Mainpuri News: मैनपुरी में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, किसान ने लगाया अवैध कब्जे और मारपीट का आरोप
Mainpuri Land Dispute: Uttar Pradesh के Mainpuri में जमीन विवाद ने तूल पकड़ा। किसान रामबरन ने ग्राम रेपुरा में कृषि भूमि पर अवैध कब्जे और मारपीट का आरोप लगाते हुए प्रशासन से न्याय की मांग की।
Mainpuri Land Dispute: मैनपुरी जनपद के थाना कुर्रा क्षेत्र के ग्राम रेपुरा में जमीन विवाद का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गांव निवासी किसान रामबरन ने कुछ लोगों पर उनकी कृषि भूमि पर अवैध कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित किसान ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। किसान का कहना है कि विवादित भूमि ही उनके परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र सहारा है और यदि इस पर कब्जा हो गया तो परिवार के सामने आर्थिक संकट और भूखमरी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। रामबरन के अनुसार गाटा संख्या 308 स्थित कृषि भूमि उनके परिवार की पैतृक संपत्ति है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग बिना किसी वैध दस्तावेज के जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। पीड़ित ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है।
पीड़ित किसान ने बताया कि उनके पिता रामप्रकाश ने वर्ष 2004 में गाटा संख्या 2194 का लगभग 0.324 हेक्टेयर हिस्सा रणवीर सिंह पुत्र रामसेवक को बेचा था और उसी समय संबंधित भूमि का कब्जा भी दे दिया गया था। किसान का आरोप है कि खरीदार पक्ष अब गाटा संख्या 308 पर नजर गड़ाए हुए है और उसी भूमि पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है, जबकि उस भूमि से संबंधित कोई वैध बैनामा या दस्तावेज उनके पास नहीं है।
रामबरन ने दावा किया कि यदि विपक्षी पक्ष के पास गाटा संख्या 308 से संबंधित कोई वैध दस्तावेज है तो वह जमीन छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। वहीं पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार बाहरी लोगों को बुलाकर उनके साथ मारपीट की गई। इस मामले में थाना कुर्रा में 14 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की बात भी सामने आई है।
परिवार का आरोप है कि जब भी लेखपाल जांच के लिए मौके पर पहुंचते हैं, उन पर दबाव बनाकर गलत रिपोर्ट लगवा दी जाती है। किसान रामबरन का कहना है कि वह पिछले दो वर्षों से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक कोई निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ित परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे आमरण अनशन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल पूरे मामले में जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।