Digvijaya Singh ने क्यों वापस मांगा राम मंदिर में दिया चंदा? कोर्ट जाने की दी धमकी, बोले- 'सूद समेत वापस करो पैसा'

Digvijaya Singh Ram Mandir Donation: राम मंदिर में दिए चंदे को लेकर दिग्विजय सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अदालत जाने की चेतावनी देते हुए कहा कि उनका दान सूद समेत वापस किया जाए।

Update:2026-07-03 21:01 IST

Digvijaya Singh Ram Mandir Donation: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चोरी और महाघोटाले को लेकर अब देश की सियासत में एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह ने इस पूरे मामले पर एक ऐसा सनसनीखेज बयान दे डाला है, जिसने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों को हिलाकर रख दिया है. भोपाल में मीडिया के कैमरों के सामने आकर दिग्विजय सिंह ने साफ एलान किया है कि वे इस गबन के खिलाफ सीधे अयोध्या की अदालत में एक बड़ा मुकदमा दायर करने जा रहे हैं. उनका कहना है कि रामलला के दरबार में उनके द्वारा जो पवित्र चंदा दिया गया था, उसे बहुत ही बेरहमी से लूटा गया है. इसलिए अब वे कानूनी लड़ाई लड़कर अपनी पाई-पाई वापस मांगेंगे, ताकि उस पैसे को किसी सुरक्षित और सही जगह पर जमा कराया जा सके.

न्याय मांगने कोर्ट जाएंगे पूर्व CM

दिग्विजय सिंह ने उत्तर प्रदेश की पुलिस और मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें थाने या स्थानीय पुलिस प्रशासन पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी पुलिस प्रणाली सत्ताधारी बीजेपी के इशारे पर काम कर रही है, इसलिए वे अपनी शिकायत लेकर किसी पुलिस स्टेशन के चक्कर बिल्कुल नहीं काटेंगे. वे सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा वापस लेकर रहेंगे. उन्होंने साफ किया कि अदालत से वापस मिलने वाली इस राशि को वे रामालया ट्रस्ट में पूरी श्रद्धा के साथ जमा करेंगे, ताकि भगवान राम के काम में किसी भी तरह का पाखंड या भ्रष्टाचार न हो सके.

पुरानी आदतों पर कसा तीखा तंज

चंदे के इतिहास पर बोलते हुए कांग्रेस नेता ने बताया कि राम मंदिर के नाम पर देश में दो बार बड़े स्तर पर धन जुटाने का अभियान चलाया गया था. पहली बार जब लालकृष्ण आडवाणी ने ऐतिहासिक रथ यात्रा निकाली थी, तब भी उन्होंने दिल खोलकर अपना योगदान दिया था, क्योंकि भगवान राम में उनकी गहरी आस्था है. हालांकि, उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उस पहले चंदे का आज तक कोई हिसाब-किताब देश के सामने नहीं रखा गया. सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने के बाद जब विश्व हिंदू परिषद ने दोबारा चंदा मांगना शुरू किया, तो उन्होंने वीएचपी को पैसे देने से साफ मना कर दिया था, क्योंकि उन्हें उनकी नीयत पर शक था. इसी वजह से उन्होंने सीधे मुख्य ट्रस्ट के खाते में अपना पैसा भेजा था.

शिवराज से ज्यादा दिया था दान

अपनी दान राशि का खुलासा करते हुए दिग्विजय सिंह ने एक दिलचस्प वाकया साझा किया. उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राम मंदिर के लिए 1 लाख रुपये का गुप्त दान दिया था. उनसे प्रभावित होकर और भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा को बड़ा दिखाते हुए दिग्विजय सिंह ने 1 लाख 11 हजार रुपये की शगुन राशि दान करने का फैसला किया. इस राशि को सुरक्षित पहुंचाने के लिए उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था और अनुरोध किया था कि इस धन को सीधे मुख्य ट्रस्ट के खाते में जमा कराया जाए. उन्होंने खुद बैंक जाकर पैसा जमा किया और उसकी बकायदा रसीद भी हासिल की थी, लेकिन आज मंदिर की बदहाली देखकर उनका दिल टूट गया है.

कम सैलरी वाले कर्मचारियों का खेल

दिग्विजय सिंह ने ट्रस्ट के पूर्व कर्ताधर्ता चंपत राय पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने मंदिर की व्यवस्था संभालने के लिए महज 10 से 15 हजार रुपये महीने के वेतन पर अनुभवहीन कर्मचारियों को रख लिया था. यही कम सैलरी वाले लोग रोज आने वाले दान की बड़ी-बड़ी गड्डियों में से 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा बहुत ही शातिर तरीके से गायब कर देते थे. इस महापाप में बैंक के बड़े अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ चुकी है. आपको बता दें कि 7 जून को सामने आए इस 8 आरोपियों वाले कांड में अब तक चंपत राय और अनिल मिश्रा जैसे दिग्गजों को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा है, जिसकी जांच अब यूपी सरकार की विशेष टीम कर रही है.

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