DK Shivakumar CM: 1413 करोड़ की संपत्ति, 19 केस... फिर भी कर्नाटक के किंग बनेंगे डीके शिवकुमार, क्या है कांग्रेस की मजबूरी?
DK Shivakumar CM: कर्नाटक में सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद 1413 करोड़ की संपत्ति और 19 मुकदमों वाले डीके शिवकुमार का सीएम बनना तय है। जानिए क्या है कांग्रेस की यह सियासी मजबूरी।
DK Shivakumar CM: कर्नाटक की राजनीति में महीनों से चल रही खींचतान आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंच गई है। कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर 28 मई को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने इस्तीफा मंजूर करते हुए कैबिनेट भंग कर दी है जिससे डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। लेकिन सत्ता के इस बदलाव ने कांग्रेस की कथनी और करनी के एक बड़े विरोधाभास को भी उजागर कर दिया है। विडंबना देखिए जिस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लगातार पूंजीपतियों पर हमले करता है उसी ने आधिकारिक तौर पर देश के सबसे अमीर विधायक को दक्षिण भारत के सबसे अहम राज्य की कमान सौंपने की खबर है।
दरअसल, राहुल गांधी अपने भाषणों में लगातार आर्थिक असमानता, कॉर्पोरेट एकाधिकार और चंद लोगों के हाथों में धन सिमटने की तीखी आलोचना करते रहे हैं। वे कांग्रेस को हमेशा आम आदमी की पार्टी और अमीरों के खिलाफ खड़ा दिखाते हैं। लेकिन कर्नाटक के इस फैसले ने उनकी इस पूरी सियासी लाइन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी ने एक ऐसे नेता को सत्ता के शीर्ष पर बिठाया है जिसके पास न सिर्फ अरबों की संपत्ति है बल्कि मुकदमों का एक भारी बोझ भी है।
ADR के आंकड़ों पर ही गौर करें तो 2023 के विधानसभा चुनाव में डीके शिवकुमार ने अपने हलफनामे में अपनी और परिवार की कुल संपत्ति 1,413.78 करोड़ रुपये बताई थी। इसमें 1,140 करोड़ से ज्यादा की अचल संपत्ति और करीब 273 करोड़ रुपये की चल संपत्ति शामिल है। अब आलोचक खुलकर यही सवाल पूछ रहे हैं कि एक तरफ राहुल गांधी देश के संसाधनों पर चंद अमीरों के कब्जे का विरोध करते हैं तो दूसरी तरफ उनकी अपनी पार्टी ऐसे शख्स को सबसे ज्यादा ताकतवर बना रही है जो खुद अथाह धन और रसूख का प्रतीक है।
बात सिर्फ बेहिसाब दौलत की नहीं है। डीके शिवकुमार की यह ताजपोशी कई कानूनी अड़चनों के साये में हो रही है। 2023 के हलफनामे के मुताबिक ही उन पर 19 आपराधिक मामले दर्ज थे। हालांकि, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें बड़ी राहत देते हुए केस खारिज कर दिया था। फिर भी, आय से अधिक संपत्ति को लेकर सीबीआई की जांच और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कई मामले अभी भी उनके लिए सिरदर्द बने हुए हैं।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह पूरी स्थिति जमीनी राजनीति की मजबूरी को दर्शाती है। राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी भले ही पूंजीपतियों के खिलाफ माहौल बनाते हों लेकिन राज्यों में चुनाव जीतने के लिए पार्टी को ऐसे कद्दावर नेताओं की जरूरत पड़ती है जो संगठन पर मजबूत पकड़ रखने के साथ-साथ फंड जुटाने में भी माहिर हों। डीके शिवकुमार एक बेहतरीन रणनीतिकार हैं और 2023 की शानदार जीत के पीछे उनका बहुत बड़ा हाथ था। अब जब कांग्रेस विधायक दल इस बदलाव पर अंतिम मुहर लगा रहा है, तो पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह अपने अमीर-विरोधी नैरेटिव और देश के सबसे अमीर नेता को सीएम बनाने के फैसले के बीच तालमेल कैसे बिठाती है।