CJP की आधी कोर टीम का AAP कनेक्शन, 12 में 6 चेहरे पहले AAP से जुड़े; क्या महज संयोग है?

CJP की 12 सदस्यीय कोर टीम में 6 चेहरे पहले AAP से जुड़े रहे हैं। जानिए अभिजीत दीपके समेत CJP नेताओं का AAP कनेक्शन और इस राजनीतिक ओवरलैप का क्या मतलब है।

Update:2026-08-13 20:15 IST

CJP AAP connection: खुद को चुनावी राजनीति से दूर रखने वाला Cockroach Janata Party (CJP) इन दिनों एक नए सवाल के घेरे में है। CJP की 12 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची सामने आने के बाद संगठन और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच पुराने रिश्तों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, CJP की कोर टीम के कम से कम छह सदस्य ऐसे हैं, जिनका अतीत में AAP से सीधा संबंध रहा है या उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी का समर्थन किया है।

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके खुद 2020 में AAP की सोशल मीडिया टीम का हिस्सा रह चुके हैं। दीपके का कहना है कि वह AAP के साथ काम कर चुके हैं, लेकिन अब उनका पार्टी से कोई संबंध नहीं है। CJP ने इसी साल मई में अपनी शुरुआत की थी और इसके बाद छात्र, बेरोजगारी और शिक्षा जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन खड़ा किया।

दीपके से लेकर सौरव दास तक, कौन-कौन AAP से जुड़ा रहा?

CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल छह नामों का AAP से पुराना जुड़ाव सामने आया है। इनमें सबसे प्रमुख नाम खुद अभिजीत दीपके का है।

अभिजीत दीपके: AAP की सोशल मीडिया टीम से CJP तक

दीपके 2020 में AAP की सोशल मीडिया टीम से जुड़े थे। इसी दौरान उन्होंने राजनीतिक संदेशों को मीम, हास्य और व्यंग्य के जरिए लोगों तक पहुंचाने का अनुभव हासिल किया। बाद में वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए, लेकिन भारतीय राजनीति से जुड़े रहे।

CJP के गठन के बाद उनकी पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमि फिर चर्चा में आई। खास बात यह भी रही कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल CJP के जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान वहां पहुंचे थे और दीपके से गर्मजोशी से मिले थे। रिपोर्ट के अनुसार, AAP से जुड़े लोगों ने आंदोलन को पर्दे के पीछे स्वयंसेवकों, भोजन और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के जरिए मदद मिलने की बात भी कही।

हालांकि, CJP खुद को किसी राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं बताता और दीपके भी AAP से मौजूदा संबंध से इनकार करते हैं।

अशुतोष रांका: AAP टोपी में दिखने से लेकर CJP तक

CJP के सह-संयोजक अशुतोष रांका राजस्थान में AAP के स्वयंसेवक रह चुके हैं। उन्होंने पार्टी के समर्थन में लेख लिखे और टीवी बहसों में AAP की टोपी पहनकर हिस्सा लिया।

रांका ने यह जरूर स्पष्ट किया कि वह AAP के आधिकारिक प्रवक्ता नहीं थे। उनका कहना है कि वह पार्टी के लिए स्वयंसेवक के तौर पर काम करते थे और बाद में पार्टी को बता दिया था कि अब वह उससे जुड़े नहीं हैं।

दिलचस्प बात यह है कि CJP में आने से पहले भी रांका AAP से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से लिखते रहे हैं।

अजिंक्य शिंदे: सोशल मीडिया पर आज भी दिखता है पुराना AAP परिचय

CJP के संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे की नियुक्ति भी सवालों के घेरे में आई। उनके पुराने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर उन्हें AAP Youth Wing, महाराष्ट्र के पूर्व संयोजक और गोवा में AAP के सह-प्रभारी के रूप में बताया गया था।

हालांकि उनका Instagram अकाउंट अब उपलब्ध नहीं है और Facebook पेज भी डीएक्टिवेट किया जा चुका है। BJP नेता अमित मालवीय ने भी शिंदे की नियुक्ति पर निशाना साधते हुए उनकी अरविंद केजरीवाल के साथ तस्वीर साझा की थी।

विजय रेड्डी मलांगी: AAP के मंच से CJP की मीडिया टीम तक

CJP के मीडिया प्रमुख और दक्षिण क्षेत्र के प्रभारी विजय रेड्डी मलांगी का नाम भी इस सूची में है। नवंबर 2025 के एक स्थानीय YouTube इंटरव्यू में उन्हें तेलंगाना AAP के नेता और प्रवक्ता के रूप में पेश किया गया था।

उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर AAP के समर्थन में कई पोस्ट भी पाए गए। कुछ तस्वीरों में वह AAP का पटका और ‘अन्ना टोपी’ पहने दिखाई दिए।

मलांगी ने AAP के उन सांसदों की भी आलोचना की थी, जिन्होंने बाद में BJP का दामन थामा। हालांकि, CJP में आने के बाद अपनी मौजूदा राजनीतिक संबद्धता पर उन्होंने प्रतिक्रिया नहीं दी।

अंकित भारद्वाज: 2014 से AAP के साथ रहने का दावा

CJP की पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालने वाले अंकित भारद्वाज का नाम भी AAP के पुराने कार्यकर्ताओं में सामने आता है।

2017 की एक रिपोर्ट में उन्हें 2014 से AAP स्वयंसेवक बताया गया था। उस दौर में उन्होंने अपनी चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई/काम को पीछे रखकर पार्टी के लिए काम करने की बात कही थी।

AAP के तत्कालीन नेता कपिल मिश्रा से जुड़े विवाद में भी भारद्वाज का नाम सामने आया था। हालांकि भारद्वाज ने पुलिस के सामने मिश्रा पर हमला करने के आरोप से इनकार किया था और कहा था कि बहस के दौरान वह सिर्फ हाथों से इशारे कर रहे थे।

सौरव दास: सोशल मीडिया पर AAP नेताओं के समर्थक

CJP के सह-संयोजक सौरव दास भी AAP के प्रति अपने पुराने सोशल मीडिया रुझान के कारण चर्चा में हैं। द प्रिंट के मुताबिक, दास ने कई बार AAP और उसके नेताओं के समर्थन में पोस्ट और कंटेंट शेयर किया था।

इन गतिविधियों के आधार पर उनके राजनीतिक झुकाव को लेकर सवाल उठे हैं, हालांकि CJP में उनकी मौजूदा भूमिका को AAP की आधिकारिक गतिविधि के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

AAP ने क्या कहा?

AAP प्रवक्ता संजय झा ने CJP के कुछ सदस्यों के पुराने AAP संबंधों को स्वीकार किया है, लेकिन कहा कि अब पार्टी और इन लोगों के बीच कोई संपर्क नहीं है।

झा के मुताबिक, ये लोग कभी AAP के साथ थे, लेकिन बाद में अपने-अपने रास्ते चले गए—किसी ने नौकरी की तरफ रुख किया तो किसी ने पढ़ाई का रास्ता चुना।

यानी AAP का साफ संदेश है कि पुराना संबंध और मौजूदा राजनीतिक जुड़ाव दो अलग बातें हैं।

तो फिर CJP और AAP के बीच समानता क्यों दिख रही है?

यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक चंद्रचूड़ सिंह ने द प्रिंट से बातचीत में कहा कि CJP और AAP के बीच इस तरह का ओवरलैप बहुत असामान्य नहीं है। उनके मुताबिक दोनों के राजनीतिक तौर-तरीकों में आंदोलन, सड़क की राजनीति और जनता से सीधे संवाद जैसे तत्व दिखाई देते हैं।

दीपके का खुद AAP से जुड़ा अतीत भी इस कनेक्शन को और मजबूत करता है। ऐसे में यह संभव है कि AAP से कभी जुड़े रहे कुछ लोग CJP में अपनी सक्रियता के लिए नया मंच देख रहे हों।

लेकिन राजनीतिक विश्लेषक का यह भी मानना है कि CJP को सीधे AAP की परियोजना या विस्तार कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी।

CJP के बाकी चेहरे कौन हैं?

CJP की 12 सदस्यीय कोर टीम में बाकी सदस्य अलग-अलग पेशेवर और सामाजिक पृष्ठभूमि से आते हैं।

दीपक बालियान संगठन के सह-प्रभारी और उत्तर क्षेत्र के प्रमुख हैं तथा किसान और कृषि आंदोलनों से जुड़े रहे हैं।

आफरीन नवाज राष्ट्रीय सचिव हैं और बेंगलुरु की उद्यमी हैं, जिन्होंने युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर काम करने के लिए कॉरपोरेट क्षेत्र छोड़ा।

रत्ना सिंह कानूनी मामलों की जिम्मेदारी संभालती हैं और लखनऊ की वकील हैं।

वैष्णवी गौड़ रिसर्च और पॉलिसी की जिम्मेदारी देखती हैं और CJP की प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल हैं।

रोहन देशपांडे टेक्नोलॉजी टीम संभालते हैं और मुंबई से जुड़े हैं। उनका होटल मैनेजमेंट का बैकग्राउंड है और वे राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर लिखते भी रहे हैं।

क्या CJP आगे चलकर राजनीतिक पार्टी बनेगा?

फिलहाल CJP का आधिकारिक रुख यही है कि वह एक दबाव समूह और जन आंदोलन है और चुनावी राजनीति में उतरने की उसकी योजना नहीं है।

लेकिन संगठन की बढ़ती लोकप्रियता, देशभर में प्रदर्शन, सोशल मीडिया की मजबूत मौजूदगी और अब सामने आया AAP कनेक्शन एक बड़ा राजनीतिक सवाल जरूर खड़ा करता है, क्या CJP सिर्फ व्यवस्था के खिलाफ युवाओं की आवाज है या आने वाले समय में यह खुद एक राजनीतिक ताकत बनने की दिशा में बढ़ सकता है?

फिलहाल इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। इतना जरूर है कि CJP की कोर टीम में AAP से जुड़े रहे छह चेहरों ने संगठन की राजनीतिक स्वतंत्रता पर बहस को नई हवा दे दी है। वहीं AAP का कहना है कि ये सभी पुराने संबंध हैं और अब इन लोगों का पार्टी से कोई संपर्क नहीं है।

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