RBI New Notes: कागज नहीं प्लास्टिक... क्या बदलने वाली है भारत की करेंसी? जानिए कैसे होंगे RBI के नए नोट

RBI New Notes India 2026: RBI पॉलिमर यानी प्लास्टिक करेंसी नोट लाने पर कर रहा है विचार, जानिए कैसे होंगे नए नोट और क्या होगा फायदा

Update:2026-05-29 17:09 IST

RBI New Notes India 2026

RBI New Notes India 2026: अक्सर ऐसा देखा जाता है जब आपके हिफाजत से रखे हुए कागज के नोटों को बारिश ने नम कर दिया होगा या गलती से कपड़ों के साथ धुल कर पूरी तरह से खराब हो गए होंगे। लेकिन अब आपकी यह परेशानी जल्द ही काफूर होने वाली है। भारत में जल्द ही आपके हाथ में आने वाले नोट कागज के नहीं बल्कि प्लास्टिक के हो सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब पॉलिमर यानी प्लास्टिक करेंसी नोटों को लाने की दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है। हाल ही में पटना और मुंबई में हुई आरबीआई बोर्ड बैठकों में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। माना जा रहा है कि आने वाले समय में देश के कुछ शहरों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इन नोटों को चलन में लाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह भारतीय करेंसी सिस्टम में एक बड़ा बदलाव होगा। इससे न सिर्फ नोटों की उम्र बढ़ेगी बल्कि सरकार का हजारों करोड़ रुपये का खर्च भी कम हो सकता है।

आखिर क्यों बदलना चाहता है RBI नोटों का सिस्टम?

भारत में आज भी कागज की नकदी का इस्तेमाल बड़े स्तर पर होता है। जबकि डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ा है, लेकिन गांवों, छोटे शहरों और रोजमर्रा के लेन-देन में लोग आज भी कैश पर भरोसा करते हैं। यही वजह है कि हर साल नए नोटों की छपाई पर भारी खर्च करना पड़ता है। RBI की FY25 वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में नोट छापने पर 6,372.8 करोड़ रुपये खर्च हुए। इससे पहले यह खर्च 5,101.4 करोड़ रुपये था। यानी सिर्फ एक साल में खर्च में बड़ा उछाल आया है। कागज के नोट जल्दी फट जाते हैं, गंदे हो जाते हैं और बार-बार बदलने पड़ते हैं। यही समस्या अब आरबीआई को पॉलिमर नोटों की तरफ ले जा रही है।

क्या होते हैं पॉलिमर नोट?

पॉलिमर नोट खास तरह के प्लास्टिक मटेरियल से बनाए जाते हैं। ये सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होते हैं। इन पर पानी, नमी और धूल का असर कम होता है। यही वजह है कि ये लंबे समय तक खराब नहीं होते। इन नोटों में सिक्योरिटी फीचर्स भी ज्यादा बेहतर तरीके से लगाए जा सकते हैं। पारदर्शी विंडो, विशेष डिजाइन और उन्नत प्रिंटिंग तकनीक के कारण नकली नोट बनाना भी मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक पॉलिमर नोट की उम्र सामान्य नोट की तुलना में लगभग ढाई से तीन गुना ज्यादा हो सकती है।

अब फटे और मैले नोटों की परेशानी से मिलेगी निजात

अक्सर एटीएम या बाजार से ऐसे नोट मिल जाते हैं जो फटे हुए या बहुत ज्यादा गंदे होते हैं। ऐसे नोटों को वापस लेना और नष्ट करना आरबीआई के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।

केवित्त वर्ष 2025 में करीब 23.8 अरब नोट चलन से बाहर किए गए। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 12.3 फीसदी ज्यादा था। इनमें सबसे ज्यादा 500 रुपये और 100 रुपये के नोट शामिल रहे।

अगर पॉलिमर नोट आते हैं तो उनकी लाइफ ज्यादा होने के कारण बार-बार नोट बदलने की जरूरत कम होगी। इससे बैंकिंग सिस्टम पर नोटों की छपाई का अतिरिक्त दबाव भी कम होगा।

छोटे नोटों के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है प्रयोग

अपने देश में सबसे ज्यादा चलन में रहने वाली करेंसी की बात करें तो 10 और 20 रुपये जैसे छोटे नोट सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं। यही वजह है कि ये जल्दी खराब भी हो जाते हैं। आरबीआई लंबे समय से इन छोटे नोटों को ज्यादा टिकाऊ बनाने के विकल्प तलाश रहा है। सरकार ने साल 2012 में पांच शहरों में 10 रुपये के करीब एक अरब पॉलिमर नोटों का ट्रायल भी किया था। हालांकि उस समय तकनीकी दिक्कतों और मशीनों की सीमाओं के कारण प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया। अब हालात बदल चुके हैं। बैंकिंग सिस्टम और एटीएम तकनीक पहले से कहीं ज्यादा आधुनिक हो चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, नई मशीनें आसानी से पॉलिमर नोटों को पहचान सकती हैं।

दुनिया के कई देशों में पहले से चल रहे हैं प्लास्टिक नोट

भारत इस मामले में अकेला नहीं होगा। दुनिया के करीब 60 देश पहले से पॉलिमर नोटों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने सबसे पहले 1988 में प्लास्टिक नोट शुरू किए थे। इसके बाद कनाडा, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों ने भी इन्हें अपनाया। कनाडा में तो अब लगभग पूरी करेंसी पॉलिमर बेस्ड है। इन देशों का अनुभव बताता है कि लंबे समय में प्लास्टिक नोट ज्यादा किफायती साबित होते हैं क्योंकि इन्हें बार-बार छापने की जरूरत नहीं पड़ती।

क्या बदल जाएगी भारत में नकदी की तस्वीर?

भारत में फिलहाल चलन में कुल मुद्रा 42.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। 15 मई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, यह पिछले साल की तुलना में 11.5 फीसदी ज्यादा है। यानी डिजिटल इंडिया के दौर में भी नकदी की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में पॉलिमर नोट लागू होते हैं तो यह सिर्फ नोट बदलने का फैसला पूरे कैश मैनेजमेंट सिस्टम में बड़ा बदलाव माना जाएगा।इस बारे में आरबीआई ने अभी तक आधिकारिक तौर पर लॉन्च की तारीख घोषित नहीं की है। लेकिन उम्मीद कि जा रही है कि भारत जल्द ही पॉलिमर नोट लागू कर नए दौर की करेंसी को चलन में शामिल करेगा। यानी अब आने वाले समय में लोगों की जेब में ऐसे नोट हो सकते हैं जो न जल्दी फटेंगे, न गंदे होंगे और शायद नकली भी कम बन पाएंगे।

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