Meta Child Health: मेटा पर बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने के आरोप, भारी जुर्माने का खतरा

Meta Child Health: मेटा पर बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने और प्राइवेसी कानूनों के उल्लंघन के आरोप, अमेरिकी अदालत में सुनवाई जारी।

Update:2026-08-20 16:13 IST

Meta Child Health(Photo-Social Media)

Meta Child Health: फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा के खिलाफ अमेरिका में बच्चों और युवाओं की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने तथा प्राइवेसी कानूनों के उल्लंघन के आरोपों को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। अमेरिका के 29 राज्यों ने कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। आरोप है कि मेटा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इस तरह डिजाइन किया, जिससे बच्चों और किशोरों में इनकी आदत बढ़े और उनका स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ता जाए। इस मामले की सुनवाई सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही के लिहाज से अहम मानी जा रही है। यदि अदालत राज्यों के आरोपों को सही मानती है, तो मेटा को अपने प्लेटफॉर्म्स के कई फीचर्स और एल्गोरिदम में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।

मेटा पर क्या हैं मुख्य आरोप?

राज्यों की ओर से दायर मुकदमे में फेसबुक और इंस्टाग्राम के कई फीचर्स पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन फीचर्स का इस्तेमाल यूजर्स का ध्यान लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए किया जाता है। लाइक काउंट को लेकर आरोप है कि किशोर लाइक्स की संख्या के आधार पर अपनी लोकप्रियता की तुलना दूसरे लोगों से करते हैं। इससे सामाजिक दबाव, तनाव और हीनभावना बढ़ सकती है। इसी तरह इनफिनिट स्क्रॉलिंग को भी विवाद का हिस्सा बनाया गया है। फीड लगातार चलते रहने के कारण यूजर्स को यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि वे कितनी देर से ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं।

ऑटो-प्ले और पुश नोटिफिकेशन पर भी सवाल उठाए गए हैं। राज्यों का आरोप है कि ये फीचर्स यूजर्स का ध्यान बार-बार ऐप की ओर खींचते हैं और स्क्रीन टाइम बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा ब्यूटी फिल्टर्स और स्टोरीज को लेकर भी चिंता जताई गई है। आरोप है कि इनसे किशोरों में अपने रूप-रंग को लेकर अवास्तविक उम्मीदें और असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है।

बच्चों के डेटा और पैरेंटल कंसेंट का मामला

मामले का दूसरा बड़ा पहलू बच्चों की ऑनलाइन प्राइवेसी से जुड़ा है। अमेरिकी कानून के तहत 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का व्यक्तिगत डेटा एकत्र करने के लिए माता-पिता की सहमति से जुड़े कड़े नियम लागू होते हैं। राज्यों का आरोप है कि मेटा की डेटा कलेक्शन और पैरेंटल कंसेंट व्यवस्था बच्चों की पर्याप्त सुरक्षा करने में विफल रही। मुकदमे में कंपनी पर बच्चों के व्यक्तिगत डेटा के गलत तरीके से संग्रह और व्यावसायिक इस्तेमाल के आरोप भी लगाए गए हैं।

मेटा को कितने बड़े जुर्माने का खतरा?

मामले में संभावित वित्तीय देनदारी को लेकर करीब 95 लाख करोड़ रुपये तक की रकम का दावा सामने आया है। हालांकि, यह संभावित राशि है और वास्तविक जुर्माना या क्षतिपूर्ति अदालत के फैसले, लागू कानूनों और राज्यों के दावों पर निर्भर करेगी। यदि राज्य मुकदमे में सफल होते हैं, तो मेटा को केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं उठाना पड़ सकता, बल्कि फेसबुक और इंस्टाग्राम के डिजाइन, फीचर्स और एल्गोरिदम में भी व्यापक बदलाव करने पड़ सकते हैं।

प्लेटफॉर्म में किन बदलावों की मांग?

याचिकाकर्ताओं की ओर से नाबालिग यूजर्स की सुरक्षा के लिए कई बदलावों की मांग की गई है। इनमें बच्चों के लिए लाइक काउंट और इनफिनिट स्क्रॉलिंग को सीमित या हटाना, वीडियो और रील्स के ऑटो-प्ले को बंद करना तथा माता-पिता की मजबूत डिजिटल पुष्टि जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव डालने वाले रिकमेंडेशन एल्गोरिदम और ब्यूटी फिल्टर्स में बदलाव की भी मांग की गई है।

मेटा ने आरोपों को किया खारिज

मेटा ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि वह युवाओं की सुरक्षा और उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लगातार काम कर रही है। कंपनी ने किशोर यूजर्स के लिए कई सुरक्षा फीचर्स और टूल्स भी विकसित किए हैं। अदालत में चल रहा यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका फैसला केवल मेटा तक सीमित नहीं रह सकता। यदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के डिजाइन और बच्चों की सुरक्षा को लेकर अदालत सख्त दिशा-निर्देश देती है, तो इसका असर अमेरिका के साथ-साथ दुनियाभर में सोशल मीडिया कंपनियों के काम करने के तरीके पर पड़ सकता है। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, ऑनलाइन प्राइवेसी और सोशल मीडिया की लत को लेकर दुनियाभर में बहस बढ़ रही है। ऐसे में मेटा के खिलाफ यह कानूनी लड़ाई टेक कंपनियों की जिम्मेदारी और नाबालिगों की डिजिटल सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

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