विधानसभा से अपनी पुलिस तक...वांगचुक ने फिर खोला मोर्चा! गृह मंत्रालय सामने रखी 'नॉन-नेगोशिएबल' मांगे, दिया अल्टीमेटम
Sonam Wangchuk New Demands: लद्दाख में सोनम वांगचुक और LAB-KDA प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्रालय के सामने अपनी 'नॉन-नेगोशिएबल' मांगें रख दी हैं। लेह में आयोजित हुई एक बेहद अहम और निर्णायक बैठक में लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्रालय के आला अधिकारियों से सीधी बातचीत की।
Sonam Wangchuk New Demands: लद्दाख की बर्फानी वादियों में एक बार फिर राजनीतिक गर्माहट अपने चरम पर पहुंच गई है। अपनी मांगें मनवाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे सामाजिक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर सरकार के सामने पूरी ताकत से डट गए हैं। लेह में आयोजित हुई एक बेहद अहम और निर्णायक बैठक में लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्रालय के आला अधिकारियों से सीधी बातचीत की। इस मुलाकात के दौरान वांगचुक और उनके साथियों ने केंद्र सरकार को मांगों का एक ऐसा पुलिंदा थमाया है, जिसे उन्होंने साफ-साफ शब्दों में 'नॉन-नेगोशिएबल' यानी बिना किसी समझौते वाली शर्त करार दिया है।
अहम बैठक में दिग्गजों की मौजूदगी
लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के बैनर तले आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में लद्दाख के तमाम बड़े चेहरे मौजूद रहे। लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान, KDA के सह-अध्यक्ष सज्जाद करगिली, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और LAB के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे ने गृह मंत्रालय के प्रतिनिधियों के सामने क्षेत्र के लोगों की बुलंद आवाज को बेहद मजबूती से रखा। इससे पहले 22 मई को नई दिल्ली में दोनों पक्षों के बीच औपचारिक बातचीत का दौर शुरू हुआ था। याद दिला दें कि जुलाई के महीने में कॉकरोच जनता पार्टी के तहत हुए ऐतिहासिक छात्र आंदोलन में भी सोनम वांगचुक ने मुख्य भूमिका निभाई थी और उनकी लंबी भूख हड़ताल के आगे आखिरकार केंद्र को झुकना पड़ा था।
पावरफुल विधानसभा और बजट का पूरा हक
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार के सामने लद्दाख के लिए एक मजबूत और सीधे जनता द्वारा चुनी हुई केंद्रशासित प्रदेश स्तर की विधानसभा बनाने की मांग रखी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस विधानसभा के पास सिर्फ कानून बनाने की ही नहीं, बल्कि वित्तीय मामलों पर भी पूरा संवैधानिक अधिकार होना चाहिए। लद्दाख के नेताओं का मानना है कि टैक्स लगाने, बजट पास करने, सरकारी फंड का इस्तेमाल करने और कर्ज लेने जैसे महत्वपूर्ण फैसले पूरी तरह से स्थानीय विधानसभा के हाथों में ही होने चाहिए।
अपनी पुलिस और लोक सेवा आयोग की हुंकार
स्थानीय युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से लद्दाखी प्रतिनिधियों ने एक अलग लोक सेवा आयोग (PSC) का गठन करने की बात पुरजोर तरीके से उठाई है। इसके साथ ही उन्होंने मांग रखी है कि क्षेत्र के लिए अलग 'लद्दाख प्रशासनिक सेवा' और 'लद्दाख पुलिस सेवा' बनाई जाए, जिसमें स्थानीय कैडर को प्राथमिकता मिले। उनका तर्क है कि जब तक गृह मंत्रालय आंतरिक सुरक्षा और पुलिस प्रशासन का नियंत्रण निर्वाचित सरकार को नहीं सौंपता, तब तक लद्दाख के लोगों को लोकतंत्र का असली अहसास नहीं हो सकता।
24 सितंबर की घटना के पीड़ितों के लिए न्याय की पुकार
बैठक के माहौल में उस वक्त काफी भावुकता और तनाव देखने को मिला जब 24 सितंबर 2025 को हुई पुलिस फायरिंग का मुद्दा उठा। घटना की पहली बरसी करीब आने के बीच प्रतिनिधियों ने पुलिस कार्रवाई में मारे गए निर्दोष नागरिकों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिवारों के लिए सम्मानजनक मुआवजे और इंसाफ की मांग उठाई। गृह मंत्रालय के अधिकारियों से कहा गया कि पीड़ितों और घायलों पर दर्ज सभी मुकदमों को बिना किसी शर्त के तुरंत वापस लिया जाना चाहिए ताकि जख्मों पर मरहम लगाया जा सके।
जमीन और व्यापार के लिए विशेष सुरक्षा का कवच
संवैधानिक ढांचा पूरी तरह लागू होने तक लद्दाख के प्रतिनिधियों ने अंतरिम सुरक्षा व्यवस्था की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने कहा कि लद्दाख की अनूठी संस्कृति, जमीन, अर्थव्यवस्था और आबादी के संतुलन को बचाने के लिए कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। व्यापारिक गतिविधियों, नया कारोबार शुरू करने और ट्रेड लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए 'लद्दाख रेजिडेंस सर्टिफिकेट' (LRC) को पूरी तरह अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, जनजाति वर्ग के लिए सुरक्षित अधिकारों का लाभ उठाने के लिए विशेष एसटी प्रमाणपत्र को ही आधार बनाने पर बल दिया गया है ताकि बाहरी हस्तक्षेप को पूरी तरह रोका जा सके।