Onion Price Hike 2026: किचन का गणित बिगाड़ेगा प्याज... नई खरीद दर लागू, बाजार में बढ़ सकते हैं भाव
Onion Price Hike 2026: केंद्र सरकार ने प्याज की खरीद दर 15.80 रुपये से बढ़ाकर 16.50 रुपये प्रति किलो कर दी है। जानिए इसका किसानों, उपभोक्ताओं और बाजार में प्याज की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है।
Onion Price Hike 2026 News India
Onion Price Hike 2026 News: घर की रसोई में हर सब्जी का स्वाद बढ़ाने वाला प्याज अब आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है।सीमित आय और बढ़ती कीमतों के साथ पहले से महंगाई की मार झेल रहे लोगों के लिए आने वाले दिनों में किचन का बजट और बिगड़ने की आशंका है। केंद्र सरकार ने किसानों से प्याज खरीदने की कीमत बढ़ाने का फैसला किया है, जो शनिवार यानी 13 जून से लागू हो गया है। इस कदम से किसानों को कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन बाजार विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इसका असर जल्द ही खुदरा कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
देश में खुदरा महंगाई दर मई में बढ़कर 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई है। टमाटर, अदरक और अन्य सब्जियों की बढ़ती कीमतों के बीच अब प्याज भी महंगा होने की संभावना ने गृहिणियों और आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
किसानों के लिए बढ़ी खरीद दर
सरकार ने अपने बफर स्टॉक कार्यक्रम के तहत प्याज खरीदने की कीमत 15.80 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 16.50 रुपये प्रति किलो कर दी है। बफर स्टॉक वह व्यवस्था होती है जिसके तहत सरकार किसानों से फसल खरीदकर भंडारण करती है ताकि जरूरत पड़ने पर बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। नई खरीद दर शनिवार से प्रभावी होगी। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना और बाजार में संतुलन बनाए रखना है।
बाजार में क्यों बढ़ सकती हैं कीमतें?
कृषि बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि जब सरकार की खरीद कीमत बढ़ती है तो उसका असर धीरे-धीरे थोक और खुदरा बाजारों में भी दिखाई देता है। व्यापारी और उत्पादक बढ़ी हुई लागत को बिक्री मूल्य में शामिल करते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। हालांकि कीमतों में कितना इजाफा होगा, यह आने वाले महीनों में उत्पादन, भंडारण और आपूर्ति की स्थिति पर भी निर्भर करेगा। लेकिन संकेत यही हैं कि प्याज फिलहाल सस्ता होने वाला नहीं है।
महाराष्ट्र के किसान अब भी नाखुश
देश के कुल प्याज उत्पादन में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। बावजूद इसके किसान संगठनों का कहना है कि सरकार की नई खरीद दर उनकी लागत के मुकाबले बेहद कम है।
किसानों के अनुसार बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, सिंचाई और मजदूरी की लागत पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में 16.50 रुपये प्रति किलो का भाव उन्हें पर्याप्त लाभ नहीं देता। किसान संगठनों की मांग है कि सरकार कम से कम 30 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज खरीदे ताकि खेती लाभकारी बन सके।
पहले से बढ़ रही है खाद्य महंगाई
प्याज की संभावित महंगाई ऐसे समय सामने आई है जब कई अन्य खाद्य वस्तुओं के दाम पहले ही तेजी से बढ़ चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मई महीने में टमाटर की कीमतों में 48.43 प्रतिशत और अदरक की कीमतों में 32.49 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फल और सब्जियों की बढ़ती कीमतों का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है। मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए रोजमर्रा का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य रहता है और नई फसल की आवक अच्छी होती है तो कीमतों को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन यदि उत्पादन या आपूर्ति प्रभावित हुई तो प्याज की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।