Work From Home: ‘वर्क फ्रॉम होम’ की वापसी, मोदी की अपील के बाद नीति आयोग की पहल, कई देश इसी राह पर
Work From Home Return: विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का यह मात्र कुछ दिनों का अस्थाई बदलाव न हो कर पूरे वर्क कल्चर में बड़े बदलाव लाएगा।
Work From Home Return After Modi Appeal
Work From Home Return: कोरोना काल बीते 6 साल हो गए लेकिन अब दुनिया 'युद्ध काल' में फंसी है जहां तेल का संकट एक महामारी की तरह दिखने लगा है। इस महामारी से पार पाने के लिए वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग का दौर लौटता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हाल ही में ईंधन व विदेशी मुद्रा बचत और अनावश्यक खर्च कम करने की अपील के बाद अब सरकारी संस्थानों में भी इसका असर दिखने लगा है। सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग ने आगे बढ़ते हुए अपने सभी बड़े कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और सेमिनारों को स्थगित कर उन्हें ऑनलाइन आयोजित करने का फैसला किया है।
रिपोर्टों के अनुसार नीति आयोग ने अपने विभिन्न विभागों और इकाइयों को निर्देश दिया है कि फिलहाल सभी बड़े इन-पर्सन कार्यक्रम टाल दिए जाएं और जहां संभव हो, वर्चुअल मीटिंग्स और डिजिटल कॉन्फ्रेंस का उपयोग किया जाए।
कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन में वर्क फ्रॉम होम मॉडल तेजी से लोकप्रिय हुआ था। आईटी, मीडिया, शिक्षा, बैंकिंग और कॉरपोरेट सेक्टर ने बड़े पैमाने पर डिजिटल कार्य प्रणाली अपनाई थी। महामारी कम होने के बाद अधिकांश कंपनियां फिर कार्यालय आधारित व्यवस्था की ओर लौट आईं, लेकिन अब ईरान युद्ध ने सरकार को फिर से उसी मॉडल की याद दिला दी है।
वर्क कल्चर बदलेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का यह मात्र कुछ दिनों का अस्थाई बदलाव न हो कर पूरे वर्क कल्चर में बड़े बदलाव लाएगा। नीति आयोग के फैसले को सिर्फ प्रशासनिक कदम नहीं माना जा रहा। इसे एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि आने वाले समय में सरकारी विभाग भी इसी तरह के कदम स्थाई रूप से उठा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल के आये दिनों के खेल से निपटने के लिए फुल टाइम आफिस मॉडल की बजाय हाइब्रिड और रिमोट वर्क स्थायी रूप से मजबूत हो सकता है।
बदल जाएगी शहरों की अर्थव्यवस्था?
हालांकि रिमोट और वर्क फ्रॉम होम बढ़ने से इसका प्रभाव दूर तक जाएगा। सबसे बड़ा असर रियल एस्टेट पर होगा क्योंकि बड़े बड़े आफिस स्पेस की डिमांड तेजी से गिरेगी। लोग घर से कम करेंगे तो अपना शहर छोड़ कर दूसरे शहर में रहनी की मजबूरी खत्म होगी जिससे रेसिडेंशियल कीमतें गिरेंगी। हो सकता है कि भारत अब पूरी तरह पुराने वर्क फ्रॉम आफिस मॉडल में शायद कभी वापस न जाए। महामारी ने यह साबित कर दिया कि रिमोट लोकेशन से काम सम्भव है।
दुनिया में भी लौट रहा है रिमोट वर्क मॉडल
वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग पर जोर ग्लोबल ट्रेंड का हिस्सा भी माना जा रहा है। तेल - गैस संकट, जलवायु परिवर्तन, महंगाई और ट्रैफिक जैसी चुनौतियों के चलते कई देशों ने पिछले कुछ सालों में रिमोट और हाइब्रिड वर्क मॉडल को बढ़ावा दिया है।
अमेरिका में कोरोना के बाद बड़ी टेक कंपनियों ने स्थायी हाइब्रिड मॉडल अपनाया। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, अमेज़न, आईबीएम, ओरेकल, कैपजेमनी जैसे टॉप कंपनियों ने कर्मचारियों को महीने में 60 फीसदी दिन तक घर से काम करने की अनुमति दी हुई है।
2022 के बाद अमेरिका में पेट्रोल कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि के दौरान कई राज्यों ने सरकारी कर्मचारियों के लिए रिमोट वर्क को बढ़ावा दिया था। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जर्मनी ने सरकारी दफ्तरों में हीटिंग कम करने, डिजिटल बैठकों को बढ़ावा देने और कार्यालयों में ऊर्जा उपयोग घटाने के निर्देश दिए थे। यूके और फ्रांस में कंपनियों को हाइब्रिड वर्क अपनाने के लिए कहा गया था। यूरोपियन यूनियन ने भी ऐसे कदम उठाए। पश्चिम एशिया के कई देशों ने भी तेल संकट को देखते हुए रिमोट वर्क मॉडल को लागू किया हुआ है।