रार अफसरों को भी जगह दी गई है। यह अंतर-राज्यीय टीम अब उस मास्टरमाइंड के करीब है, जिसने इस हाईटेक मर्डर को प्रायोजित किया था।
CCTV फुटेज और भागने का खूनी रास्ता
सीबीआई के हाथ लगे सीसीटीवी फुटेज ने मर्डर के पूरे सीक्वेंस को साफ कर दिया है। फुटेज में देखा जा सकता है कि मयंक राज मिश्र निसान माइक्रा कार लेकर बिराटी मोड़ के पास पहुंचा, जहां से कार बारासात के एक रेलवे फाटक के पास खड़ी की गई। वारदात को अंजाम देने के बाद शूटर दोहड़िया इलाके से अलग-अलग दिशाओं में भागे, लेकिन शातिर अपराधी फिर से रात 11 बजे सियालदह स्टेशन पर इकट्ठा हुए और वहां से बिहार व यूपी के लिए रवाना हो गए। हालांकि, कानून के लंबे हाथों ने उन्हें ढूंढ निकाला।