Justice Swarna Kanta: जस्टिस स्वर्ण कांता का आर-पार का ऐलान! कोर्ट के अपमान पर छिड़ा महासंग्राम, केजरीवाल की बढ़ेगी मुसीबत?

Justice Swarna Kanta Sharma: दिल्ली हाई कोर्ट में बड़ा बवाल! जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कोर्ट और अपनी गरिमा के अपमान पर सख्त रुख अपनाते हुए अवमानना कार्रवाई के संकेत दिए। क्या इससे अरविंद केजरीवाल और AAP नेताओं की मुश्किलें और बढ़ेंगी?

Update:2026-05-14 15:53 IST

Justice Swarna Kanta Sharma: दिल्ली हाई कोर्ट के गलियारों में गुरुवार को उस वक्त सन्नाटा पसर गया, जब कथित शराब घोटाले की सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुली अदालत में बेहद सख्त तेवर दिखाए। अदालत के भीतर का माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब जस्टिस शर्मा ने घोषणा की कि वे अपनी और न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ की गई 'अपमानजनक' टिप्पणियों पर अब और खामोश नहीं रहेंगी। उन्होंने कुछ प्रतिवादियों के खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही शुरू करने का बड़ा ऐलान कर दिया है। यह मामला सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि न्यायपालिका और राजनीतिक आरोपों के बीच आर-पार की जंग का रूप लेता नजर आ रहा है।

सोशल मीडिया पर 'चरित्र हनन' से आहत हुई अदालत

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने गुरुवार को बेहद भावुक और सख्त लहजे में कहा कि उनके संज्ञान में ऐसी सामग्री आई है जो न केवल उनके व्यक्तिगत चरित्र पर हमला करती है, बल्कि इस प्रतिष्ठित अदालत की साख को भी धूमिल करने का प्रयास कर रही है। दरअसल, उन्हें आज अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक का पक्ष रखने के लिए 'न्याय मित्रों' (Amicus Curiae) के नामों का ऐलान करना था। लेकिन सुनवाई के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस तरह की 'निंदनीय' और 'दुर्भावनापूर्ण' सामग्री उनके खिलाफ पोस्ट की जा रही है, उसने उन्हें यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। जस्टिस शर्मा ने दो टूक कहा कि वे चुप रहकर न्याय की बलि नहीं चढ़ने देंगी।

केजरीवाल और 'AAP' नेताओं के साथ टकराव की जड़

इस पूरे विवाद की जड़ें कुछ महीने पीछे जाती हैं, जब कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के पास पहुंचे। फरवरी में ट्रायल कोर्ट द्वारा 12 आरोपियों को आरोप मुक्त किए जाने के खिलाफ सीबीआई ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद से ही अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने जस्टिस शर्मा की बेंच का बहिष्कार करना शुरू कर दिया। केजरीवाल ने मांग की थी कि उनका केस किसी दूसरी बेंच को ट्रांसफर किया जाए। उन्होंने एक 'ओपन लेटर' लिखकर जज की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे और आरएसएस से जुड़े वकीलों के कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति को 'हितों का टकराव' करार दिया था।

शाम 5 बजे के आदेश पर टिकीं सबकी निगाहें

अदालत में जस्टिस शर्मा ने साफ कर दिया कि उनका आदेश तैयार है और वे शाम 5 बजे इस पर विस्तृत फैसला सुनाएंगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के बाद ही वे तय करेंगी कि इस हाई-प्रोफाइल केस का भविष्य क्या होगा और क्या वे इस मामले की सुनवाई जारी रखेंगी। जानकारों का मानना है कि अगर अदालत ने इसे 'आपराधिक अवमानना' माना, तो सोशल मीडिया पर जज के खिलाफ अभियान चलाने वाले नेताओं और प्रतिवादियों के लिए जेल जाने की नौबत भी आ सकती है।

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