US में मोहन भागवत की एंट्री से पहले भयंकर बवाल! USCIRF ने खोला मोर्चा, RSS को बैन करने की मांग

US Demand RSS Ban: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में होने वाले कार्यक्रम से पहले अमेरिका में विवाद बढ़ गया है। USCIRF के अधिकारियों ने आरएसएस पर कार्रवाई और उसके नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं देने की मांग की है।

Update:2026-08-20 07:52 IST

US Demand RSS Ban: अमेरिका की राजनीति में इस समय जबरदस्त हलचल मची हुई है। भारत के प्रमुख संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुखिया मोहन भागवत का अमेरिका दौरा तय हुआ है। वह 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में होने वाले 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' में शामिल होने वाले हैं। इस बड़े कार्यक्रम से ठीक पहले अमेरिका की एक धार्मिक संस्था के अधिकारियों ने बावेला खड़ा कर दिया है। उन्होंने खुलेआम मांग की है कि संघ पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं और इसके आला नेताओं के साथ कोई भी बड़ी मुलाकात या बैठक न की जाए।

अमेरिकी संस्था का बड़ा हमला

धार्मिक आजादी की निगरानी करने वाली अमेरिकी संस्था USCIRF के प्रमुख आसिफ महमूद ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद संघ से जुड़े रहे हैं। महमूद के अनुसार, आरएसएस एक बहुत बड़ा ढांचा है, जिसके अलग-अलग गुटों पर ईसाई और मुसलमान जैसे अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं। इसी वजह से अमेरिका को इस संगठन के प्रति बेहद सख्त कदम उठाने चाहिए।

राजनयिक सम्मान देने से इनकार की मांग

USCIRF के कमिश्नर जीन मिल्स ने भी आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने साफ कहा कि संघ के प्रतिनिधियों को किसी भी तरह का सरकारी या राजनयिक सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जिन लोगों या समूहों पर आस्था की आजादी छीनने के आरोप हैं, उन पर तुरंत कड़े प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए। इसी बीच 'हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स' नाम के एक और गुट ने कहा कि दिखावे की एकता से असलियत नहीं छिप सकती और भागवत के दौरे को संघ के पुराने इतिहास से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

पहले भी उठ चुकी है पाबंदी की मांग

यह कोई पहली बार नहीं है जब अमेरिकी आयोग ने भारत के खिलाफ ऐसा सख्त रुख अपनाया हो। 2026 में ही मार्च के महीने में जारी अपनी सालाना रिपोर्ट में USCIRF ने भारत की कड़ी निंदा की थी। उस दौरान आयोग ने आरएसएस के साथ-साथ भारत की खुफिया एजेंसी 'रॉ' (RAW) पर भी पाबंदी लगाने की सलाह दी थी। हालांकि, भारत सरकार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था।

भारत का करारा और मुंहतोड़ जवाब

भारत ने अमेरिकी संस्था के बयानों और रिपोर्टों को पूरी तरह से मनगढ़ंत और बेबुनियाद करार दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह आयोग हमेशा आधी-अधूरी और पक्षपातपूर्ण जानकारी के आधार पर भारत की छवि खराब करने की कोशिश करता है। भारत सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि झूठे विचारों के आधार पर बनाई गई ऐसी रिपोर्टों का कोई मतलब नहीं है।

विदेश मंत्रालय ने दिखाया आईना

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मार्च महीने में बयान जारी कर अमेरिकी संस्था की सोच पर गहरे सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय अमेरिका को अपने देश के अंदर झांकना चाहिए। अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर लगातार हमले हो रहे हैं और उन्हें तोड़ा-फोड़ा जा रहा है। वहां भारतीय मूल के लोगों को डराया-धमकाया जा रहा है और उनके प्रति नफरत बढ़ रही है। जायसवाल ने कहा कि अमेरिका को भारत को निशाना बनाने के बजाय अपनी इन गंभीर समस्याओं को ठीक करने पर ध्यान देना चाहिए।

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