NEET Paper Leak: नीट पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, NTA को UPSC जैसा पारदर्शी ढांचा बनाने का आदेश

NEET Paper Leak: NEET-UG मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NTA में स्थायी सुधार और UPSC जैसी मजबूत संस्थागत व्यवस्था पर जोर दिया।

Update:2026-08-20 15:17 IST

NEET Paper Leak(Photo-Social Media)

NEET Paper Leak: NEET-UG पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि देश की महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं का संचालन केवल अस्थायी या तदर्थ व्यवस्थाओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। NTA को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर अधिक स्वायत्त, पारदर्शी, सुरक्षित और संस्थागत रूप से मजबूत बनाया जाना चाहिए।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) समेत विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें सरकार को बताना होगा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित उच्चस्तरीय समितियों की सिफारिशों को लागू करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

परीक्षा व्यवस्था में संस्थागत सुधार पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों को केवल किसी व्यक्ति विशेष की गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लगातार सामने आने वाली समस्याएं पूरे प्रशासनिक और संस्थागत तंत्र की कमियों को दर्शाती हैं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षा व्यवस्था में ऐसे स्थायी सुधार किए जाने चाहिए, जिनका असर किसी अधिकारी के तबादले या सेवानिवृत्ति से प्रभावित न हो। इसके लिए जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था को संस्थागत रूप देने की जरूरत है।

दो समितियों की सिफारिशों पर मांगी जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से परीक्षा सुधारों के लिए गठित दो प्रमुख समितियों की सिफारिशों और उनकी प्रगति की जानकारी मांगी है।

के. राधाकृष्णन समिति

NEET विवाद के बाद इसरो के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने से जुड़े कई सुझाव दिए थे। अदालत ने केंद्र से इन सिफारिशों पर हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।

नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स

अदालत ने परीक्षा प्रक्रिया के तकनीकी डिजिटलीकरण और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने से जुड़े नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स के सुझावों के क्रियान्वयन की स्थिति भी पूछी है।

UPSC मॉडल का किया गया उल्लेख

सुनवाई के दौरान UPSC की परीक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। अदालत के समक्ष UPSC की संस्थागत स्वायत्तता, प्रश्नपत्रों की गोपनीय इन-हाउस प्रिंटिंग और परीक्षा केंद्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने की सुरक्षित व्यवस्था का उल्लेख किया गया। UPSC संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत गठित संवैधानिक संस्था है। इसकी स्वायत्तता और जवाबदेही को परीक्षा व्यवस्था की मजबूती का अहम हिस्सा माना जाता है। प्रश्नपत्रों की छपाई और वितरण को लेकर भी कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। परीक्षा सामग्री की गोपनीयता बनाए रखने के लिए सीमित स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाती है और वितरण प्रक्रिया में प्रशासनिक तथा सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका रहती है।

केंद्र ने बताया- NEET में भी बहुस्तरीय सुरक्षा

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि NEET परीक्षा की व्यवस्था में पहले से ही कई स्तर की सुरक्षा लागू है। सरकार के मुताबिक, प्रश्न बैंक तैयार करने वाले विशेषज्ञों को यह जानकारी नहीं होती कि उनके कौन से प्रश्न अंतिम प्रश्नपत्र में शामिल होंगे। प्रश्नपत्रों की छपाई चुनिंदा सुरक्षित प्रिंटरों के माध्यम से की जाती है और इस प्रक्रिया में CISF सुरक्षा तथा सीसीटीवी निगरानी का इस्तेमाल होता है। प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने वाले वाहनों में GPS ट्रैकिंग की व्यवस्था होने और प्रश्नपत्रों के बॉक्स को सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम में रखने की भी जानकारी अदालत को दी गई। परीक्षा के दिन अधिकृत अधिकारियों और छात्रों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में वीडियोग्राफी के साथ प्रश्नपत्रों की सील खोलने की प्रक्रिया अपनाए जाने की बात भी केंद्र ने कही।

कागजी सुरक्षा से आगे बढ़ने की जरूरत

केंद्र की ओर से सुरक्षा व्यवस्था के बारे में दी गई दलीलों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने जमीनी स्तर पर सामने आई खामियों को गंभीरता से लिया। अदालत का रुख यह रहा कि केवल कागजी सुरक्षा प्रोटोकॉल पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था में स्थायी जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा में लाखों छात्र शामिल होते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर छात्रों के भविष्य और अभिभावकों के भरोसे पर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर परीक्षा सुधारों से जुड़े कदमों की जानकारी देनी होगी। अदालत के निर्देशों का उद्देश्य NTA की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है, ताकि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल कम हों और छात्रों का विश्वास मजबूत हो सके।

Tags:    

Similar News