Onion Price Hike: चीनी के बाद अब प्याज ने बढ़ाई टेंशन! नासिक मंडी में 76% उछले दाम, त्योहारों से पहले बिगड़ा किचन बजट

Onion Price : त्योहारी सीजन से पहले प्याज की कीमतों में तेज उछाल आया है। नासिक मंडी में एक महीने में थोक भाव 76% बढ़ा, जबकि खुदरा कीमत भी 19% चढ़ी है।

Update:2026-08-24 23:23 IST

Onion Price Today (Image Credit-Social Media)

नई दिल्ली। आगामी त्योहारी सीजन से पहले आम उपभोक्ताओं पर महंगाई की चौतरफा मार पड़ती दिख रही है। पहले से ही आसमान छू रही चीनी की कीमतों के बाद अब प्याज के दाम भी बेलगाम होने लगे हैं। देश की प्रमुख प्याज मंडी नासिक में बीते एक महीने के भीतर थोक भाव में करीब 76 प्रतिशत का तेज उछाल दर्ज किया गया है, जिसके चलते कई राज्यों में खुदरा कीमतें भी तेजी से चढ़ने लगी हैं।

थोक से खुदरा तक उछाल के आंकड़े

नासिक मंडी में तेज वृद्धि: नासिक मंडी में एक महीने पहले प्याज का थोक भाव 2,050 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 19 अगस्त को 3,750 रुपये और 21 अगस्त को 3,600 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गया।

राष्ट्रीय औसत भाव: उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 22 अगस्त को देश में प्याज का औसत थोक भाव 3,397 रुपये प्रति क्विंटल और खुदरा भाव 41.64 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। पिछले महीने के 34.95 रुपये प्रति किलो की तुलना में खुदरा कीमतों में लगभग 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है।

कीमतों में तेजी के प्रमुख कारण

1. आवक और मौसम का अंतराल: अगस्त-सितंबर के दौरान रबी प्याज का पुराना स्टॉक कम होने लगता है, जबकि नई खरीफ फसल की आवक में देरी होती है। इस बार मानसून की अनिश्चितता और भारी बारिश के कारण खरीफ की बोआई देर से हुई है।

2. सरकारी खरीद लक्ष्य से आधी: दो साल पहले जहां 5 लाख टन प्याज खरीद का लक्ष्य था, वहीं इस साल इसे घटाकर 2 लाख टन किया गया। सरकार द्वारा खरीद मूल्य को 1,875 रुपये से बढ़ाकर 2,645 रुपये प्रति क्विंटल करने के बावजूद जुलाई अंत तक महज 1.20 लाख टन ही खरीदा जा सका।

3. जमाखोरी का दबाव: खुले बाजार में किसानों को बेहतर दाम मिलने और सरकारी खरीद कम रहने से बफर स्टॉक सीमित रह गया है, जिसका फायदा उठाकर जमाखोर कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना रहे हैं।

चीनी और अन्य खाद्य पदार्थों के साथ दोहरी मार

यह तेजी ऐसे समय में आई है जब खाद्य टोकरी के अन्य जरूरी घटक पहले से ही महंगे हैं:

चीनी: खुदरा बाजार में चीनी 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है, जहां पिछले एक महीने में ही करीब 17 रुपये प्रति किलो का उछाल आया है।

सप्लाई का अंतर: चीनी के मामले में सरकार के पास तत्काल 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात और स्टॉक लिमिट लगाने जैसे कई उपाय हैं, लेकिन प्याज के मामले में तुरंत राहत देने के लिए सरकार के पास केवल सीमित बफर स्टॉक का ही विकल्प है।

नासिक प्याज निर्यातक संघ के अनुसार, बफर स्टॉक सीमित होने के कारण सरकार के लिए सीधे बाजार को संतुलित करना और जमाखोरों पर दबाव बनाना चुनौतीपूर्ण होगा। ऐसे में जब तक खरीफ की नई आवक मंडियों में नहीं पहुंचती, अगले डेढ़-दो महीने तक प्याज और चीनी दोनों के मोर्चे पर उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत होगी।

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