Ketan Murder Case के बाद उठी राष्ट्रीय पुरुष आयोग की मांग, इस BJP सांसद ने उठाया मुद्दा

Ketan Murder Case: केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद राष्ट्रीय पुरुष आयोग की मांग तेज हो गई है। भाजपा सांसद अशोक कुमार मित्तल ने कहा कि पुरुष भी पीड़ित हो सकते हैं और उन्हें कानूनी सुरक्षा, संस्थागत मदद तथा न्याय दिलाने के लिए नेशनल कमीशन फॉर मेन की जरूरत है। जानिए केतन अग्रवाल केस और प्राइवेट मेंबर बिल से जुड़ी पूरी कहानी।

Update:2026-07-04 16:20 IST

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Ketan Murder Case: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने समाज में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। मंगेतर सिया गोयल की कथित बेवफाई और हत्या की खौफनाक साजिश सामने आने के बाद अब पुरुषों के अधिकारों और उनकी कानूनी सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) (BJP) के राज्यसभा सांसद और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के संस्थापक अशोक कुमार मित्तल ने इस घटना को बेहद विचलित करने वाला बताते हुए देश में राष्ट्रीय पुरुष आयोग (National Commission for Men) बनाने की मांग उठाई है।

इस मामले में 26 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के आरोप में उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन को गिरफ्तार किया गया है। इस घटना के सामने आने के बाद पुरुषों के लिए अलग संस्थागत सहायता और कानूनी संरक्षण की जरूरत पर बहस शुरू हो गई है।

सांसद ने साझा किया पुराना प्राइवेट मेंबर बिल

राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक वीडियो साझा किया। यह वीडियो दिसंबर 2025 में हुई राज्यसभा की कार्यवाही का है, जब उन्होंने पुरुष आयोग के गठन को लेकर संसद में एक प्राइवेट मेंबर बिल (Private Member Bill) पेश किया था।

अशोक कुमार मित्तल ने एक्स पर लिखा कि पुणे का केतन अग्रवाल मामला बेहद परेशान करने वाला है। उन्होंने कहा कि केतन अग्रवाल और उनके परिवार को निष्पक्ष, व्यापक और बिना किसी भेदभाव के जांच मिलनी चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें न्याय मिलना चाहिए।

सांसद ने कहा कि उन्होंने संसद में नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल (National Commission for Men Bill) पेश किया था। उनका मानना है कि हर पीड़ित को न्याय, सहायता और कानून के तहत समान सुरक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केतन का मामला यह याद दिलाता है कि पुरुष भी पीड़ित हो सकते हैं और उन्हें भी संस्थागत मदद, कानूनी सुरक्षा तथा ऐसा मंच मिलना चाहिए जहां उनकी आवाज सुनी जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय लिंग के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी के लिए समान होना चाहिए।

आम आदमी पार्टी से भाजपा तक का सफर

अशोक कुमार मित्तल पंजाब से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। जब उन्होंने राष्ट्रीय पुरुष आयोग से जुड़ा यह बिल पेश किया था, उस समय वह आम आदमी पार्टी (AAP) का हिस्सा थे। हालांकि इसी साल अप्रैल में उन्होंने राघव चड्ढा के नेतृत्व वाले सात सांसदों के समूह के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का दावा किया था।

क्या है प्राइवेट मेंबर बिल का इतिहास

गौरतलब हो कि संसद में किसी भी प्राइवेट मेंबर बिल के कानून बनने की संभावना बेहद कम मानी जाती है। ऐसे बिल बहुत कम मामलों में मतदान की प्रक्रिया तक पहुंच पाते हैं।

अगर इतिहास पर नजर डालें तो आजादी के बाद से अब तक केवल 14 प्राइवेट मेंबर बिल ही कानून का रूप ले सके हैं। वहीं वर्ष 1970 के बाद से कोई भी प्राइवेट मेंबर बिल संसद के दोनों सदनों से पारित नहीं हो पाया है। यही वजह है कि इस तरह के विधेयकों को पारित कराना काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

केतन हत्याकांड में अब तक क्या हुआ?

आपको बताते चलें कि पुणे के इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में पुलिस और अदालत की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। 26 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के आरोप में उनकी 20 वर्षीय मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी को मुख्य आरोपी बनाया गया है।

तीन जुलाई को पुणे की एक अदालत ने दोनों आरोपियों को 16 जुलाई तक 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया। इस दौरान लोनावला ग्रामीण पुलिस ने दोनों आरोपियों की पुलिस रिमांड बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इस मांग को खारिज कर दिया।

पुलिस दोनों आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट (Polygraph Test) यानी लाई डिटेक्टर टेस्ट (Lie Detector Test) भी कराना चाहती थी, लेकिन दोनों आरोपियों द्वारा आधिकारिक रूप से इनकार किए जाने के बाद अदालत ने इस अर्जी को भी नामंजूर कर दिया।

केतन अग्रवाल हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसने पुरुषों के अधिकार, कानूनी संरक्षण और राष्ट्रीय पुरुष आयोग के गठन जैसी बहस को भी देश के सामने ला खड़ा किया है। आने वाले समय में यह मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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