मोदी की नई कैबिनेट में 'लॉयल्टी-परफॉर्मेंस' फार्मूला! रिटायर्ड अफसरों का दिखेगा दबदबा, लिस्ट में इन दिग्गजों का नाम

Modi New Cabinet: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी कैबिनेट विस्तार में शक्तिकांत दास और तपन डेका जैसे दिग्गज नौकरशाहों को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की अटकलें हैं। जानिए सरकार का 'लॉयल्टी और परफॉर्मेंस' फॉर्मूला।

Update:2026-07-04 16:26 IST

Modi New Cabinet: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी कैबिनेट विस्तार को लेकर देश के सियासी गलियारों में हलचल बहुत तेज हो चुकी है. इस बार मंत्रिमंडल में होने जा रहे बड़े बदलावों में राजनीति से जुड़े चेहरों के बजाय उन अनुभवी और रिटायर्ड नौकरशाहों को अहम जिम्मेदारियां सौंपने की अटकलें लगाई जा रही हैं, जिन्होंने देश की प्रशासनिक व्यवस्था में लोहा मनवाया है. सूत्रों की मानें तो पीएम मोदी के काम करने का एक बेहद खास फॉर्मूला है जिसे 'लॉयल्टी और परफॉर्मेंस' कहा जाता है. इस कड़े पैमाने पर जो भी आला अधिकारी पूरी तरह खरा उतरता है, उसे सरकार आसानी से विदा नहीं होने देती. इसी रणनीति के तहत इस बार मंत्रियों की लिस्ट में कुछ ऐसे चौंकाने वाले बड़े नाम शामिल हो सकते हैं, जो अब तक पर्दे के पीछे रहकर देश की नीतियां तैयार करते रहे हैं.

इन बड़े चेहरों को मिल सकती है बड़ी कुर्सी

फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं के बाजार में देश के दो सबसे बड़े और कद्दावर अधिकारियों के नाम शीर्ष पर चल रहे हैं. इनमें पहला नाम रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास का है और दूसरा नाम खुफिया तंत्र के माहिर तपन डेका का है. सूत्रों का कहना है कि इन दोनों दिग्गजों के अलावा भी कई ऐसे जांबाज पूर्व अधिकारी हैं, जिन्हें इस फेरबदल के बाद बहुत महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार सौंपा जा सकता है. हालांकि पुरानी सरकारों में भी कभी-कभार अफसरों को मंत्री बनाने के प्रयोग किए जाते थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौर में अब यह एक मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था बन चुका है. आज के समय में बेहतरीन काम करने वाले रिटायर्ड अफसरों को सेवा विस्तार देना बेहद आम बात हो चुकी है और वे सरकार को चलाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं.

मोदी सरकार को मिलता है जबरदस्त फायदा

देखा जाए तो इन रिटायर्ड महारथियों को सीधे शासन की कमान सौंपने के पीछे कई बड़ी वजहें हैं. इन अधिकारियों के पास दशकों का लंबा प्रशासनिक अनुभव होता है और वे देश की बेहद जटिल नीतियों को बहुत बारीकी से समझते हैं. मुश्किल समय में देश को संकट से बाहर निकालने के लिए इनके पास एक परखा हुआ नेतृत्व होता है. मोदी सरकार में आज हर एक फाइल के क्लियरेंस, प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने, सरकारी पैसों के सही मैनेजमेंट और आम जनता की शिकायतों के निपटारे जैसे पैमानों पर अधिकारियों को बकायदा स्कोर कार्ड दिए जाते हैं. इसी वजह से जो नतीजा देता है, वही टिकता है. हालांकि इस व्यवस्था की कुछ आलोचना भी होती है क्योंकि कुछ आलोचकों का मानना है कि पुराने अफसरों को बार-बार सेवा विस्तार देने से नए और युवा अधिकारियों के प्रमोशन के रास्ते बंद हो जाते हैं.

पूरी दुनिया में हिट है यह जादुई मॉडल

नौकरशाहों को देश चलाने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपने का यह नया ट्रेंड सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई ताकतवर देशों में भी यह प्रयोग लंबे समय से बेहद सफल रहा है. उदाहरण के तौर पर सिंगापुर में बड़े सरकारी सचिव रिटायर होने के बाद देश की मुख्य कंपनियों और नीति आयोगों को संभालते हैं. वहीं अमेरिका में जेम्स मैटिस और लॉयड ऑस्टिन जैसे रिटायर्ड जनरलों को रक्षा मंत्री की कुर्सी दी गई, जबकि जेनेट येलेन को वित्त मंत्री और जेरोम पॉवेल को केंद्रीय बैंक की जिम्मेदारी सौंपी गई. इसके अलावा ब्रिटेन में भी वरिष्ठ सिविल सेवकों को हाउस ऑफ लॉर्ड्स में बड़ी नियुक्तियां दी जाती हैं. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों खुद भी एक उच्च सिविल सेवा के बैकग्राउंड से ही आते हैं, जबकि जापान में तो अमकुदरी नाम की एक पुरानी परंपरा है जिसके तहत रिटायर्ड नौकरशाह बड़ी निजी कंपनियों में शीर्ष नेतृत्व संभालते हैं.

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