PM की 'टी मीटिंग' से घबराए राहुल गांधी! विपक्ष ने किया बॉयकॉट, मोदी ने ले चुटकी
PM Modi tea meeting: लोकसभा सत्र के स्थगित होने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने सांसदों के लिए 'टी मीटिंग' आयोजित की, लेकिन विपक्ष ने इसका पूरी तरह बहिष्कार कर दिया।
PM Modi tea meeting: दिल्ली की सियासी गलियों में आज एक बार फिर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच की तकरार खुलकर सामने आ गई। लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद सदस्यों के लिए 'टी मीटिंग' का आयोजन किया, लेकिन इसमें विपक्ष का कोई भी नेता नहीं पहुंचा। विपक्षी दलों ने इस बैठक का पूरी तरह से बायकॉट कर दिया। यह घटना सिर्फ एक बहिष्कार नहीं, बल्कि मॉनसून सत्र के दौरान चले लंबे राजनीतिक गतिरोध का एक सीधा प्रतिबिंब है।
PM मोदी की 'चाय पर चुटकी'
विपक्ष की गैरमौजूदगी में भी पीएम मोदी ने सत्र को 'अच्छा' बताया और कई महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने पर संतोष जताया। उन्होंने ऑनलाइन गेम्स विधेयक को दूरगामी प्रभाव वाला बताते हुए कहा कि इसी पर सबसे ज्यादा चर्चा होनी चाहिए थी। लेकिन 'चाय पर चर्चा' का असली मसाला तब सामने आया जब पीएम मोदी ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में बहुत से युवा और प्रतिभाशाली नेता हैं, लेकिन गांधी परिवार की असुरक्षा के कारण उन्हें बोलने का मौका नहीं मिलता। पीएम मोदी ने आगे कहा कि संभव है, यही युवा नेता राहुल गांधी को असुरक्षा और घबराहट में डाल रहे हों।
सदन में 'गतिरोध' बना मुख्य मुद्दा
पीएम मोदी के इस बयान ने विपक्ष की रणनीति पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में चर्चा के लिए 120 घंटे का समय तय था, लेकिन हंगामे और गतिरोध के चलते सिर्फ 37 घंटे ही चर्चा हो सकी। इसका मतलब है कि 83 घंटे गतिरोध की भेंट चढ़ गए। इस दौरान कुल 14 बिल पेश हुए, जिनमें से 12 बिना किसी खास चर्चा के ही पारित कर दिए गए। यह दर्शाता है कि विपक्ष ने सार्थक बहस के बजाय व्यवधान को प्राथमिकता दी। पीएम मोदी ने इसी बात पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष बड़े-बड़े विधेयकों पर चर्चा में शामिल हो सकता था, लेकिन वे केवल व्यवधान डालने में लगे रहे।
बायकॉट की वजह, राजनीति या मजबूरी?
विपक्ष का टी मीटिंग का बायकॉट करना कोई हैरान करने वाली बात नहीं है। यह उनके पिछले बयानों और सदन के भीतर के व्यवहार के अनुरूप था। हालांकि, पीएम मोदी का कांग्रेस के अंदरूनी कलह और युवा नेताओं की प्रतिभा पर टिप्पणी करना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। यह सीधे तौर पर कांग्रेस के नेतृत्व और उसकी आंतरिक एकजुटता पर सवाल उठाता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष, खासकर कांग्रेस, इस आरोप का क्या जवाब देती है और क्या यह 'चाय पर चर्चा' आगामी चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन पाती है।